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IVF Treatment: क्या आईवीएफ से पैदा होने वाले बच्चे कमजोर होते हैं? यहां जानिए सभी जरूरी सवालों के जवाब

Sat, 25 Jul 2026 08:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। आईवीएफ को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं।
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आईवीएफ के बारे में जानिए - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आप भी कुछ वर्षों से माता-पिता बनने की कोशिश कर रहे हैं, पर सफल नहीं हो रहे? थक हारकर अब आईवीएफ का सहारा लेने की प्लानिंग कर रहे हैं? अगर हां तो पहले आईवीएफ के बारे में जानकारी जरूर ले लीजिए।

दुनियाभर में इनफर्टिलिटी की बढ़ती समस्याओं के बीच आईवीएफ की मांग तेजी से बढ़ी है, हालांकि इसको लेकर अक्सर लोगों के मन में कई तरह के सवाल भी रहते हैं जो उन्हें कंफ्यूज करते रहते हैं।

कई अध्ययन इस बात को लेकर लगातार चेताते रहे हैं कि पर्यावरणीय समस्याओं के साथ लोगों की खराब जीवनशैली और खान-पान में गड़बड़ी ने अब प्रजनन समस्याओं को काफी बढ़ा दिया है। लिहाजा अब बड़ी संख्या में दंपतियों के सामने आईवीएफ ही आसान विकल्प रह गया है। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) उन लाखों दंपतियों के जीवन में उम्मीद जगाई है, जिनके लिए प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण संभव नहीं हो पा रहा था।
 
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इनफर्टिलिटी की समस्या - फोटो : Freepik.com
इनफर्टिलिटी की बढ़ती समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, देर से शादी करना, करियर को प्राथमिकता, पीसीओएस और एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियों ने महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। इसी तरह पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता में गिरावट, मोटापा, तनाव के साथ धूम्रपान-शराब जैसी आदतों ने प्राकृतिक गर्भधारण को कठिन बना दिया है। ऐसे लोगों के लिए आईवीएफ वरदान साबित हो रहा है। 

विशेषज्ञ कहते हैं, आईवीएफ जितनी तेजी से लोकप्रिय हुई है, उतनी ही तेजी से इसके बारे में कई तरह के मिथक भी फैल गए हैं। आइए इससे जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब जान लेते हैं।
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आईवीएफ से गर्भधारण - फोटो : Adobe Stock
मिथ: आईवीएफ कराया तो बच्चा होना पक्का

बहुत से लोग सोचते हैं कि आईवीएफ एक बार कराने से निश्चित रूप से गर्भधारण हो जाएगा जबकि डॉक्टर कहते हैं, ऐसा हर बार संभव नहीं है।
 
  • आईवीएफ की सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है। महिला की उम्र सबसे महत्वपूर्ण है। कम उम्र की महिलाओं में सफलता दर अधिक होती है, जबकि उम्र बढ़ने पर सफलता की संभावना घट सकती है।
  • भ्रूण की गुणवत्ता, अंडाणु और शुक्राणु की स्थिति, गर्भाशय की सेहत और अन्य चिकित्सीय समस्याएं भी परिणाम को प्रभावित करती हैं। 
  • कई बार पहली कोशिश असफल होने के बाद दूसरी या तीसरी कोशिश में सफलता मिलती है।

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बच्चों की सेहत - फोटो : Freepik.com
मिथ: आईवीएफ से पैदा होने वाले बच्चे कमजोर होते हैं

कई लोग मानते हैं कि आईवीएफ से जन्मे बच्चों का शारीरिक या मानसिक विकास सामान्य बच्चों जैसा नहीं होता। जबकि वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि अधिकांश आईवीएफ बच्चे पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य जीवन जीते हैं।
 
  • आईवीएफ में केवल निषेचन की प्रक्रिया प्रयोगशाला में होती है। इसके बाद भ्रूण उसी तरह गर्भाशय में विकसित होता है, जैसे प्राकृतिक गर्भधारण में होता है। 
  • गर्भावस्था की पूरी प्रक्रिया लगभग समान रहती है।
  • बच्चे का स्वास्थ्य माता-पिता की आनुवंशिक स्थिति, गर्भावस्था के दौरान मां के पोषण, संक्रमण, जीवनशैली और प्रसव से अधिक प्रभावित होता है।
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आईवीएफ से सामान्य बच्चों का जन्म - फोटो : Freepik.com
मिथ: आईवीएफ से हमेशा जुड़वां बच्चों का जन्म होता है

आमतौर पर लोगों के मन में सवाल रहता है कि  क्या आईवीएफ से हमेशा जुड़वां बच्चों का जन्म होता है?
 
  • डॉक्टर कहते हैं, पहले आईवीएफ की सफलता बढ़ाने के लिए एक से अधिक भ्रूण स्थानांतरित किए जाते थे, जिससे जुड़वां या तीन बच्चों की संभावना बढ़ जाती थी।
  • लेकिन आधुनिक आईवीएफ तकनीकों में डॉक्टर अक्सर एक ही स्वस्थ भ्रूण स्थानांतरित करने की रणनीति अपनाते हैं।
  • जुड़वां गर्भावस्था में समय से पहले प्रसव, उच्च रक्तचाप और अन्य जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ अब सुरक्षित गर्भावस्था को प्राथमिकता देते हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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