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Health Tips: ओरल हेल्थ पर ध्यान न देना पड़ सकता है भारी, डब्ल्यूएचओ ने भी किया सावधान

Mon, 07 Apr 2025 10:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कहता है मौखिक रोग कई देशों के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य बोझ बन गए हैं और लोगों को जीवन भर प्रभावित करते हैं। अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर मौखिक रोग लगभग 3.5 बिलियन (350 करोड़) लोगों को प्रभावित करते हैं।
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ओरल हेल्थ को ठीक रखने के लिए करें? - फोटो : freepik
अच्छी सेहत चाहते हैं तो आपको संपूर्ण स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। दुनियाभर में बढ़ती समस्याओं जैसे डायबिटीज हों या ब्लड प्रेशर इन्हें कंट्रोल रखने के लिए तो हम सभी निरंतर प्रयास करते रहते हैं पर क्या आप अपने ओरल हेल्थ पर ध्यान देते हैं? ये सिर्फ मुंह को साफ रखने तक सीमित नहीं है, ओरल हेल्थ का आपके संपूर्ण स्वास्थ्य पर असर हो सकता है।

मौखिक स्वास्थ्य की समस्याएं दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही हैं। बच्चे हों या बुजुर्ग हर उम्र के लोग दांतों से संबंधित दिक्कतों से परेशान देखे जा रहे हैं। खान-पान में गड़बड़ी और ओरल हेल्थ का ध्यान न रखना इसका प्रमुख कारण माना जाता है। 

दांतों में सड़न की दिक्कत काफी आम है। शुगर या कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ खाने और दांतों की ठीक तरीके से सफाई न करने के कारण ये समस्याएं होती है। इसके अलावा मसूड़ों में सूजन,मुंह से बदबू आना, दांतों में गरम या ठंडे का एहसास होते रहना भी ओरल हेल्थ की समस्या का संकेत हो सकता है। 
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मौखिक स्वास्थ्य - फोटो : Freepik.com
डब्ल्यूएचओ का अलर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कहता है मौखिक रोग कई देशों के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य बोझ बन गए हैं और लोगों को जीवन भर प्रभावित करते हैं। अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर मौखिक रोग लगभग 3.5 बिलियन (350 करोड़) लोगों को प्रभावित करते हैं। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2019 के अनुसार दांतों की सड़न सबसे आम स्वास्थ्य समस्या है। इसपर समय रहते ध्यान देकर खतरे को कम किया जा सकता है। 
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हृदय पर भी हो सकता है असर - फोटो : Freepik.com
मौखिक समस्याओं के दुष्प्रभाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि लगभग 50% भारतीय वयस्क पेरिओडोंटल बीमारी से पीड़ित हैं, वहीं बच्चों में दांतों की सड़न व्यापक रूप से देखी जाती है। पेरिओडोंटल रोग, जिसे मसूड़ों की बीमारी के रूप में भी जाना जाता है, ये आमतौर पर बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होता है जो मसूड़ों और दांतों को सहारा देने वाली हड्डी को नुकसान पहुंचाता है। ओरल हाइजीन पर ध्यान न देना इसका प्रमुख कारण माना जाता है।

अध्ययनों से पता चला है कि मौखिक स्वास्थ्य पर ध्यान न देने वाले लोगों में हृदय रोग और स्ट्रोक की दर अधिक होती है। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि पेरिओडोंटाइटिस और मसूड़े में सूजन पैदा करने वाले बैक्टीरिया रक्तप्रवाह के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों में भी पहुंच सकते हैं। इससे हृदय और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में सूजन और क्षति का खतरा बढ़ जाता है। 
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मुंह की करें सफाई - फोटो : Freepik.com
दांतों की साफ-सफाई का रखें ध्यान

ओरल हेल्थ ठीक रखने, विशेषतौर पर दांतों में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए दिन में कम से कम दो बार अच्छे से ब्रश करना जरूरी है।
  • ब्रश करने के लिए आप किसी अच्छे टूथपेस्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • हर्बल टूथपेस्ट में मौजूद तत्व दांतों को मजबूत और चमकदार बनाने के साथ सांसों की बदबू को कम करने में मददगार हो सकते हैं। 
  • ओरल हेल्थ को ठीक रखने के लिए जरूरी है कि कुछ भी खाने के बाद कुल्ला जरूर करें। इससे दांतों में भोजन के फंसे अवशेष निकल जाते हैं जिन्हें सड़न बढ़ाने का प्रमुख कारण माना जाता है।
इसके अलावा पूरे दिन खूब पानी पिएं। पानी पीने से दांतों से खाद्य पदार्थों के अवशेष नहीं चिपकते। लार के उत्पादन को भी बढ़ावा देने का ये कारगर तरीका है जो एसिड को बेअसर करने के लिए आवश्यक है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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