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Diabetes: क्या एक बार इंसुलिन शुरू हो जाए तो कभी बंद नहीं होता? जानिए किन मरीजों को लगते हैं इंसुलिन इंजेक्शन

Tue, 09 Jun 2026 04:37 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टाइप-1 डायबिटीज में इंसुलिन जीवनभर जरूरी होता है क्योंकि शरीर इसे बनाना बंद कर देता है। लेकिन टाइप-2 डायबिटीज में स्थिति अलग होती है। क्या एक बार इंसुलिन शूरू होने के बाद कभी बंद नहीं होता है?
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डायबिटीज में इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत - फोटो : Amarujala.com/AI
डायबिटीज वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है। आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में 589 मिलियन (58.9 करोड़) से ज्यादा लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं। ये दुनियाभर में  हर 9 में से 1 व्यक्ति को प्रभावित करने वाली स्थिति है। डायबिटीज को सिर्फ खून में शुगर की मात्रा बढ़ने की समस्या मानना ठीक नहीं है, ये एक मेटाबॉलिक बीमारी है जिसका असर संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है।

पहले जहां ये बीमारी आमतौर पर उम्रदराज लोगों में देखी जाती थी, वहीं अब कम उम्र के लोग यहां तक कि बच्चों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे है। खराब लाइफस्टाइल, खान-पान में गड़बड़ी, शरीरिक गतिविधियों में और स्ट्रेस ने इसके खतरे को और भी बढ़ा दिया है। 

आहार और लाइफस्टाइल में सुधार के साथ नियमित दवाओं के सेवन से इस रोग के खतरे को कम किया जा सकता है। डायबिटीज के कई मरीजों को आपने भी इंसुलिन के इंजेक्शन लेते देखे होंगे। आइए जानते हैं कि मरीजों तो इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत कब पड़ती है?
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डायबिटीज में इंसुलिन इंजेक्शन - फोटो : Adobe Stock
पहले जान लीजिए कि इंसुलिन इंजेक्शन का काम क्या है?

ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए हमारा शरीर एक महत्वपूर्ण हार्मोन बनाता है जिसे इंसुलिन कहा जाता है। 
 
  • जब किसी कारण से शरीर इसे बनाना बंद कर देता है या पर्याप्त मात्रा में नहीं बना पाता, तब शुगर लेवल बढ़ने लगता है। 
  • यही वजह है कि कई मरीजों को इंसुलिन इंजेक्शन लेना पड़ता है। 

आमतौर पर टाइप-1 डायबिटीज के शिकार लोगों या फिर जिन लोगों का टाइप-2 डायबिटीज दवाइयों, डाइट और एक्सरसाइज से कंट्रोल नहीं हो पाता उन्हें इंसुलिन इंजेक्शन लेने की सलाह दी जाती है।
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डायबिटीज में इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत - फोटो : Freepik.com
टाइप-2 डायबिटीज में कब लेते हैं इंसुलिन इंजेक्शन?

इंसुलिन इंजेक्शन शरीर में इंसुलिन की कमी को पूरा करके काम करता है। यह शरीर में कोशिकाओं को एक्टिवेट करता है ताकि रक्त में मौजूद शुगर ग्लूकोज अंदर जा सके और शरीर को ऊर्जा मिल सके।
 
  • इंसुलिन इंजेक्शन को शुगर कंट्रोल करने का सबसे असरदार तरीका माना जाता है, पर हर डायबिटीज मरीज को इंसुलिन की जरूरत हो, यह जरूरी नहीं है।
  • टाइप-2 डायबिटीज की स्थिति में शरीर इंसुलिन बनाता तो है लेकिन उसका सही उपयोग नहीं कर पाता।
  • शुरुआती स्थिति में मरीजों को दवाइयों, डाइट कंट्रोल और एक्सरसाइज से शुगर नियंत्रित करने की सलाह दी जाती है।
  • जब अग्नाशय धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है और शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता, तब डॉक्टर इंसुलिन शुरू कर सकते हैं।

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टाइप-1 डायबिटीज का खतरा - फोटो : Adobe Stock
टाइप-1 डायबिटीज में इंसुलिन इंजेक्शन

डॉक्टर बताते हैं, टाइप-2 डायबिटीज से विपरीत टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों को जीवनभर इंसुलिन इंजेक्शन लेना पड़ सकता है।
 
  • टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से पैंक्रियास की इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को अटैक कर देती है। 
  • इस स्थिति में शरीर लगभग बिल्कुल इंसुलिन नहीं बना पाता, इसलिए बाहरी इंसुलिन लेना जीवन के लिए आवश्यक हो जाता है।
  • इस बीमारी में बिना इंसुलिन के ग्लूकोज कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता, जिससे ब्लड शुगर खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है। इससे शरीर के कई अंगों के डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है।
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डायबिटीज की समस्या - फोटो : Freepik.com
क्या इंसुलिन शुरू होने के बाद इसे हमेशा लेना पड़ता है?

अक्सर लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि क्या एक बार इंसुलिन इंजेक्शन शुरू होने के बाद फिर जीवनभर इससे छुटकारा नहीं पाया जा सकता?
 
  • डॉक्टर कहते हैं, टाइप-1 डायबिटीज में तो इंसुलिन इंजेक्शन जीवनभर के लिए जरूरी होता है क्योंकि शरीर इसे बनाना बंद कर देता है। 
  • हालांकि टाइप-2 डायबिटीज में स्थिति अगर मरीज अपनी लाइफस्टाइल सुधार ले, वजन कंट्रोल रखे तो शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर हो जाती है। शुगर अगर कंट्रोल रहने लगे तो डॉक्टर इंसुलिन कम या बंद कर देते हैं। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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