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Tooth Decay: पत्थर जैसे मजबूत होते हैं दांत, फिर क्यों इनमें होने लगती है सड़न?

Tue, 09 Jun 2026 07:36 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दांतों की सड़न का सबसे बड़ा कारण अत्यधिक चीनी का सेवन माना जाता है। अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के अनुसार बार-बार मीठा खाने वाले लोगों में कैविटी का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा भी कई कारण हैं जिनपर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
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दांतों में सड़न की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आप भी मीठी चीजें ज्यादा खाते हैं? इससे सिर्फ ब्लड शुगर, कैलोरी, मोटापा और मेटाबॉलिज्म की समस्या नहीं होती, ये आपके दांतों के लिए भी बहुत नुकसानदायक हो सकती है। ज्यादा मीठी चीजें, जैसे मिठाई, टॉफी, कुकीज और चॉकलेट दांतों में चिपककर सड़न पैदा करने लगती हैं। अक्सर लोग सोचते हैं कि दांत पत्थर की तरह मजबूत होते हैं, फिर इनमें सड़न कैसे होने लग जाती है? 

दांतों का सड़ना दुनियाभर में सबसे आम समस्या है, जिससे लगभग 2.5 अरब लोग प्रभावित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि करीब 3.5 अरब लोग मुंह की बीमारियों से पीड़ित हैं, जिनमें दांतों का सड़ना सबसे बड़ी समस्या है।

आइए जान लेते हैं कि आखिर दांतों में सड़न क्यों होती है और इसे कैसे रोका जा सकता है?
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क्यों सड़ने लगते हैं दांत? - फोटो : Adobe stock Images
दांतों में सड़न की समस्या

दंत रोग विशेषज्ञ कहते हैं, भले ही दांत देखने में पत्थर जैसे लगते हैं, पर असल में ये किसी पत्थर के नहीं बने होते। ये इनेमल, डेंटिन, पल्प  और सीमेंटम से मिलकर बनते हैं।
 
  • दांतों के ऊपर एक मजबूत परत होती है जिसे इनेमल कहा जाता है। यह काफी कठोर होती है, लेकिन इसके बावजूद कुछ आदतें और खान-पान इसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। 
  • जब हम बार-बार मीठी चीजें खाते हैं, कोल्ड ड्रिंक पीते हैं या दांतों की सफाई में लापरवाही करते हैं, तब मुंह में मौजूद बैक्टीरिया इन खाद्य पदार्थों से एसिड बनाते हैं।
  • यही एसिड धीरे-धीरे दांतों की सुरक्षात्मक परत को घिसने लगता है और सड़न हो सकती है।
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ज्यादा चीनी खाने से क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Freepik.com
सिर्फ खान-पान ही नहीं कुछ अन्य आदतें भी दांतों में सड़न बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

1. ज्यादा मीठी चीजें तो नहीं खाते आप?

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के अनुसार बार-बार मीठा खाने वाले लोगों में कैविटी का खतरा काफी बढ़ जाता है। दांतों की सड़न का सबसे बड़ा कारण चीनी वाली चीजें ज्यादा खाना है।
 
  • जब हम चॉकलेट, टॉफी,  बिस्कुट, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजें खाते हैं, तो इसके कुछ सूक्ष्म हिस्से दांतों में चिपक जाते हैं।
  • मुंह में मौजूद बैक्टीरिया इन शर्कराओं को तोड़कर एसिड बनाते हैं। यह एसिड दांतों के इनैमल पर हमला करता है और धीरे-धीरे उसे कमजोर करने लगता है।
  • बच्चों और किशोरों में कैविटी का सबसे बड़ा कारण यही है।

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मुंह की स्वच्छता का रखें ध्यान - फोटो : freepik.com
मुंह की साफ-सफाई न करने से बढ़ जाती है दिक्कत

दांतों में सड़न का एक बड़ा कारण मुंह की अच्छे से साफ-सफाई न करना भी है। डॉक्टर सभी लोगों को दिन में दो बार ब्रश करने की सलाह देते हैं।
 
  • खाना खाने के बाद जब भोजन के कण दांतों के बीच फंस जाते हैं, तो उन पर बैक्टीरिया जमा होकर प्लाक बनाने लगते हैं। 
  • प्लाक एक चिपचिपी परत होती है जो दांतों पर लगातार बनी रहती है।
  • यदि प्लाक को नियमित ब्रशिंग और फ्लॉसिंग से नहीं हटाया जाए तो यह बैक्टीरिया के लिए सुरक्षित घर बन जाता है। ये बैक्टीरिया एसिड बनाकर दांतों के इनैमल को नुकसान पहुंचाते हैं। 
  • अध्ययन बताते हैं कि जो लोग रात में ब्रश नहीं करते, उनमें कैविटी और मसूड़ों की बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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खान-पान को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Adobe stock photos
बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना

बहुत से लोग दिनभर कुछ न कुछ खाते रहते हैं। हर बार जब आप कुछ खाते या पीते हैं, तो मुंह में बैक्टीरिया सक्रिय होकर एसिड बनाना शुरू कर देते हैं। 
 
  • सामान्यतः लार इस एसिड को निष्क्रिय कर देती है, लेकिन बार-बार खाने से लार को अपना काम करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता।
  • दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मीठे या स्टार्च वाले खाद्य पदार्थ खाते रहने से इनैमल डैमेज होने और सड़न बढ़ने का खतरा रहता है।
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धूम्रपान के नुकसान - फोटो : Freepik.com
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन

तंबाकू और धूम्रपान केवल फेफड़ों के लिए ही नहीं बल्कि दांतों के लिए भी गंभीर खतरा हैं। 
 
  • तंबाकू मुंह में बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ देता है और लार के उत्पादन को कम कर सकता है।
  • अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान करने वाले लोगों में दांतों के जल्दी खराब खोने का खतरा अधिक होता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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