क्या है गेमर डेथ सिंड्रोम?
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बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा
बच्चों और किशोरों की आंखें अधिक संवेदनशील होती हैं। देर रात तक मोबाइल देखने से उनकी नींद और एकाग्रता प्रभावित हो सकती है।
- स्क्रीन टाइम बढ़ने से बाहर खेलने का समय भी कम होता है, जिसे मायोपिया बढ़ने के जोखिम से जोड़ा गया है।
- विशेषज्ञ बच्चों के लिए सीमित स्क्रीन टाइम और सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन बंद करने की सलाह देते हैं।
इसके अलावा कुछ लोगों में लंबे समय तक मोबाइल देखते रहने से सिरदर्द और माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है। तेज रोशनी और लगातार स्क्रीन पर फोकस करने से आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं। जिन लोगों को पहले से माइग्रेन होता है, उनमें स्क्रीन की चमक और कंट्रास्ट परेशानी बढ़ा सकते हैं।
इस तरह के जोखिमों को कम करने के लिए 20-20-20 नियम अपनाएं। इसमें हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। बार-बार पलकें झपकाएं और स्क्रीन को आंखों से 40-75 सेंटीमीटर दूर रखें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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