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जानिए कोरोनावायरस को हराने के लिए वैक्सीन ही एकमात्र विकल्प क्यों? क्या होती है हर्ड इम्यूनिटी?

Sat, 12 Dec 2020 03:10 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पूरी दुनिया को सिर्फ एक ही विकल्प नजर आया है वो है ‘वैक्सीन’ - फोटो : पेक्सेल्स

पिछले एक वर्ष में कोरोना ने पूरे विश्व में तबाही मचाकर रख दी है। कोरोना को मात देने के लिए तरह-तरह के विकल्पों के बारे में विचार- विमर्श किया गया लेकिन आखिर में आ कर पूरी दुनिया को सिर्फ एक ही विकल्प नजर आया है वो है ‘वैक्सीन’। लेकिन सभी के दिमाग में बिजली की तरह एक ही प्रश्न कौंध रहा है कि ऐसी भी कैसी बीमारी है जिससे बचने के लिए वैक्सीन के अलावा कोई प्रभावशाली विकल्प नहीं है? शरीर को ऐसे किस तरह से ये वायरस प्रभावित कर रहा है और यह हर्ड इम्यूनिटी क्या बला है? इन सभी प्रश्नों का जवाब जानने के लिए देखिए अगली स्लाइड्स।

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हर्ड इम्यूनिटी नामक यह शब्द पिछले कुछ दिनों से बहुत प्रचलन में है - फोटो : immunity

क्या होती है हर्ड इम्यूनिटी?
हर्ड इम्यूनिटी नामक यह शब्द पिछले कुछ दिनों से बहुत प्रचलन में है। अमूमन यह चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों से ही सुनने में आ रहा है तो आइए जानते हैं कि क्या होती है हर्ड इम्यूनिटी? हर्ड इम्यूनिटी बॉडी की वो स्टेज है, जिसमें अधिकतर लोगों का शरीर ऐसी रोग- प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर लेता है जिसमें वायरस से लड़ने की ताकत होती है। ऐसे में वैक्सीन उन लोगों के शरीर में हर्ड इम्यूनिटी विकसित करेगी जिनके शरीर वायरस से लड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।

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इम्यून सेल वायरस को घेर लेती है - फोटो : immunity

कोरोनावायरस के हमले के बाद यह होता है शरीर के भीतर
जैसे ही शरीर में कोई बाहरी वायरस आता है तो शरीर को खुद से पता लगा जाता है। हमारी इम्यून सेल वायरस को घेर लेती है और फिर एंटीजन का निर्माण होता है। यही एंटीजन इम्यून सिस्टम को संकेत देता है। इम्यून सिस्टम में वायरस से लड़ने के लिए टी और बी सेल सक्रिय होते हैं। यह वायरस से लड़ने के लिए अपनी संख्या बढ़ाते हैं। हमले और इम्यून सिस्टम के सक्रिय होने की जो अवधि है, उस दौरान व्यक्ति को बुखार, गले में खराश, सांस संबंधी समस्या होती है।

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वैक्सीन के बिना हर्ड इम्यूनिटी संभव ही नहीं - फोटो : PTI

बिना वैक्सीन बचना संभव नहीं
कई सारे देशों ने सोचा कि वैक्सीन के बिना भी महामारी से लड़ा जा सकता है। यदि ज्यादातर लोगों को कोरोना हो गया तो उनका शरीर वैसे ही एंटीबॉडी विकसित कर लेगा और हर्ड इम्यूनिटी आ जाएगी। मेडिकल जर्नल द लैंसेंट में छपे एक अध्ययन के अनुसार अगर लोगों को एंटीबॉडी के भरोसे अगर छोड़ दिया जाए तो करोड़ों लोग मर जाएंगे। वैक्सीन के बिना हर्ड इम्यूनिटी संभव ही नहीं।

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पूरे विश्व में 6 तरीकों से वैक्सीन बनाई जा रही है - फोटो : social media

कैसे बनती है वैक्सीन
दुनियाभर में अलग-अलग फॉर्मूले से वैक्सीन का निर्माण हो रहा है। लेकिन सभी वैक्सीनों का उद्देश्य एक ही है कि शरीर को वायरस के हमले से पहले ही इस तरह तैयार कर देना कि उसपर कोई असर न हो। इस समय पूरे विश्व में 6 तरीकों से वैक्सीन बनाई जा रही है। जिसमें जीवित वायरस, संक्रमित वायरस, प्रोटीन सबयूनिट, खोखला वायरस, डीएनए- आरएनए और वायरल वेक्टर प्रक्रिया शामिल हैं। 

 

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फेज-3 के नतीजों के आधार पर वैक्सीन को अनुमति मिलती है - फोटो : PTI
कैसे मिलती है वैक्सीन के लिए अनुमति
किसी वैक्सीन को यदि अनुमति चाहिए तो उसे कई चरणों से गुजरना होता है। प्री क्लिनिकल टेस्टिंग में वैक्सीन का प्रयोग जानवरों पर किया जाता है। फेज-1 सेफ्टी ट्रायल में वॉलेंटियर्स को वैक्सीन लगाकर निगरानी रखी जाती है। फेज-2  में अलग-अलग उम्र के ग्रुप्स पर होता है ट्रायल। फेज-3 में हजारों लोगों को वैक्सीन लगाकर परिणाम देखे जाते हैं। फेज-3 के नतीजों के आधार पर वैक्सीन को अनुमति मिलती है।
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