फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

WHO: चीन के बाद भारत में रिपोर्ट किए गए हेपेटाइटिस बी-सी के सबसे ज्यादा मामले, रोजाना 3500 लोगों की हो रही मौत

Sat, 13 Apr 2024 09:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण - फोटो : istock
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में भारत में बढ़ते संक्रामक रोगों को लेकर चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 में भारत में हेपेटाइटिस बी और सी के मामलों में काफी तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है, इस साल 3.5 करोड़ से अधिक संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं। चीन के बाद भारत हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण के सबसे अधिक मामले वाला दूसरा देश बन गया है। ये स्वास्थ्य के लिए गंभीर सूचक है।

डब्ल्यूएचओ की 2024 ग्लोबल हेपेटाइटिस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में वैश्विक स्तर पर 254 मिलियन (25.4 करोड़) लोग हेपेटाइटिस बी और 50 मिलियन (पांच करोड़) लोग हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित थे। इतना ही नहीं वायरल हेपेटाइटिस के कारण मरने वालों की संख्या बढ़ रही है।

विश्व स्तर पर इस संक्रामक रोगों के कारण प्रतिवर्ष 1.3 मिलियन (13 लाख) से अधिक मौतें होती हैं। दुनियाभर में होने वाले इस संक्रमण में से 11.6 प्रतिशत मामले अकेले भारत से ही रिपोर्ट किए जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, सभी लोगों को इन संक्रामक रोगों के बारे में जागरूक रहना और बचाव के उपाय करते रहना जरूरी है।
विज्ञापन

2 of 5
हेपेटाइटिस का बढ़ता संक्रमण - फोटो : istock
हर दिन 3500 से अधिक लोगों की हो रही मौत

विश्व हेपेटाइटिस शिखर सम्मेलन में जारी रिपोर्ट में कहा गया है, हर दिन हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण के कारण वैश्विक स्तर पर 3,500 लोग मर रहे हैं। पांच प्रकार के वायरस, वायरल हेपेटाइटिस के विभिन्न रूपों का कारण बनते हैं जिनमें हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई प्रमुख हैं।

हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण मुख्यरूप से लिवर को प्रभावित करते हैं, इससे न सिर्फ लिवर में सूजन हो सकती है साथ ही गंभीर स्थितियों में लिवर डैमेज होने का भी जोखिम रहता है।
विज्ञापन

3 of 5
लिवर में होने वाली दिक्कतें - फोटो : istock
कैसे फैलता है हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण?

हेपेटाइटिस-बी लिवर का संक्रमण है जो हेपेटाइटिस-बी नामक वायरस के कारण होता है। अधिकांश लोगों में ये संक्रमण कुछ समय में ठीक हो जाता है हालांकि कुछ स्थितियों में ये छह महीनेतक भी रह सकता है। वहीं हेपेटाइटिस-सी वायरस के कारण होने वाले लिवर की सूजन के कारण गंभीर रोग के मामले लिवर सिरोसिस और कैंसर तक का जोखिम हो सकता है।

हेपेटाइटिस-बी का संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य या शरीर का अन्य तरल पदार्थ के स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश से फैलता है। वहीं हेपेटाइटिस सी, संक्रमित व्यक्ति के रक्त के संपर्क में आने से होता है। अधिकांश लोग दवाएं तैयार करने और इंजेक्शन के लिए उपयोग की जाने वाली सुइयों को साझा करने से हेपेटाइटिस सी वायरस से संक्रमित हो जाते हैं।

4 of 5
हेपेटाइटिस में होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
क्या हैं इस संक्रमण के लक्षण?

हेपेटाइटिस-बी संक्रमण की स्थिति में लक्षण नजर आना जरूरी नहीं है। इसमें कुछ लोगों को बुखार, भूख में कमी, पेट में दर्द-उल्टी होने, कमजोरी और थकान की समस्या के साथ लिवर से संबंधित कुछ दिक्कतें हो सकती हैं। गंभीर स्थितियों में पीलिया, गहरे रंग का पेशाब होने, पेट या हाथ और पैरों में तरल पदार्थ के साथ सूजन की समस्या हो सकती है। 

इसी तरह से हेपेटाइटिस-सी के संक्रमण की स्थिति में पेट के ऊपरी हिस्से में दाहिनी तरफ दर्द,  पेट में सूजन होने के साथ बुखार, खुजली, पीलिया जैसी दिक्कतें देखी जाती हैं। लक्षणों का समय रहते पहचान करना आवश्यक हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
हेपेटाइटिस का संक्रमण और उपचार - फोटो : istock
कैसे करें इन संक्रामक रोगों से बचाव?

हेपेटाइटिस-बी से बचाव का सबसे अच्छा तरीका टीकाकरण है। हालांकि हेपेटाइटिस सी से बचाव के लिए कोई टीका नहीं है। इसके संक्रमण को रोकने के उन उपायों का पालन करने की सलाह दी जाती है जिससे संक्रमण के प्रसार को कम किया जा सके। हेपेटाइटिस सी के लिए परीक्षण करवाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि उपचार से हेपेटाइटिस सी से पीड़ित अधिकांश लोगों को 8 से 12 सप्ताह में ठीक किया जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा जिस प्रकार से इन दोनों संक्रामक रोगों के मामले बढ़ रहे हैं, सभी लोगों को सुरक्षात्मक उपाय करते रहना चाहिए।



--------------
स्रोत और संदर्भ
WHO sounds alarm on viral hepatitis infections claiming 3500 lives each day

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें