फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Good Bacteria: शरीर में कम तो नहीं हो गए हैं गुड बैक्टीरिया, कैसे लगाएं इसका पता? यहां जानिए

Tue, 30 Dec 2025 06:38 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • गुड बैक्टीरिया को वैज्ञानिक भाषा में प्रोबायोटिक्स कहा जाता है। ये हमारी आंतों में पाए जाने वाले लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने से लेकर इम्युनिटी मजबूत करने तक कई महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
  • कैसे पता किया जाए कि हमारे शरीर में गुड बैक्टीरिया की पर्याप्त मात्रा है या नहीं?
विज्ञापन
1 of 5
पाचन की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पाचन ठीक रहना जरूरी है और पाचन ठीक रखने के लिए गुड बैक्टीरिया को जरूरी माना जाता है। गुड बैक्टीरिया को वैज्ञानिक भाषा में प्रोबायोटिक्स कहा जाता है। ये हमारी आंतों में पाए जाने वाले लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने से लेकर इम्युनिटी मजबूत करने तक कई महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

अध्ययनों से पता चलता है कि एक स्वस्थ इंसान की आंतों में अरबों गुड बैक्टीरिया मौजूद होते हैं। भोजन को पचाने, पोषक तत्वों को अवशोषित करने और हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकने में भी इनकी भूमिका होती है। 

अब तो आप जान ही गए होंगे कि आंतों के गुड बैक्टीरिया हमारे लिए क्यों इतने जरूरी हैं?
विज्ञापन

2 of 5
गुड बैक्टीरिया का असंतुलन - फोटो : Freepik.com
गुड बैक्टीरिया शरीर के लिए बहुत जरूरी

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जिन लोगों में गुड बैक्टीरिया का संतुलन सही नहीं रहता है, उनमें पेट से संबंधित समस्याओं के साथ कई अन्य तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।

गुड बैक्टीरिया आंतों की परत को मजबूत बनाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा घटता है। अध्ययनों में ये भी पाया गया है कि मानसिक स्वास्थ्य और मूड को ठीक रखने में इन बैक्टीरिया की भूमिका होती है। 

अब सवाल ये है कि आखिर पता कैसे किया जाए कि हमारे शरीर में गुड बैक्टीरिया की पर्याप्त मात्रा है या नहीं?
विज्ञापन

3 of 5
पाचन-कब्ज की समस्या - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, जिन लोगों में गुड बैक्टीरिया का संतुलन सही नहीं रहता है उन्हें कई तरह की दिक्कतें होती रह सकती हैं। इन्हीं लक्षणों की मदद से जाना जा सकता है कि बैक्टीरिया  का संतुलन कैसा है।

अगर आंतों में में गुड बैक्टीरिया कम हो जाएं तो कब्ज, गैस, एसिडिटी, डायरिया जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बार-बार एंटीबायोटिक लेने, जंक फूड खाने और तनाव में रहने से इनका संतुलन बिगड़ सकता है।
 
  • पाचन की दिक्कतें
यदि गुड बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ता है, तो पाचन संबंधित समस्याएं जैसे गैस, सूजन या अपच  बढ़ सकती हैं। आप अक्सर पेट में भारीपन या असहजता महसूस कर सकते हैं। गुड बैक्टीरिया पाचन में सहायक होते हैं।अगर इनकी संख्या कम होती है, तो पाचन सही तरीके से नहीं हो पाता।

4 of 5
थकान-कमजोरी के कारण - फोटो : Freepik.com
 
  • अक्सर बनी रहती है थकान

    आंत के बैक्टीरिया का एक महत्वपूर्ण काम शरीर के लिए पोषक तत्वों का अवशोषण करना भी होता है। जब बैक्टीरिया का संतुलन खराब होता है, तो पोषक तत्वों के अवशोषण में कमी हो सकती है, जिससे शरीर में ऊर्जा की कमी और लगातार थकावट महसूस होती है।

     
  • कमजोर हो जाती है इम्युनिटी

    गुड बैक्टीरिया शरीर की इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करते हैं। यदि इन बैक्टीरिया की संख्या कम हो जाती है, तो शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता कमजोर हो सकती है। इससे बार-बार सर्दी, बुखार या संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मूड स्विंग की समस्या - फोटो : Adobe Stock
 
  • मूड स्विंग का खतरा

    गट और ब्रेन के बीच भी एक कनेक्शन होता है जिसे 'गट-ब्रेन कनेक्शन' कहते हैं। गुड बैक्टीरिया का असंतुलन मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकता है, जिससे अवसाद, चिंता और मूड स्विंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

     
  • वजन घटने या बढ़ने की दिक्कत

    गुड बैक्टीरिया शरीर के वजन को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं। अगर  बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है, तो इससे वजन बढ़ने या घटने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों का अवशोषण भी प्रभावित हो सकता है, जिससे वजन में बदलाव आ सकता है।



-------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें