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हेल्थ की बात: उम्र बढ़ते ही नजर कमजोर क्यों होने लगती है? जानिए एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन के बारे में

Sat, 03 Oct 2026 09:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उम्र बढ़ने पर नजर कमजोर होना आम है। एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन में आंख का मैक्युला प्रभावित होता है, जिससे नजर कमजोर हो सकती है। शुरुआत में लक्षण नहीं दिखाई देते, इसलिए समय के साथ इसका खतरा बढ़ता जाता है।
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आंखों की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती जाती है, शरीर में कई तरह के बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। हड्डियां पहले जितनी मजबूत नहीं रह जातीं, शरीर की मांसपेशियां कम होने लगती हैं जिससे आपके लिए कोई भी काम करना पहले जितना आसान नहीं रह जाता है। उम्र बढ़ने के साथ कई तरह की बीमारियों का भी खतरा बढ़ने लग जाता है। 60 की उम्र के बाद पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर और 50 की उम्र के बाद महिलाओं में मेनोपॉज के कारण आर्थराइटिस और दूसरी हार्मोनल दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।

महिला हो या पुरुष उम्र बढ़ने के साथ आंखों की रोशनी कम होना दोनों में ही आम है। इसके लिए आमतौर पर एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन यानी एएमडी को सबसे प्रमुख कारण माना जाता है। इसमें आंख के रेटिना के बीच का हिस्सा यानी मैक्युला प्रभावित होता है। यही हिस्सा सामने की चीजों को साफ देखने, पढ़ने और चेहरे पहचानने में मदद करता है।

खास बात यह है कि इस बीमारी की शुरुआत में कई लोगों को कोई खास लक्षण महसूस नहीं होता। इसलिए जब तक नजर में बदलाव महसूस होता है, तब तक समस्या आगे बढ़ चुकी हो सकती है। 
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आंखों की समस्या - फोटो : Adobe Stock Photo
एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन की समस्या

उम्र बढ़ने के साथ एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन की समस्या घेरने लग जाती है। आमतौर पर 55 साल के बाद इसका जोखिम महिला और पुरुष दोनों में बढ़ जाता है। 
 
  • यदि आपके परिवार में पहले से किसी को एएमडी की समस्या रही है तो इसके जोखिमों को लेकर दूसरे लोगों को भी अलर्ट रहना चाहिए। 
  • धूम्रपान की आदत को भी इसका खतरा बढ़ाने वाला पाया गया है, अगर आप धूम्रपान करते हैं तो इससे आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है। 
  • इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और जीवनशैली की गड़बड़ी भी जोखिमों को बढ़ाने वाली मानी जाती रही हैं।
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आंखों में होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock Images
एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन की पहचान कैसे करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर मामलों में एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन की शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होता। बीमारी बढ़ने पर सामने की चीजें धुंधली दिख सकती हैं और पढ़ने या चेहरे पहचानने में परेशानी होने लगती है।
 
  • बीमारी बढ़ने के साथ सीधी रेखाएं टेढ़ी या लहरदार दिखाई देना शुरू हो जाती हैं। नजर के बीच में धुंधला या खाली हिस्सा भी दिखाई दे सकता है।
  • आपको रंगों की चमक पहले जैसी महसूस नहीं होती और कम रोशनी में चीजों को देखने में दिक्कत भी हो सकती है। 
  • अगर अचानक नजर में कोई बदलाव आए, सीधी रेखाएं टेढ़ी दिखें तो आंखों के डॉक्टर से तुरंत जांच करानी चाहिए।
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आंखों की समय-समय पर कराएं जांच - फोटो : Freepik.com
इस समस्या से कैसे बचा जा सकता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एएमडी को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ उपाय जोखिमों को कम करने में मदद कर सकते हैं। चूंकि उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ जाता है इसलिए कम उम्र से ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाना और नियमित रूप से आंखों की जांच कराना सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।
 
  • धूम्रपान आंखों के लिए बहुत नुकसानदायक है, इससे बचने का प्रयास करें।
  •  ब्लड प्रेशर और शुगर को कंट्रोल रखना जरूरी है, ये दोनों ही आंखों के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
  • आंखों को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और मछली जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन को कंट्रोल रखना भी आंखों की सेहत को ठीक रखने के लिए जरूरी है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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