फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेहत की बात: क्या होते हैं प्रोबायोटिक्स, जिसे अच्छे पाचन के लिए माना जाता है सबसे जरूरी? आप भी जानिए

Tue, 06 May 2025 09:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, प्रोबायोटिक्स वे जीवित सूक्ष्मजीव हैं जो मानव शरीर में संतुलन बनाकर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
पाचन तंत्र को ठीक रखने के लिए जरूरी है प्रोबायोटिक्स - फोटो : Freepik.com
आपने भी ये कहावत जरूर सुनी होगी, 'पेट ठीक तो स्वास्थ्य ठीक'। मतलब अगर पाचन स्वास्थ्य पर ध्यान दे लिया जाए तो इससे संपूर्ण स्वास्थ्य को ठीक रखा जा सकता है। पाचन स्वस्थ रखने के लिए गट हेल्थ का ठीक रहना जरूरी है और गट हेल्थ ठीक रहे इसके लिए जरूरी है कि आंतों में मौजूद स्वस्थ बैक्टीरिया बढ़ें और अपना काम ठीक तरीके से करते रहें।

आंतों में मौजूद हेल्दी बैक्टीरिया को बढ़ावा देने के लिए आहार में प्रोबायोटिक्स वाली चीजों की मात्रा बढ़ाने पर जोर दिया जाता रहा है। 

प्रोबायोटिक्स वे खाद्य पदार्थ और स्वास्थ्य उत्पाद होते हैं जो आपके पेट में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। यही सूक्ष्मजीव भोजन के पाचन को ठीक रखने में सहायता करते हैं। आहार में कई ऐसे खाद्य और पेय पदार्थ हैं जो इन बैक्टीरिया को बढ़ावा देकर पाचन को ठीक रखने में सहायक हैं।
विज्ञापन

2 of 5
आंतों में हेल्दी बैक्टीरिया को कैसे बढ़ाएं - फोटो : Freepik.com
प्रोबायोटिक्स हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए जरूरी

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, प्रोबायोटिक्स वे जीवित सूक्ष्मजीव हैं जो मानव शरीर में संतुलन बनाकर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं। हमारे शरीर के भीतर ट्रिलियनों सूक्ष्मजीव रहते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से गट माइक्रोबायोटा कहा जाता है। यह माइक्रोबायोटा पाचन, पोषण अवशोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता, और मानसिक स्वास्थ्य में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
विज्ञापन

3 of 5
पाचन को ठीक रखने के लिए प्रोबायोटिक्स - फोटो : adobe stock images
पाचन को ठीक रखने के लिए जरूरी हैं प्रोबायोटिक्स

अध्ययनों से पता चलता है कि अनुचित आहार, तनाव और एंटीबायोटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल के चलते आंतो में मौजूद इन स्वस्थ बैक्टीरिया को नुकसान हो रहा है। यही कारण है कि लोगों में गैस, अपच, दस्त, कब्ज, और कई प्रकार की आंत की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

हार्वर्ड हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट से पता चलता है कि अगर आप नियमित रूप से प्रोबायोटिक्स वाली चीजों का सेवन करते हैं तो इससे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम और इंफ्लेमेटरी बॉउल डिजीज जैसी पेट की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।

जिन लोगों को अक्सर गैस, सूजन, कब्ज और अपच की समस्या रहती है उनको आहार में प्रोबायोटिक्स की मात्रा बढ़ाने की सलाह दी जाती है।

4 of 5
प्रोबायोटिक्स इम्युनिटी के लिए भी जरूरी - फोटो : Adobe stock photos
इन फायदों को भी जानिए

प्रोबायोटिक्स सिर्फ पाचन को ठीक रखने के लिए ही नहीं, शरीर के लिए और भी कई प्रकार से लाभकारी है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाने में भी इससे लाभ मिलता है। 

जर्नल फ्रंटियर में प्रकाशित एक अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि प्रोबायोटिक्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बेहतर करते हैं, जिससे वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
  • प्रोबायोटिक्स श्वसन संक्रमण और एलर्जी से बचाव में सहायक पाए गए हैं।
  • अवसाद और चिंता को कम करने में भी  प्रोबायोटिक्स वाली चीजें फायदेमंद मानी जाती हैं।
  • प्रोबायोटिक्स त्वचा की समस्याएं और एक्जिमा को कम करने में भी लाभकारी मानी जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
आहार में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
प्रोबायोटिक्स के लिए किन चीजों का करें सेवन?

प्रोबायोटिक्स वाली चीजों को आहार में शामिल करके गुड बैक्टीरिया को बढ़ा सकते हैं।

दही, छाछ, फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ (जैसे इडली, डोसा, किमची) और कुछ प्रकार के सप्लीमेंट्स को शामिल किया जा सकता है। हालांकि इस बात का ध्यान रखें कि आहार के माध्यम से प्रोबायोटिक्स प्राप्त करना ज्यादा अच्छा रहता है।

प्रोबायोटिक्स हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते, विशेषकर जिनकी इम्युनिटी कमजोर हो। इसलिए किसी भी चीज के अधिक सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


------------
नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें