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Health Tips: मोबाइल और स्क्रीन से ब्रेक लेना क्यों है आपकी मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी? जानें क्या कहते हैं शोध

Mon, 06 Oct 2025 04:25 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mobile Addiction:  आज के आधुनिक समय में बहुत से लोग किसी न किसी वजह से जरूरत से ज्यादा स्क्रीन का इस्तेमाल कर रहे हैं। कभी मोबाइल में स्क्रीन का प्रयोग करते हैं, तो कभी देर तक टीवी देखते हैं। इससे हमारे सेहत पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।  
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मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Adobe stock
Screen Time Effects: आज की आधुनिक दुनिया में, मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैबलेट हमारी दिनचर्या का एक अनिवार्य हिस्सा बन गए हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हमारी आंखें किसी न किसी स्क्रीन पर टिकी रहती हैं। यह आदत न सिर्फ हमारी शारीरिक सेहत को प्रभावित कर रही है, बल्कि हमारी मानसिक सेहत के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गई है। लगातार स्क्रीन पर नजर गड़ाए रखना तनाव, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को जन्म दे रहा है।

शोध बताते हैं कि सोशल मीडिया पर घंटों बिताना और दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करना हमारे आत्मविश्वास को कम कर सकता है और अकेलापन बढ़ा सकता है। इसके अलावा स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (ब्लू लाइट) हमारी नींद के पैटर्न को भी बाधित करती है, जिससे अनिद्रा (इनसोम्निया) की समस्या पैदा होती है। इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि मोबाइल और स्क्रीन से ब्रेक लेना आपकी मानसिक सेहत के लिए क्यों जरूरी है।
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तनाव की बढ़ती समस्या - फोटो : freepik
तनाव और चिंता का बढ़ता स्तर
लगातार स्क्रीन टाइम के कारण हमारा दिमाग ओवरलोड हो जाता है। सोशल मीडिया पर फेक न्यूज, नकारात्मक खबरें और दूसरों की परफेक्ट लाइफस्टाइल देखकर लोग अक्सर अपने जीवन से असंतुष्ट महसूस करते हैं। यह तुलनात्मक प्रवृत्ति तनाव और चिंता के लेवल को बढ़ाती है, जिससे मानसिक शांति भंग होती है।

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नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock
नींद की कमी और एकाग्रता में कमी
मेलाटोनिन वो हार्मोन होते हैं जिससे हमें अच्छी नींद आती है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे मस्तिष्क में मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को रोकती है। यही वजह है कि हमें सोने में दिक्कत होती है और हमारी नींद की गुणवत्ता खराब होती है। इसके अलावा लगातार नोटिफिकेशन और ढेर सारे इंफॉर्मेशन हमारी एकाग्रता को भी कमजोर करती है, जिससे हम किसी एक काम पर ध्यान नहीं दे पाते।

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अकेलापन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
सामाजिक अलगाव और अकेलापन
आभासी दुनिया में ज्यादा समय बिताने से लोग वास्तविक दुनिया से दूर हो जाते हैं। फोन पर चैटिंग और ऑनलाइन गेम्स ने आमने-सामने के सामाजिक मेलजोल को कम कर दिया है। यह अलगाव की भावना और अकेलेपन को बढ़ा सकता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है।
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तनाव की समस्या - फोटो : Freepik.com
क्या करें?
इन समस्याओं से बचने के लिए डिजिटल डिटॉक्स अपनाना बहुत जरूरी है। दिन में कुछ घंटों के लिए मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बनाएं। सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले समय को सीमित करें। सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी स्क्रीन बंद कर दें। स्क्रीन से ब्रेक लेकर आप अपने दिमाग को आराम दे सकते हैं, बेहतर नींद पा सकते हैं और वास्तविक दुनिया में लोगों के साथ जुड़ सकते हैं, जिससे आपकी मानसिक सेहत बेहतर होती है।

स्रोत और संदर्भ
Screen time and emotional problems

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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