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Gluten intolerance: क्या है ग्लूटेन इंटॉलरेंस, जिसमें रोटी खाने से भी करना पड़ता है परहेज? यहां जानिए सबकुछ

Sun, 25 May 2025 09:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ग्लूटेन इंटॉलरेंस एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को ग्लूटेन नामक प्रोटीन को पचाने में कठिनाई होती है। यह प्रोटीन मुख्यतः गेहूं, जौ और राई जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। डॉक्टर आपको रोटी या गेंहू वाली चीजें खाने से मना कर सकते हैं।
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ग्लूटेन इंटॉलरेंस की समस्या - फोटो : Freepik.com
Gluten Intolerance: अच्छी सेहत चाहते हैं तो खान-पान में सुधार करना बहुत जरूरी हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को आहार में पौष्टिक चीजें, साबुत अनाज, नट्स-सीड्स को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए।

भारतीय भोजन में चावल-रोटी, साबुत अनाज आम है, पर क्या आप जानते हैं कि कुछ लोगों को इस तरह के आम दैनिक चीजों के सेवन से भी दिक्कतें हो सकती हैं? विशेषतौर पर जिन खाद्य पदार्थों में ग्लूटेन की मात्रा होती है, उसका सेवन शरीर के लिए समस्या बढ़ाने वाली हो सकती है। इस स्थिति को मेडिकल की भाषा में ग्लूटेन इंटॉलरेंस कहा जाता है।

ग्लूटेन इंटॉलरेंस एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें व्यक्ति को ग्लूटेन नामक प्रोटीन को पचाने में कठिनाई होती है। यह प्रोटीन मुख्यतः गेहूं, जौ और राई जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। इसलिए ऐसे लोगों को रोटी-पराठा, ब्रेड, पास्ता, बिस्किट जैसी चीजें खाने से भी परहेज करना पड़ता है।
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ग्लूटेन इंटॉलरेंस के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
ग्लूटेन इंटॉलरेंस और इसके मामले

आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में, अनुमानतः 6 से 8 मिलियन (60-80 लाख) लोगों को सीलिएक डिजीज है, जो ग्लूटेन इंटॉलरेंस का एक रूप है। 

सीलिएक डिजीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, इसमें व्यक्ति का इम्यून सिस्टम ग्लूटेन को पचाने की कोशिश में खुद की आंतों को ही नुकसान पहुंचाने लगता है। ऐसे में अगर आप ग्लूटेन वाली चीजें खाते हैं तो इससे बार-बार डायरिया या कब्ज, पेट में सूजन-गैस बनने,  पेट दर्द, थकावट और कमजोरी, त्वचा पर चकत्ते होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

कुछ लोगों को बिना सीलिएक डिजीज के बिना भी ग्लूटेन वाली चीजों से एलर्जी हो सकती है। 
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खान-पान में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
ग्लूटेन इंटॉलरेंस होता क्यों है?

ग्लूटेन इंटॉलरेंस, विशेष रूप से नॉन-सीलिएक ग्लूटेन सेंसिटिविटी, एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर ग्लूटेन के प्रति असामान्य प्रतिक्रिया करता है। ये क्यों होता है इसके सटीक कारणों को पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें आनुवंशिकता, पर्यावरणीय कारक और गट माइक्रोबायोम सहित कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।

कुछ शोध बताते हैं कि ग्लूटेन इंटॉलरेंस गेहूं और अन्य ग्लूटेन युक्त अनाज में पाए जाने वाले कुछ कार्बोहाइड्रेट को पचाने में दिक्कतों के कारण भी हो सकती है। ये कार्बोहाइड्रेट आंत में किण्वित होने लगते हैं, जिससे सूजन, गैस और पेट दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं।

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पेट की समस्याएं - फोटो : Adobe stock
कैसे जानें कहीं आप भी तो नहीं हो गए हैं शिकार?

कहीं आपको भी तो ग्लूटेन इंटॉलरेंस नहीं है, इसका पता लगाने के लिए कुछ लक्षणों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

सामान्य भोजन जैसे रोटी, गेंहू या जौ से बनी चीजें खाने के बाद यदि आपको पेट में दर्द, गैस, दस्त या कब्ज, सिरदर्द हो जाता है तो सावधान हो जाना चाहिए। कुछ लोगों को इन चीजों के सेवन के बाद त्वचा पर लाल चकत्ते भी हो सकते हैं। अगर अक्सर भोजन के बाद आपको भी ये दिक्कतें हो रही हैं तो डॉक्टर से संपर्क करके स्थिति का सही निदान जरूर करा लें।
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ग्लूटेन वाली चीजों से करें परहेज - फोटो : Freepik.com
जिन लोगों को ग्लूटेन इंटॉलरेंस है वो क्या उपाय करें?

सीलिएक डिजीज का पता लगाने के लिए सीरोलॉजिकल टेस्ट या फिर आंतों की स्थिति का पता लगाने के लिए कुछ टेस्ट के माध्यम से डॉक्टर निदान करते हैं कि आपको ये समस्या क्यों हो रही है। अगर आपको ग्लूटेन इंटॉलरेंस की समस्या होती है तो कुछ सावधानियां बरतनी शुरू कर दें।
  • इस समस्या के लिए फिलहाल कोई दवा नहीं है, केवल ग्लूटेन-फ्री डाइट से दूरी बनाना ही बचाव का उपाय है।
  • ऐसे लोगों को गेहूं, जौ, राई और इनसे बने उत्पादों से परहेज करने की सलाह दी जाती है।  
  • ग्लूटेन इंटॉलरेंस वाले लोगों के लिए  बाजरा, चावल, मक्का, ज्वार, कुट्टू जैसे विकल्प अच्छे हो सकते हैं, इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर लें। 


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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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