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Covid-19: नया वैरिएंट पिरोला पिछले वैरिएंट्स से कितना अलग? जानिए वैश्विक स्तर पर बढ़ते इस नए जोखिम के बारे में

Sun, 03 Sep 2023 12:28 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के नए वैरिएंट्स का खतरा - फोटो : pixabay
कोरोना के नए वैरिएंट्स के मामले वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। एरिस (EG.5) और पिरोलो जैसे नए वैरिएंट्स की प्रकृति काफी संक्रामकता वाली देखी जा रही है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। पिरोला के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं और बेहद कम समय में 55 से अधिक देशों में पहुंच चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस नए वैरिएंट की प्रकृति को देखते हुए इसे 'वैरिएंट अंडर मॉनिटरिंग' के रूप में वर्गीकृत किया है।

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि नए वैरिएंट्स में अधिक म्यूटेशन देखे गए हैं, जो शरीर में वैक्सीन और पहले के संक्रमण से बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देकर लोगों को संक्रमित कर सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैश्विक स्तर पर कोरोना के नए वैरिएंट्स के मामले जिस तरह से बढ़ते जा रहे हैं, ये बड़ा स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है, इससे सभी लोगों को बचाव करते रहना जरूरी है। पिरोला की प्रकृति अत्यधिक संक्रामकता वाली हो सकती है क्योंकि इसमें मूल वैरिएंट की तुलना में 35 से अधिक म्यूटेशन हैं। आइए जानते हैं कि ओमिक्रॉन के अब तक के वैरिएंट्स की तुलना में ये नया वैरिएंट कितना अलग है?
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नए वैरिएंट्स के कारण होने वाली समस्या - फोटो : Pixabay
ओमिक्रॉन का सबसे अधिक म्यूटेशन वाला वैरिएंट

अध्ययन में पाया गया है कि कोरोना के इस नए वैरिएंट को इसके अत्यधिक म्यूटेशन काफी अलग बनाते हैं। म्यूटेशंस की अधिकता का मतलब है कि ये पिछले वैरिएंट्स की तुलना में अपने आनुवंशिक अनुक्रम के आधार पर कितने भिन्न हैं?

हाल ही में सामने आए वैरिएंट BA.2.86 में 35 नए उत्परिवर्तन हैं जो इसे पहले से ज्ञात कोविड वैरिएंट से अलग करते हैं। अधिक म्यूटेशनों का मतलब यह भी है कि यह आसानी से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को चकमा देने में सफल हो रहा है, जिसके कारण कम समय में अधिक से अधिक लोगों में संक्रमण बढ़ने का खतरा हो सकता है।
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नए वैरिएंट्स के कारण संक्रामकता - फोटो : istock
कितने गंभीर हो सकते हैं इससे संक्रमण के मामले?

मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना के नए वैरिएंट्स की प्रकृति को अभी तक बहुत अच्छी तरह से समझा नहीं जा सका है। जहां तक बात इस नए वैरिएंट की बात है इसकr जीनोम सिक्वेंसिंग की जा रही है, हालांकि अभी तक यह समझा नहीं जा सका है कि वास्तव में ये नया वैरिएंट कितने गंभीर रोग का कारण बन सकता है?

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि यह ओमिक्रॉन का ही एक उत्परिवर्तित रूप है, ऐसे में इसके कारण संक्रमण की स्थिति में गंभीर रोग विकसित होने का खतरा कम ही है क्योंकि ओमिक्रॉन के पिछले वैरिएंट्स के कारण भी रोग की गंभीरता कम ही रही है।

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वैक्सीनेटेड लोगों में नए वैरिएंट्स से जोखिम - फोटो : Istock
क्या वैक्सीनटेड लोग भी इससे सुरक्षित नहीं हैं?

पिरोला वैरिएंट के बारे में किए गए अध्ययन से पता चलता है कि इसके अत्यधिक म्यूटेशन आसानी से शरीर की प्रतिरक्षा को चकमा देने में सफल हो सकते हैं। हालांकि इस बारे में अब तक कोई स्पष्ट दावा नहीं किया जा सकता है जब तक कि इसपर अध्ययन की रिपोर्ट न आ जाए। जैसे-जैसे वायरस विकसित हो रहा है, कई कंपनियां अपने टीकों को अपडेट कर रही हैं।

जिन लोगों का पहले से टीकाकरण हो चुका है, उन्हें अगर संक्रमण हो जाता है तो इसके कारण गंभीर रोग विकसित होने का खतरा कम होगा।
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नए वैरिएंट्स से बचाव के लिए नए टीके बनाने की तैयारी - फोटो : Istock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

शोधकर्ता कहते हैं, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि कोरोना के जितने भी नए वैरिएंट्स देखे जा रहे हैं, वे ज्यादातर पहले के मूल वैरिएंट के ही म्यूटेटेड रूप हैं। ऐसे में इनकी ज्यादातर प्रकृति मूल स्ट्रेन से मिलती जुलती हो सकती है। हाल के वर्षों में दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में ओमिक्रॉन ही सबसे ज्यादा प्रसारित देखा गया है।

डेल्टा की तरह इस वैरिएंट के कारण सांस की समस्या, आईसीयू में भर्ती होने की जरूरत या फिर मौत के मामले कम देखे जा रहे हैं। हालांकि नए वैरिएंट्स की संक्रामकता जरूर अधिक हो सकती है, ऐसे में इससे बचाव के लिए सभी लोगों को निरंतर प्रयास करते रहने की आवश्यकता है।


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स्रोत और संदर्भ
Risk Assessment Summary for SARS CoV-2 Sublineage BA.2.86


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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