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Study: इस सामान्य परीक्षण से जान सकते हैं कितने स्वस्थ हैं आप? ऐसा न कर पाने वालों में समय से मौत का खतरा अधिक

Tue, 16 Aug 2022 07:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जीवन प्रत्याशा की जांच कैसे करें? - फोटो : istock
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर के भीतर बढ़ रही समस्याओं का अंदाजा आप कुछ सामान्य से लक्षण और जांच के आधार पर लगा सकते हैं। एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ऐसे ही सामान्य से परीक्षण के बारे में बताया है जिसके आधार पर आप आसानी से अपने स्वास्थ्य का निर्धारण कर सकते हैं, वहीं यदि आप इसे करने में असमर्थ रहते हैं तो इसे गंभीर संकेत के रूप में देखा जा सकता है। 

ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 'वन लेग स्टैंड टेस्ट' नामक सामान्य से परीक्षण के बारे में लोगों को बताया है। शोधकर्ताओं ने बताया इस टेस्ट के लिए सबसे पहले 10 सेकंड के लिए एक पैर पर संतुलन बनाते हुए खड़े हो जाइए, अगर आप ऐसा कर ले जाते हैं तो इससे साबित होता है कि आप काफी हद तक स्वस्थ हैं।

पैरों का संतुलन बेहतर सेहत का परिचायक माना जाता है। हालांकि अगर आप ऐसा करने में असमर्थता महसूस करते हैं तो ऐसे लोगों को सावधान हो जाने की आवश्यकता है, यह गंभीर स्थिति की तरफ इशारा हो सकता है। आइए इस अध्ययन के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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एक पैर पर खड़े रहने का टेस्ट - फोटो : Pixabay
वन लेग स्टैंड टेस्ट

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि अगर आप 10 सेकेंड तक एक पैर पर संतुलित रूप से नहीं खड़े रह पाते हैं  तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। हजारों लोगों पर किए गए इस अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों ने पाया कि जो लोग पैरों का संतुलन बनाकर ठीक से खड़े नहीं हो पा रहे हैं उनमें अगले 10 वर्षों में किसी भी कारण से मृत्यु का जोखिम दोगुना तक अधिक हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है पैरों का संतुलन एक आवश्यक कौशल है जो लंबी उम्र और जीवन की गुणवत्ता के लिए आवश्यक है। 
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10 सेकंड के लिए एक पैर पर खड़े का टेस्ट - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययन के लिए साल 2008 से 2020 के बीच 51-75 वर्ष की आयु वाले 1702 लोगों का फॉलोअप किय गया। शुरुआत में, प्रतिभागियों को एक पैर ऊपर उठाने और दूसरे पैर के पीछे की तरफ रखने के लिए कहा गया था। ऐसा करने के लिए प्रतिभागियों को तीन प्रयास का समय दिया गया, हालांकि इसमें लगभर हर पांच में से एक प्रतिभागी फेल हो गया।

अगले 10 वर्षों में, विभिन्न कारणों से इनमें से 123 प्रतिभागियों की मृत्यु हुई। उम्र, लिंग और अंतर्निहित स्थितियों जैसे कारकों पर विचार करने के बाद शोधकर्ताओं ने संतुलन को लेकर भी डेटा अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि 10 साल पहले 10 सेकंड के लिए एक पैर पर खड़े होने में जिन प्रतिभागियों ने असमर्थता जाहिर की थी, उनमें से ज्यादातर में मृत्यु का जोखिम अधिक पाया गया। 

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संतुलन बिगड़ने से बुढ़ापे में चोट लगने का खतरा - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?

अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों का शरीर का संतुलन ठीक नहीं रहता उनमें गिरने और गंभीर चोट का खतरा अधिक हो सकता है। दुनियाभर में गिरने के कारण अनजाने में लगी चोट मौत के प्रमुख कारणों में से एक है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. जोनाथन मायर्स कहते हैं, उम्र के साथ, ताकत और संतुलन कम हो जाता है और इसके परिणाम मांसपेशियां भी कमजोर हो जाती हैं। इसके कारण चलते समय गिरने का खतरा अधिक होता है, हालांकि नियमित व्यायाम करने वालों में यह समस्या कम देखी गई है। 
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उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक संतुलन में आ जाती है कमी - फोटो : istock
अध्ययन का निष्कर्ष?

अध्ययनकर्ताओं ने निष्कर्ष में बताया कि बढ़ती उम्र के साथ चोट के जोखिम को कम करने के लिए सभी लोगों को 'वन लेग स्टैंड टेस्ट' करते रहना चाहिए, इसके आधार पर आप संतुलन का अंदाजा लगा सकते हैं। आप एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर को 90 डिग्री के कोण पर रखकर इस जांच को कर सकते हैं। इससे आपको शारीरिक स्थितियों का अंदाजा आसानी से लग सकता है। उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक संतुलन में आने वाली कमी के कारण कई तरह की गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।


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स्रोत और संदर्भ
Successful 10-second one-legged stance performance predicts survival in middle-aged and older individuals

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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