फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rift Valley Fever: कश्मीरी वैज्ञानिक ने खोज निकाला RVF बीमारी का कारण, एक और वायरस के मामले आए सामने

Wed, 13 Apr 2022 04:29 PM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
आरवीएफ वायरस - फोटो : Istock
कोरोना वायरस के बाद अब जानवरों से इंसानों में फैलने वाले एक और वायरस को लेकर नई खोज सामने आई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, रिफ्ट वैली वायरस मुख्य रूप से गाय, भैंस, भेड़, बकरी जैसे पालतू जानवरों से फैलने वाली बीमारी है। इस वायरस से इंसानों के संक्रमित होने के मामले सामने आ रहे हैं। रिफ्ट वैली वायरस पर वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है, जिसमें पता चला है कि जानवरों से यह वायरस कैसे इंसानों को संक्रमित कर रहा है और इससे उनके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। कई देशों में रिफ्ट वैली वायरस या आरवीएफ के मामले देखने में आ रहे हैं। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रिफ्ट वैली वायरस को उन बीमारियों की सूची में शामिल किया है, जो आगे चलकर महामारी का रूप ले सकती है। कोरोना वायरस के प्रभाव से दुनिया पहले ही जूझ रही है। भारत में कोरोना की चौथी लहर आने की संभावना बढ़ रही है। इस बीच रिफ्ट वैली वायरस को समय रहते न रोका गया तो एक और महामारी से दुनिया ग्रसित हो सकती है। ऐसे में चलिए जानते हैं रिफ्ट वैली वायरस के बारे में, कैसे फैलता है आईवीएफ, क्या है इसका इंसानों पर असर और बचाव के उपाय।
विज्ञापन

2 of 5
आरवीएफ वायरस - फोटो : Istock
रिफ्ट वैली फीवर वायरस क्या है?

पालतू जानवरों के बीच मच्छरों द्वारा एक तरह का वायरस फैलता है। जिसके कारण जानवरों में खून बहना शुरू हो जाता है। जानवरों के लिए यह वायरस जानलेवा है। वहीं ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें आरवीएफ जानवरों से इंसानों में पहुंचकर संक्रमित कर रहा है।
विज्ञापन

3 of 5
आरवीएफ वायरस - फोटो : istock
आरवीएफ वायरस कैसे फैल रहा?

जम्मू कश्मीर के विशेषज्ञ द्वारा किए गए एक शोध में पता चला कि जानवरों के खून, शारीरिक स्त्राव और टिश्यूज के जरिए आरवीएफ इंसानों में फैल रहा है।  इसके अलावा मच्छर द्वारा आरवीएफ से संक्रमित जानवर को काटने के बाद जब किसी इंसान को मच्छर काटता है तो उससे मानव शरीर में वायरस प्रवेश कर जाता है और वह संक्रमित हो सकता है।

4 of 5
आरवीएफ वायरस - फोटो : iStock
आरवीएफ के मामले  

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आरवीएफ बीमारी के कई केस सामने आ रहे हैं। हाल ही में अफ्रीका में गर्भवती महिलाओं में गर्भपात के मामले बढ़े हैं। कई मामलों में शिशुओं का जन्म समय से पहले हो रहा है। महिलाओं की गर्भपात की खतरा 4.5 गुना तक बढ़ गया है। इसका कारण आरवीएफ बीमारी का फैलना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
आरवीएफ वायरस - फोटो : Istock
आरवीएफ पर जम्मू में शोध

रिफ्ट वैली फीवर पर जम्मू कश्मीर के वायरोलॉजिस्ट डाॅ. सफदर गनई ने अमेरिका में वैज्ञानिकों के एक दल के साथ शोध करते हुए पता लगाया है कि ये वायरस एक प्रोटीन LRP 1 के माध्यम से इंसान की कोशिकाओं तक पहुंचता है। कश्मीर यूनिवर्सिटी से मास्टर्स डिग्री लेने वाले डॉ. सफदर की रिपोर्ट के मुताबिक एलआरपी 1 नाम का यह प्रोटीन लिपोप्रोटीन को हटाने का काम करता है, जिससे बैड कोलेस्ट्रॉल को खून में लाने-ले जाने की प्रक्रिया की जाती है। इस शोध से जुड़ी रिपोर्ट को साइंस मैगजीन सेल ने प्रकाशित की है। डॉ. सफदर के शोध से पता चलता है कि आरवीएफ वायरस कैसे काम करता है। जिससे वायरस का इलाज खोजने में मदद मिलेगी। का काम करेंगे।

---------------------
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें