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Non-Veg Milk: क्या होता है नॉन-वेज दूध? आखिर क्यों सुर्खियों में बना हुआ है ये मिल्क

Wed, 16 Jul 2025 07:14 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हमारे देश में सदियों से दूध को पवित्र और पौष्टिक आहार माना जाता रहा है। मगर इन दिनों नॉन-वेज दूध की चर्चा तेजी से चल रही है,जिसके बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है और इसे जानने के लिए उत्सुक भी हैं। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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नॉन-वेज दूध क्या है? - फोटो : Adobe Stock
What is Non-veg Milk? दूध को भारत में सदियों से पवित्र और पौष्टिक आहार माना जाता रहा है। यह हमारी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का एक अहम हिस्सा है। गाय के दूध का उपयोग पूजा-पाठ से लेकर बच्चों के पोषण तक हर जगह होता है। ऐसे में हाल ही में 'नॉन-वेज मिल्क' शब्द काफी सुर्खियों में आ गया है, जिसने कई लोगों को चौंका दिया है। यह भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते में भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्या है यह 'नॉन-वेज दूध' और क्यों भारत इस पर इतना सख्त रुख अपना रहा है? आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या है 'नॉन-वेज मिल्क' का मतलब?
'नॉन-वेज मिल्क' का मतलब उस दूध से है जो ऐसी गायों से मिलता है, जिन्हें चारे में मांस, खून, हड्डी का चूरा या जानवरों के अवशेष जैसे मांसाहारी उत्पाद खिलाए जाते हैं। अमेरिका और कुछ पश्चिमी देशों में, गायों को प्रोटीन और फैट की अधिक मात्रा देने के लिए अक्सर ऐसा चारा खिलाया जाता है, जिसमें मांस उद्योग से बचे हुए उत्पाद जैसे सूअर, मुर्गी, मछली, घोड़े और यहां तक कि कभी-कभी कुत्ते या बिल्ली के अवशेष भी शामिल हो सकते हैं। उन्हें प्रोटीन के लिए पशुओं का खून और मोटा होने के लिए चर्बी भी दी जाती है। यह प्रैक्टिस दूध उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के लिए अपनाई जाती है।
 
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दूध (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : freepic
क्यों है यह सुर्खियों में? भारत का सख्त रुख
'नॉन-वेज मिल्क' के सुर्खियों में आने की मुख्य वजह भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार समझौते की बातचीत है। अमेरिका चाहता है कि भारत अपने डेयरी बाजार को उसके उत्पादों के लिए खोले, लेकिन भारत ने अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात को मंजूरी देने से साफ इनकार कर दिया है।

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गाय का दूध - फोटो : Adobe Stock
भारत का कहना है कि आयातित दूध उन गायों से आना चाहिए जिन्हें मांस या खून जैसे पशु-आधारित उत्पाद नहीं खिलाए गए हों। भारत ने इस शर्त को 'नॉन-नेगोशिएबल रेड लाइन' यानी ऐसी शर्त बताया है जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता। इसकी मुख्य वजह भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं, जहां गाय को पूजनीय माना जाता है।
 
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नॉन-वेज दूध को लेकर धार्मिक चिंताएं - फोटो : Adobe Stock
धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक चिंताएं
भारतीय परंपरा में दूध और दूध से बने उत्पादों (जैसे दही, घी) को शुद्ध और पवित्र माना जाता है। इन्हें धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में, ऐसी गायों का दूध स्वीकार करना, जिन्हें मांसाहारी चारा खिलाया गया हो, करोड़ों भारतीयों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के बिल्कुल खिलाफ है। 
 
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कितना शाकाहारी है ये नॉन-वेज दूध? - फोटो : Freepik
बहुत से लोग दूध को एक शाकाहारी उत्पाद मानते हैं, और अगर उन्हें पता चले कि दूध ऐसी गायों से आ रहा है जिन्हें मांस खिलाया गया है, तो यह उनके आहार संबंधी मूल्यों के विपरीत होगा। यह सिर्फ व्यापार का मुद्दा नहीं, बल्कि नैतिकता और आस्था से जुड़ा मामला भी बन गया है।



नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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