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मोटापा कम होने के बाद शरीर का 'फैट' आखिर कहां चला जाता है?

Fri, 10 Apr 2020 12:34 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मोटापा आजकल के समय में बहुत बड़ी समस्या है। हर 10 में से चार व्यक्ति अपने बढ़ते वजन को लेकर परेशान हैं। पेट, कमर, जांघ, हाथ, पैर समेत शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैट जमा हो जाते हैं, जिसे कम करने के लिए हम टहलने,दौड़ने से लेकर तरह-तरह के योग, व्यायाम, डाइटिंग, खानपान में बदलाव जैसे उपाय करते हैं। नियमित उपाय करने से लोग फिट भी हो जाते हैं। हस्तियों की बात करें तो पाकिस्तानी मूल के गायक अदनान समी बहुत बड़ा उदाहरण हैं। वहीं, परिणीति चोपड़ा, सोनाक्षी सिन्हा, अर्जुन कपूर और सारा अली खान भी पहले बहुत मोटे थे, लेकिन अब बिल्कुल फिट हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि मोटापा या वजन कम होने के बाद हमारे शरीर का फैट आखिर कहां गायब हो जाता है! आइए, जानते हैं कि मोटापा कम होने की पूरी प्रक्रिया के बारे में:  
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weight loss - फोटो : pixa
हमारे शरीर में जमा होने वाले फैट और कार्बोहाइड्रेट से प्राप्त कैलोरी वसा कोशिकाओं के अंदर के रूप में जमा होती है और हमारा शरीर आगे के लिए ऊर्जा बचाकर रखता है। समय के साथ जब ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है, तब फैट हमारे शरीर में फैट बनने लगता है। इसी फैट के कारण शरीर बेडौल होने लगता है और हमारी सेहत को भी बहुत नुकसान पहुंचना है।
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weight loss
वजन कम करने के लिए आप जितनी कैलोरी बर्न करते हैं, उससे कम मात्रा में कैलोरी का सेवन करना जरूरी होता है। शरीर के अनुसार, हर व्यक्ति में कैलोरी की जरूरत होती है। जब आप कम कैलोरी का सेवन करते हैं तो वसा कोशिकाएं पहले से जमा फैट को रिलीज कर ऊर्जा बनाने वाली कोशिकाओं माइटोकॉन्ड्रिया तक पहुंचाती हैं। यहां पर ऊर्जा बनाने के लिए फैट टूट जाता है। यह प्रक्रिया चलते रहने से फैट एनर्जी के रूप में इस्तेमाल होता रहता है और हमारा बॉडी फैट कम होने लगता है।

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फैट कम होने की प्रक्रिया में वसा कोशिकाएं आकार में सिकुड़ने लगती है और हमारी शारीरिक संरचना में सकारात्मक बदलाव दिखता है। ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया में कोशिकाओं के अंदर फैट टूटता रहता है, जिससे दो बाईप्रोडक्ट यानी उपोत्पाद उत्सर्जित होते हैं- कार्बन डाइऑक्साइड और पानी। सांस छोड़ने के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड शरीर से बाहर निकल जाती है और पसीने और यूरीन के जरिए पानी बाहर निकल जाता है।
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weight loss - फोटो : pixa
मोटापा के कारण शरीर की संरचना बदलती है तो सबसे ज्यादा फैट पेट, कूल्हों और जांघों पर बढ़ता है। लोग सबसे पहले इन्हीं हिस्सों का फैट कम करना चाहते हैं। हालांकि यह अनुवांशिक कारकों पर निर्भर करता है कि शरीर के किस हिस्से से कितना फैट कम होगा। जब कोई कैलोरी या फैट बर्न करने से ज्यादा वसा का सेवन करते हैं तो वसा कोशिकाओं की संख्या और आकार दोनों बढ़ने लगते हैं। फैट कम होने की स्थिति में यही कोशिकाएं आकार में तो सिकुड़ती हैं, लेकिन संख्या वही रहती है।
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मोटापा कम होने पर शरीर के आकार में बदलाव आता है, वह कोशिकाओं के सिकुड़ने की वजह से आता है, न कि कोशिकाओं की संख्या में कमी होने से। वजन कम होने की प्रक्रिया ऐसे ही चलती रहती है। कुल मिलाकर वजन कम करने या मोटापा घटाने वाले लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि कैलोरी ओर वसा कोशिकाओं को बर्न करना बहुत जरूरी है।
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