What is Doom Scrolling: अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जिन्हें सुबह उठते ही थकान लगने लगती है तो ये खबर आपके लिए काफी अहम है। यहां हम आपको बताएंगे कि आपकी कौन सी आदत इसके पीछे का कारण हो सकती है।
What is Doom Scrolling: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलते ही और रात सोने से पहले तक ज्यादातर लोग मोबाइल स्क्रीन पर सोशल मीडिया, न्यूज और वीडियो स्क्रॉल करते रहते हैं।
इसी आदत को “डूम स्क्रोलिंग (Doom Scrolling)” कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति लगातार नेगेटिव या तनाव पैदा करने वाली खबरों और कंटेंट को बिना रुके देखते रहता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह आदत धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है। अगर आपको भी सुबह उठते ही थकान, चिड़चिड़ापन या बेचैनी महसूस होती है, तो इसकी एक बड़ी वजह डूम स्क्रोलिंग हो सकती है। आइए इस बारे में डिटेल में जानते हैं।
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डूम स्क्रोलिंग क्या है?
- फोटो : Freepik.com
शरीर के साथ दिमाग पर भी पड़ता है प्रभाव
डूम स्क्रोलिंग का असर केवल मानसिक तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर और दिमाग दोनों की कार्यप्रणाली को गहराई से प्रभावित करता है। जब कोई व्यक्ति लगातार देर रात तक मोबाइल पर सोशल मीडिया, न्यूज या वीडियो स्क्रॉल करता रहता है, तो उसका दिमाग आराम की स्थिति में नहीं आ पाता।
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डूम स्क्रोलिंग क्या है?
- फोटो : Freepik.com
ब्रेन लगातार जानकारी प्रोसेस करता रहता है, जिससे मानसिक थकान बढ़ती है और नींद का प्राकृतिक चक्र बिगड़ जाता है। इसका सीधा असर यह होता है कि व्यक्ति पूरी नींद नहीं ले पाता और सुबह उठते ही भारीपन, थकान और सुस्ती महसूस करता है।
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डूम स्क्रोलिंग क्या है?
- फोटो : फ्री पिक
होती है तनाव की समस्या
इसके अलावा लगातार नेगेटिव न्यूज, विवादित कंटेंट या तनाव पैदा करने वाली पोस्ट देखने से दिमाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे चिंता, तनाव और ओवरथिंकिंग की समस्या बढ़ने लगती है। व्यक्ति अनजाने में ही हर समय दिमाग में नकारात्मक विचारों को जगह देने लगता है, जिससे मानसिक शांति प्रभावित होती है। धीरे-धीरे यह आदत मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी का कारण भी बन सकती है, जो दैनिक जीवन और कामकाज पर असर डालती है।
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डूम स्क्रोलिंग क्या है?
- फोटो : Freepik.com
विशेषज्ञों के अनुसार, डूम स्क्रोलिंग का सीधा संबंध डोपामिन सिस्टम से भी होता है, जो दिमाग में “रिवार्ड सेंटर” की तरह काम करता है। जब व्यक्ति हर समय नई-नई और रोचक या नकारात्मक जानकारी स्क्रॉल करता है, तो दिमाग डोपामिन रिलीज करता रहता है। इससे अस्थायी खुशी तो मिलती है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी आदत बढ़ती जाती है और व्यक्ति मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने लगता है। यह डिजिटल एडिक्शन का रूप ले सकता है, जो मानसिक थकान को और अधिक बढ़ा देता है।
इससे बचने के लिए सबसे जरूरी है कि सोने से कम से कम 30–60 मिनट पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर दिया जाए।
स्क्रीन टाइम को सीमित करना, नोटिफिकेशन बंद रखना और दिन में डिजिटल डिटॉक्स अपनाना काफी फायदेमंद हो सकता है।
सुबह उठते ही सोशल मीडिया देखने की बजाय हल्की एक्सरसाइज, गहरी सांस लेना या मेडिटेशन जैसी आदतें अपनानी चाहिए, जिससे दिमाग शांत और फ्रेश महसूस करे।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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