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मेंटल हेल्थ: दिमाग में लगातार चलती रहती है एक ही बात? जानिए ओवरथिंकिंग कब बन जाती है समस्या

Sat, 12 Sep 2026 07:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हर बात पर विचार करना सामान्य है, लेकिन जब वही विचार बार-बार लौटें, समाधान न निकलें और नींद-काम या रिश्तों पर असर पड़ने लगे तो यह समस्या बन सकती है। लगातार नकारात्मक सोच कई बार चिंता और अवसाद की दिक्कतों से संबंधित हो सकती है।
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ओवरथिकिंग की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
ओवरथिकिंग यानी दिमाग में एक ही बात को बार-बार दोहराते रहना, उसी पर विचार करते रहना। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है-ओवर का मतलब बहुत ज्यादा और थिकिंग का मतलब- किसी विषय पर सोचते रहना।

भविष्य में कुछ गलत होने की आशंका हो या किसी ने कुछ कह दिया, तो उसी पर लगातार सोचते रहना। ये आदत ओवरथिकिंग का संकेत हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किसी विषय पर सोचना-विचारना इंसान की स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन जब यही सोच दिमाग पर लगातार कब्जा करने लगे और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तब इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

मनोविज्ञान में बार-बार नकारात्मक विचारों में उलझे रहने को दोहराव वाली नकारात्मक सोच के रूप में देखा जाता है। ओवरथिंकिंग की आदत कई बार तनाव-चिंता और अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।

आइए जानते हैं कि किसी विषय को लेकर सोचने की आदत कब समस्या बन जाती है?
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ओवरथिकिंग की समस्या - फोटो : Freepik.com
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ओवरथिंकिंग का मतलब यह नहीं कि ज्यादा सोचने वाला हर व्यक्ति मानसिक बीमारी का शिकार है। समस्या तब बन जाती है जब सोचने से समाधान निकलने के बजाय तनाव बढ़ने लगे। ज्यादा सोचते रहने की आदत जब आपकी नींद खराब करने लगे, काम पर ध्यान न लगे या आप सामान्य गतिविधियों से दूर होने लगें तो अलर्ट हो जाना चाहिए। 


पहले सोच और ओवरथिंकिंग में फर्क समझें

किसी समस्या पर विचार करना सामान्य है। नौकरी से जुड़ी परेशानी है तो उसके समाधान के विकल्प सोचना सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर वही बात घंटों चलती रहे और कोई निर्णय या समाधान सामने न निकल पाए, तो यह दोहराव वाली सोच बन सकती है।

इसमें व्यक्ति बार-बार वही सवाल करता है- ऐसा क्यों हुआ, मैंने ऐसा क्यों कहा, आगे क्या होगा? शोध में दोहराव वाली नकारात्मक सोच चिंता और अवसाद के खतरे को बढ़ा सकती है।
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ओवरथिकिंग के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
 नींद और रोजमर्रा के काम पर पड़ सकता है असर

ओवरथिंकिंग की आदत आपके जीवन और नींद को प्रभावित करने लग जाती है।
  • कई बार रात-रात भर विचारों का सिलसिला चलता रहता है और नींद आने में परेशानी हो सकती है।
  • इससे काम के बीच ध्यान बार-बार भटकने लगता है और आप घंटों एक ही बात को लेकर परेशान रह सकते हैं। इस तरह की दिक्कतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लंबे समय तक बनी रहने वाली नकारात्मक सोच धीरे-धीरे चिंता, अवसाद और भावनात्मक परेशानियों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
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समय पर लें डॉक्टरी मदद - फोटो : Adobe stock
समय  पर लें डॉक्टरी मदद

ओवरथिंकिंग में दिमाग व्यस्त रहता है, लेकिन आमतौर पर जिस समस्या को लेकर विचार चल रहे होते हैं उसका कोई हल नहीं निकल पाता। बार-बार पुरानी घटनाओं को दोहराने से आप कई बार खुद को दोष देने लग जाते हैं। ये स्थितियां मानसिक स्वास्थ्य के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती हैं। 

डॉक्टर कहते हैं, अगर लगातार सोचने की वजह से नींद, काम, रिश्ते या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तुरंत सलाह लें। मदद लेने का मतलब यह नहीं कि समस्या बहुत बड़ी हो चुकी है। समय पर मनोवैज्ञानिक सहायता लेने से सोचने के इस पैटर्न को समझने और बदलने में मदद मिल सकती है। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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