फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल की बीमारी: सिर्फ ईसीजी टेस्ट से नहीं पता चलता दिल का हाल, जानिए कब कौन सी जांच कराएं

Sat, 26 Sep 2026 06:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ईसीजी दिल की विद्युत गतिविधि की महत्वपूर्ण जानकारी देता है, लेकिन हर बार हार्ट की समस्या इससे पकड़ में नहीं आती। लक्षण बने रहने पर डॉक्टर ट्रोपोनिन, इकोकार्डियोग्राम, स्ट्रेस टेस्ट, कोरोनरी सीटी या एंजियोग्राफी जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
विज्ञापन
1 of 4
दिल की सेहत का कैसे लगाएं पता? - फोटो : Amarujala.com/AI
दिल की बीमारियां अब सभी उम्र के लोगों को अपना शिकार बनाती जा रही हैं, यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अपनी हार्ट हेल्थ को लेकर अलर्ट रहने की सलाह देते हैं। सीने में रहने वाली दर्द, भारीपन, किसी भी तरह की असहजता को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

सीने में दर्द, सांस फूलने या धड़कन में अनियमितता की शिकायत होने पर सबसे पहले  ईसीजी कराने की सलाह दी जाती है। अगर ये रिपोर्ट सामान्य आ जाए तो मान लिया जाता है कि दिल की सेहत बिल्कुल ठीक है। लेकिन डॉक्टर कहते हैं, दिल की समस्याओं के बारे में पता लगाने के लिए सिर्फ ईसीजी रिपोर्ट काफी नहीं है। 

ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम दिल की विद्युत गतिविधि और धड़कनों की लय की जानकारी देता है। यह हार्ट अटैक समेत कई स्थितियों की पहचान में महत्वपूर्ण है, लेकिन अकेले इसी टेस्ट से दिल की हर बीमारी का पता नहीं चलता। आइए जान लेते हैं कि फिर दिल की बीमारियों के बारे में जानने के लिए कौन से टेस्ट कराना जरूरी है?
विज्ञापन

2 of 4
ईसीजी टेस्ट - फोटो : Freepik.com
ईसीजी रिपोर्ट नॉर्मल आया तो टेंशन नहीं?

ईसीजी की रिपोर्ट नॉर्मल आने का मतलब सिर्फ इतना है कि उस जांच में दिल की विद्युत गतिविधि में कोई असामान्यता नहीं दिखी। 

अगर आपको बार-बार सीने में दर्द हो रहा है, चलने पर सांस फूलती है, चक्कर आते हैं तो ईसीजी रिपोर्ट नॉर्मल आने के बावजूद डॉक्टर से संपर्क करें। आपके लिए कौन-सी जांच जरूरी है, यह उम्र, शरीर के लक्षण, बीमारियों के जोखिम जैसी स्थितियों के आधार पर तय होता है।
विज्ञापन

3 of 4
दिल की सेहत का कैसे पता लगाएं - फोटो : Freepik.com
इको और स्ट्रेस टेस्ट

इकोकार्डियोग्राम यानी इको में ध्वनि तरंगों से दिल की तस्वीर बनाई जाती है। इससे दिल की बनावट, उसकी पंप करने की क्षमता और वाल्व के काम करने की जानकारी मिलती है।
 
  • अगर आपकी परेशानी चलने, सीढ़ियां चढ़ने या मेहनत करने पर बढ़ती है, तो डॉक्टर स्ट्रेस टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। इसमें व्यायाम के दौरान दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और ईसीजी में होने वाले बदलाव का पता चलता है।
विज्ञापन

4 of 4
हृदय रोगों के बारे में कैसे पता लगाएं - फोटो : Freepik.com
ट्रोपोनिन, सीटी और एंजियोग्राफी

अगर किसी मरीज में डॉक्टर को हार्ट अटैक का संदेह हो तो उसे ट्रोपोनिन टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। यहां समझना जरूरी है कि हार्ट जैसी स्थितियों में हार्ट की मांसपेशियों को होने वाले डैमेज के कारण खून में ट्रोपोनिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे समस्या का अंदाजा लगाया जा सकता है। डॉक्टर इसकी रिपोर्ट के साथ ईसीजी और मरीज के लक्षणों को देखकर पता लगाते हैं कि कहीं उसे हार्ट अटैक तो नहीं हुआ है?
 
  • कोरोनरी सीटी एंजियोग्राफी से दिल की धमनियों की तस्वीर ली जाती है। इससे धमनियों में संकुचन या रुकावट का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
  • कोरोनरी एंजियोग्राफी में विशेष डाई की मदद से धमनियों की स्थिति को देखा जाता है। 



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें