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Heart Health: क्यों इतना कमजोर हो गया है हमारा हार्ट? डॉक्टर से समझिए- आखिर कहां हो रही है लोगों से गलती

Fri, 09 Jun 2023 02:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हृदय रोगों की बढ़ती समस्या - फोटो : istock
हृदय रोग, वैश्विक स्तर पर मृत्यु का प्रमुख कारण रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों की रिपोर्ट्स देखें तो पता चलता है कि पहले की तुलना में अब हृदय रोगों के मामले ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं और इस कारण से मृत्युदर भी बढ़ा है। कई अध्ययनों में बताया गया है कि समय के साथ हमारा हृदय कमजोर होता जा रहा है, जिसके लिए बड़े स्तर पर लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी एक प्रमुख कारण है।

पहले के लोगों की तुलना में हमारा हृदय क्यों इतना कमजोर होता जा रहा है? इस बारे में समझने के लिए अमर उजाला ने दिल्ली के वरिष्ट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ अमित भारद्वाज से बातचीत की। डॉ अमित कहते हैं, इसमें कोई शक नहीं है कि मेरे 18 साल के अनुभव में पहले की तुलना में अब हृदय रोगों के मामले ज्यादा कॉमन हो गए हैं, कम उम्र के लोगों में भी इसका निदान हो रहा है।

इसके लिए कई फैक्टर्स जिम्मेदार है। कुछ के बारे में हमें जानकारी है पर उसपर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं, जबकि कुछ कारणों के बारे से ज्यादातर लोग अनजान हैं। 
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हृदय को स्वस्थ रखने के उपाय जरूरी - फोटो : Pixabay
हृदय को रखें सेहतमंद

जब हृदय स्वस्थ होता है, तो फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त एकत्र कर यह शरीर के बाकी हिस्सों में आसानी से पंप करता है। हालांकि जब हृदय कमजोर होता है तो इसका कार्य ठीक से नहीं हो पाता है। हृदय की कमजोरी सिर्फ हृदय के लिए ही नहीं पूरे शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है। लेकिन हृदय कमजोर क्यों होता जा रहा है और इसे स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं, आइए इस बारे में हृदय रोग विशेषज्ञ से समझते हैं।
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धमनियों में ब्लॉकेज की स्थिति - फोटो : istock
क्यों कमजोर हो रहा है हृदय

डॉ अमित बताते हैं हृदय को कमजोर करने वाले कई कारक हो सकते हैं। कोरोनरी आर्टरी डिजीज इसमें सबसे प्रमुख है। जब किसी व्यक्ति को धमनियों में रुकावट के कारण मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन (दिल का दौरा) होता है, तो हृदय की मांसपेशियों का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाता है और इससे पंपिंग डिसफंक्शन हो जाता है। यह स्थिति हृदय के लिए सामान्य तौर से काम कर पाने को कठिन बना देती है। 

इसी तरह से अगर आपको लगता है कि मेटाबॉलिक समस्याएं सिर्फ वजन को प्रभावित करती हैं तो यह जानना जरूरी है कि इससे हृदय रोगों का भी खतरा हो सकता है। मधुमेह, मोटापा और हाइपोथायरायडिज्म जैसे मेटाबॉलिक विकारों के चलते भविष्य में कार्डियोमायोपैथी का खतरा अधिक रहता है। ये स्थितियां हृदय के लिए समस्याकारक मानी जाती हैं।

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हार्ट अटैक और हृदय पर दबाव की समस्या - फोटो : pixaby
हार्ट पर ज्यादा प्रेशर पड़ना नुकसानदायक

कुछ ऐसी स्थितियां है जो हार्ट पर अत्यधिक प्रेशर बढ़ाने वाली हो सकती हैं। इसमें उच्च रक्तचाप, वाल्व डिजीज, थायरॉयड रोग, किडनी की बीमारी, मधुमेह या जन्म के समय मौजूद हृदय दोष प्रमुख हैं। ये सभी हृदय को समय के साथ कमजोर करती जाती हैं। हृदय की मांसपेशियों पर पड़ने वाले दबाव के कारण इसका जोखिम और अधिक हो सकता है। 
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हृदय को रखें स्वस्थ - फोटो : iStock
हृदय की देखभाल बहुत जरूरी

डॉ अमित कहते हैं, हृदय को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि आप हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल करें। संकुचित वाहिकाओं के माध्यम से रक्त को पंप करने के लिए हृदय को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, जो इस अंग को कमजोर कर रही है। इसके अलावा अगर आप स्ट्रेस ज्यादा लेते हैं तो यह भी आपके हृदय के लिए ठीक नहीं है।  

अपने लक्षणों की निगरानी करें, वजन और ब्लड प्रेशर को नियमित रूप से चेक करते रहे। यदि आपका वजन बिना किसी कारण के बढ़ गया है या ब्लड प्रेशर अक्सर कंट्रोल में नहीं रहता है तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर लें। थोड़ी सी सावधानी भविष्य में आपको गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम से बचाने में मददगार हो सकती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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