What is Gaslighting In Relationships: मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के इस दौर में 'गैसलाइटिंग' एक ऐसा शब्द बनकर उभरा है, जिसे समझना हर किसी के लिए जरूरी है। यह भावनात्मक शोषण का एक अत्यंत सूक्ष्म और गहरा रूप है, जहां प्रेम या चिंता के मुखौटे के पीछे सामने वाले को सेल्फ डाइट में डाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया में सामने वाला व्यक्ति अपनी ही याददाश्त, वास्तविकता और मानसिक स्थिरता पर संदेह करने के लिए इस कदर मजबूर कर देता है कि आप स्वयं को ही कसूरवार मानने लगते हैं।
क्या होता है गैसलाइटिंग?
इस शब्द की उत्पत्ति 1944 की प्रसिद्ध फिल्म 'गैसलाइट' से हुई थी। आज यह रिश्तों से लेकर वर्कप्लेस तक एक गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या बन चुकी है। गैसलाइटिंग करने वाला व्यक्ति तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करता है और भावनाओं को 'ओवररिएक्टिंग' या 'पागलपन' का नाम देकर आपको भ्रमित कर देता है। ऐसे में सेल्फ-डाउट की संभावना काफी बढ़ जाती है। धीरे-धीरे यह स्थिति आपके आत्मविश्वास को पूरी तरह खोखला कर देती है, जिससे आप अपनी पहचान खोकर उस व्यक्ति पर भावनात्मक रूप से निर्भर हो जाते हैं।