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Dehydration Risk: जुलाई-अगस्त में डिहाइड्रेशन पड़ सकता है भारी, मानसून के दिनों में क्यों बढ़ जाता है खतरा?

Fri, 26 Jun 2026 07:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डिहाइड्रेशन केवल प्यास लगने तक सीमित नहीं है। यह सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, लो ब्लड प्रेशर और गंभीर मामलों में किडनी पर भी असर डाल सकता है। जुलाई-अगस्त यानी मानसून के महीनों में इसका खतरा अधिक रहता है।
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डिहाइड्रेशन की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
जुलाई का महीना भीषण गर्मी और लू से राहत लेकर आता है। देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश की शुरुआत के कारण मौसम ठंडा हो जाता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भले ही आपको इन दिनों में तेज धूप से राहत मिल जाती है वातावरण में बढ़ी हुई नमी यानी ह्यूमिडिटी आपके कहीं ज्यादा बड़ी समस्याएं लेकर आती है।

डॉक्टर कहते हैं, तेज धूप वाली गर्मी की तुलना में उमस भरी गर्मी ज्यादा खतरनाक होती है, क्योंकि हवा में मौजूद नमी पसीना आनेमें रुकावट डालती है। धूप वाली गर्मी में पसीना जल्दी सूख जाता है और त्वचा से गर्मी को दूर ले जाता है। वहीं उमस भरी गर्मी में हवा पहले से ही नमी से भरी होती है, जिससे पसीना सूख नहीं पाता। ऐसे में शरीर में धीरे-धीरे पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होती रहती और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर को स्वस्थ रखने और बीमारियों से बचे रहने के लिए इस मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी हो जाता है।
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डिहाइड्रेशन का खतरा - फोटो : Freepik.com
सिर्फ पानी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी जरूरी

डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी सिरदर्द, चक्कर आने, कमजोरी, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, लो ब्लड प्रेशर और गंभीर मामलों में किडनी पर भी असर डाल सकती है। 

जुलाई-अगस्त यानी मानसून कि दिनों में वायरल संक्रमण, डायरिया और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इन बीमारियों के दौरान भी शरीर में तेजी से पानी की कमी होने लगती है, जिससे डिहाइड्रेशन का जोखिम हो सकता है। इसलिए इन दिनों में केवल पानी पीना ही काफी नहीं है, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
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मानसून के दिनों में डिहाइड्रेशन - फोटो : Freepik.com
मानसून के दिनों में डिहाइड्रेशन का खतरा

आमतौर पर जब बात डिहाइड्रेशन की हो तो लोग इसे केवल गर्मियों की समस्या मानते हैं, जबकि मानसून में भी यह उतना ही आम है। 
 
  • बारिश के मौसम में हवा में नमी बढ़ने से पसीना आसानी से सूख नहीं पाता।
  • शरीर तापमान नियंत्रित करने के लिए लगातार पसीना बनाता रहता है, लेकिन व्यक्ति को उसका एहसास कम होता है। इसी वजह से लोग पानी कम पीते हैं और धीरे-धीरे शरीर में पानी की कमी होने लगती है। 
  • इसके अलावा उमस, संक्रमण, डायरिया और उल्टी जैसी समस्याएं भी इस मौसम में अधिक होती हैं, जो शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

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डिहाइड्रेशन का शिकार तो नहीं हैं आप? - फोटो : Freepik.com
कैसे जानें कहीं आप भी तो नहीं हो गए डिहाड्रेशन का शिकार?

डिहाइड्रेशन की समय रहते पहचान जरूरी है।
  • अगर बार-बार मुंह सूख रहा है, गहरे रंग का पेशाब हो रहा है या फिर पेशाब कम हो रहा है तो ये शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है।
  • सिरदर्द, थकान, चक्कर आना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना भी इसका संकेत हो सकता है। 
  • यदि शरीर में पानी की कमी बढ़ती जाए तो दिल की धड़कन तेज हो सकती है, लो ब्लड प्रेशर और बेहोशी तक की स्थिति बन सकती है। 
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शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स क्यों जरूरी? - फोटो : Freepik.com
कैसे दूर करें ये समस्या?

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ पानी ही नहीं बल्कि सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और क्लोराइड जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी जरूरी होते हैं। अधिक पसीना आने, उल्टी या दस्त होने पर ये मिनरल्स भी शरीर से निकल जाते हैं। ऐसे में केवल पानी पीना पर्याप्त नहीं होता। नारियल पानी, ओआरएस, छाछ, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करने में मदद करता है। इससे शरीर की ऊर्जा बनी रहती है और मांसपेशियां तथा नसें बेहतर तरीके से काम करती हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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