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हेल्थ टिप: स्वाद के चक्कर में सेहत से न करें खिलवाड़, ज्यादा मिठाई खाने के नुकसान जान लें

Fri, 30 Oct 2026 04:33 PM IST
श्रुति गौड़ हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Side Effects of Eating Too Many Sweets:  लेख में जानें ज्यादा मिठाई खाने से शरीर पर क्या असर पड़ता है, इसके कौन-कौन से नुकसान हो सकते हैं और मीठा खाने की आदत को कैसे कंट्रोल करें। 
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 ज्यादा मीठा खाने की आदत कैसे करें कंट्रोल? - फोटो : AI
Side Effects of Eating Too Many Sweets:  त्योहारों का मौसम हो या कोई खास मौका, मिठाई के बिना खुशियां अधूरी लगती हैं। ऐसे में लोग स्वाद के चक्कर में रसगुल्ला, गुलाब जामुन, लड्डू, बर्फी और चॉकलेट जैसी चीजें खूब खाते हैं। कभी-कभार मीठा खाना नुकसानदायक नहीं है, लेकिन अगर आप रोजाना जरूरत से ज्यादा चीनी और मिठाइयों का सेवन करते हैं, तो यह सेहत के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। 

अगर आपको भी मीठा खाने की आदत है, तो इसे नजरअंदाज न करें। इस लेख में जानें ज्यादा मिठाई खाने से शरीर को क्या नुकसान हो सकते हैं और मीठे की आदत को कैसे कंट्रोल करें।
 
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ज्यादा मीठा खाने की आदत कैसे करें कंट्रोल? - फोटो : Freepik.com
  ज्यादा मिठाई खाने से शरीर को हो सकते हैं ये नुकसान

  1. तेजी से बढ़ सकता है वजन

मिठाइयों में चीनी और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। बार-बार मिठाई खाने से शरीर में जरूरत से ज्यादा कैलोरी पहुंच सकती है। अगर इन कैलोरी का इस्तेमाल ऊर्जा के रूप में नहीं होता, तो वजन बढ़ने का खतरा रहता है। खासकर रोजाना मिठाई, केक, चॉकलेट और मीठे ड्रिंक्स पीने की आदत वजन बढ़ा सकती है।

  2. ब्लड शुगर लेवल हो सकता है प्रभावित

ज्यादा चीनी वाली मिठाइयां खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। शरीर को इसे नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन बनाना पड़ता है। लंबे समय तक अतिरिक्त चीनी का सेवन और खराब खानपान टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों को मिठाई खाते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

 
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ज्यादा मीठा खाने की आदत कैसे करें कंट्रोल? - फोटो : AI
  3. दांतों में हो सकती है सड़न

ज्यादा मिठाई खाने का असर दांतों पर भी पड़ता है। मुंह में मौजूद बैक्टीरिया चीनी का इस्तेमाल करके एसिड बनाते हैं, जो दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे कैविटी और दांतों में सड़न की समस्या हो सकती है। इसलिए मीठा खाने के बाद कुल्ला करें और दिन में दो बार ब्रश जरूर करें।

 4. फैटी लिवर का बढ़ सकता है खतरा

चीनी, खासकर मीठे पेय पदार्थों के जरिए ज्यादा फ्रुक्टोज लेने से लिवर में फैट जमा होने का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक अधिक चीनी का सेवन नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD), जिसे अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) भी कहा जाता है, से जुड़ा हो सकता है।

 

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ज्यादा मीठा खाने की आदत कैसे करें कंट्रोल? - फोटो : Adobe Stock
5. दिल की सेहत पर पड़ सकता है असर

अधिक मात्रा में अतिरिक्त चीनी का सेवन मोटापा, हाई ट्राइग्लिसराइड्स और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। ये सभी दिल की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसलिए रोजाना ज्यादा मिठाई और मीठे ड्रिंक्स पीने से बचना चाहिए।

 6. मुंहासे और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं

कुछ अध्ययनों में अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों और मुंहासों के बीच संबंध पाया गया है। ज्यादा चीनी वाली चीजें कुछ लोगों में एक्ने की समस्या को बढ़ा सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा पर इसका असर एक जैसा नहीं होता।

 
 
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ज्यादा मीठा खाने की आदत कैसे करें कंट्रोल? - फोटो : Freepik.com
 ज्यादा मीठा खाने की आदत कैसे करें कंट्रोल?


अगर आपको भी मिठाई खाने की क्रेविंग होती है, तो कुछ आसान आदतें अपनाकर चीनी का सेवन कम कर सकते हैं।
  •   फलों को डाइट में शामिल करें: मीठा खाने की इच्छा होने पर आम, सेब, संतरा और पपीता जैसे फल खा सकते हैं।
  •  पानी पर्याप्त पिएं: दिनभर पर्याप्त पानी पीने की आदत डालें।
  •   मिठाई की मात्रा कम करें: एक बार में ज्यादा मिठाई खाने के बजाय सीमित मात्रा में खाएं।
  •   मीठे ड्रिंक्स से बचें: कोल्ड ड्रिंक, पैकेट वाले जूस और मीठे शेक का सेवन कम करें।
  •  लेबल जरूर पढ़ें: पैक्ड फूड खरीदते समय उसमें मौजूद अतिरिक्त चीनी की मात्रा चेक करें।
  •   संतुलित डाइट लें: खाने में प्रोटीन, फाइबर और साबुत अनाज शामिल करें।

  एक दिन में कितनी चीनी खाना सही है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, वयस्कों और बच्चों को फ्री शुगर का सेवन कुल दैनिक कैलोरी के 10 प्रतिशत से कम रखना चाहिए। बेहतर स्वास्थ्य के लिए इसे 5 प्रतिशत से भी कम रखने की सलाह दी जाती है। ध्यान रखें कि फ्री शुगर में मिठाइयों, शहद, सिरप और फलों के जूस में मौजूद चीनी भी शामिल होती है।

 
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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