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भारत मे कुपोषण क्यों है बड़ी समस्या? कैसे मिल सकता है हर भारतीय को पोषण

Mon, 01 Feb 2021 03:23 PM IST
प्रकाश चंद जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
जब भी बात पोषण की आती है तो हमारे मन में कई तरह के विचार और चित्र जन्म लेते हैं। पोषण और कुपोषण जितने मिलते-जुलते शब्द हैं, उतना ही इनका महत्व भी मिलता-जुलता है। भारत आज भी कुपोषण की समस्या से लड़ रहा है। कई स्तर पर कई कार्यक्रम, जागरूक अभियान से लेकर कई ऐसी चीजें की जाती हैं, जिससे इस समस्या को दूर किया जा सके। लेकिन सच्चाई ये है कि आज भी हम इस समस्या से चारों तरफ से घिरे हुए हैं, जिसके कई अलग-अलग चित्र हमेशा ही हमें देखने को मिलते रहते हैं। किसी भी समाज या देश के लिए कुपोषण एक बड़ी समस्या हैं, और इसके आंकड़े भी हर किसी को डराते हैं। तो चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
पोषण क्या है?
  • दरअसल, शरीर आहार सम्बन्धी सभी प्रक्रियाओं का नाम ही पोषण है। वहीं, हमारे भोजन के वो सभी तत्व जो हमारे शरीर के लिए आवश्यक कार्य करते हैं, वो पोषण तत्व कहलाते हैं। लेकिन अगर ये तत्व हमारे भोजन में उचित मात्रा में न हों, तो शरीर अस्वस्थ हो जाता है। हमारे भोजन में कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन, लवण, पानी और खनिज जैसे प्रमुख पोषण तत्व होने चाहिए। लेकिन जब हमारे खाने में ये सभी पोषण तत्व मौजूद नहीं होते हैं, तो भी व्यक्ति कुपोषण का शिकार हो सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
वैश्विक भूखमरी सूचकांक 2020 पर नजर दौड़ाएं तो भारत 107 देशों की इस लिस्ट में 94वें पायदान पर हैं। इस सूचकांक के साथ जो रिपोर्ट जारी की गई थी, उसके मुताबिक भारत की 14 प्रतिशत आबादी अल्पपोषित है और बच्चों में बौनेपन की दर 37.4 प्रतिशत है। भारत को आजाद हुए 74 साल हो चुके हैं, लेकिन बावजूद इसके अब भी हमारा देश कुपोषण की समस्या से जूझ रहा है। आजादी के बाद से भारत में खाद्यान्न के उत्पादन की समस्या में पांच गुना वृद्धि हुई है, लेकिन कुपोषण आज भी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हुई है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कुपोषण की समस्या खाद्यान्न की उपलब्धता न होने के कारण नहीं है, बल्कि आहार क्रय करने की क्रयशक्ति कम होने के कारण है। जैसे-जैसे व्यक्ति की गरीबी बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे पौष्टिक आहार की कमी बढ़ने लगती है और इसी के कारण कुपोषण जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं। कुपोषण के कारण ही घेंघा, एनीमिया और बच्चों की हड्डियों के कमजोर होने की समस्या सामने आती है, और इसी के कारण शिशुओं की मृत्यु दर भी बढ़ने लगती है जो कि भारत और यहां के लोगों के लिए एक चिंता का विषय है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
हालांकि, सरकारों द्वारा कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए कई कदम भी उठाए गए हैं, जिनमें मिड-डे मील, ई-पोषण व्यवस्था, राष्ट्रीय पोषण मिशन, मनरेगा, समेकित बाल विकास सेवाएं आदि शामिल हैं। लेकिन बावजूद इसके भी स्थिति बेहतर होती नजर नहीं आती है। लेकिन ऐसा हम नहीं बल्कि आंकड़े बताते हैं। कुपोषण की वजह से जहां मौतें तक होती हैं, तो वहीं देश के विकास कार्यों में भी कई तरह की रुकावटें आती हैं। ऐसे में सरकार ही नहीं लोगों को भी अपने-अपने स्तर पर इस पर काम करना चाहिए, ताकि हम जल्द से जल्द इस समस्या से निजात पा सके। हमें अपने खाने में पोषण तत्वों का बेहद ख्याल भी रखना चाहिए, ताकि हम कुपोषण का शिकार न हो सके।
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