टॉयलेट
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ये आंकड़े तब और हैरान करते हैं, जब आपको ये पता चलता है कि मानवता के इतिहास में हाथ धोने की आदत का आविष्कार, इंसानों की जान बचाने का सबसे कारगर नुस्खा साबित हुआ है। आज दुनिया के कई देशों, जैसे कि ब्रिटेन में इंसानों की औसत उम्र अगर 80 बरस है। जबकि 1850 में ब्रिटेन के लोगों की औसत उम्र चालीस वर्ष हुआ करती थी। ये वही दौर था, जब हाथ धोने के फायदों का सबसे पहले प्रचार शुरू हुआ था। 2006 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, अगर आप नियमित रूप से अपने हाथों को अच्छे से साफ करते हैं, तो इससे आपको सांस की बीमारियां होने की आशंका 44 प्रतिशत से घट कर केवल 6 फीसद रह जाती है।
कोविड-19 की महामारी के प्रकोप के बाद वैज्ञानिकों ने पाया है कि जिन देशों में हाथों को नियमित रूप से धोने की संस्कृति है, वहां पर इसका संक्रमण कम हुआ है। आखिर क्या कारण है कि हम में से कई लोग ऐसे हैं, जो हाथ साफ करने को लेकर इतने सजग रहते हैं कि इसके लिए ऊंची कीमत पर भी सैनिटाइजर खरीदने का हौसला रखते हैं। वहीं, बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें साबुन से हाथ धोने तक में परेशानी है। अब अगर नए वायरसों के प्रकोप और टीवी के रिमोट पर मल लगे होने जैसे उदाहरण भी उन्हें हाथ धोने के लिए प्रेरित नहीं कर पा रहे, तो फिर उन्हें किस तरह अपनी इस बुरी आदत से छुटकारा पाने के लिए राजी किया जा सकता है?