फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Health Alert: लंच के बाद भारी हो जाती हैं आंखें, घेर लेती है नींद? जानिए क्या है कारण, ये कोई बीमारी तो नहीं

Mon, 13 Apr 2026 08:12 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अगर आप भी रोज ऑफिस में लंच के बाद खुद को नींद का शिकार पाते हैं तो इसके कारणों को समझ लीजिए। आखिर लंच के बाद नींद क्यों आती है, क्या यह बीमारी का संकेत है?
विज्ञापन
1 of 4
ज्यादा नींद आने का कारण - फोटो : Amarujala.com/AI
रोज दोपहर को लंच के बाद क्या आपकी भी आंखें भारी होने लगती हैं, बार-बार जम्हाई आती है और कंप्यूटर पर काम करना  मुश्किल हो जाता है? अगर हां तो आप अकेले नहीं हैं। यह समस्या ज्यादातर लोगों को परेशान कर रही है। कई बार लोगों को ऑफिस में नींद आने के कारण शर्मिंदगी तक महसूस होने लगती है। मेडिकल भाषा में इसे पोस्टप्रांडियल सोम्नोलेंस कहा जाता है।

भोजन के बाद शरीर में आने वाली सुस्ती और नींद के लिए कौन से कारण जिम्मेदार हैं, कहीं ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं है? इस बारे में जानना जरूरी है।

अक्सर लोग सोचते हैं कि शायद सिर्फ ज्यादा खाने से ऐसा होता है, लेकिन इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जिसपर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
विज्ञापन

2 of 4
ऑफिस में नींद की समस्या - फोटो : Freepik.com
ज्यादा नींद आने की वजह क्या है?

मेडिकल विशेषज्ञ कहते हैं, रात में पूरी नींद न लेने, शरीर में पानी की कमी, खराब डाइट, तनाव या कुछ मेडिकल समस्याओं के कारण दिन में आपको नींद आ सकती है। अगर लंच के बाद हर दिन बहुत ज्यादा थकान होने लगे, तो यह सिर्फ आलस नहीं बल्कि शरीर का कोई संकेत भी हो सकता है।
 
  • लंच के बाद नींद आने की सबसे आम वजह भारी और हाई-कार्ब वाले भोजन को माना जाता है। 
  • जब आप ज्यादा मात्रा में चावल, रोटी, तला-भुना या मीठा खाते हैं, तो शरीर को उसे पचाने के लिए अधिक ऊर्जा लगानी पड़ती है, जिससे सुस्ती महसूस हो सकती है।
  • हाई-कैलोरी डाइट के बाद नींद अधिक आना आम है।

इन कारणों को जान लीजिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर कभी-कभार लंच के बाद नींद आती है तो यह सामान्य है, लेकिन अगर रोज ये समस्या बनी रहती है, कमजोरी महसूस होती है और काम करना मुश्किल जाता है तो इसपर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।

आमतौर पर खाना खाने के बाद नींद आने की समस्या उनमें अधिक होती है, जिनका पाचन और नींद का पैटर्न सही नहीं होता है। तमाम शोध और अध्ययन बताते हैं कि इसके पीछे एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है, लेकिन इसमें खानपान और जीवनशैली की भी बड़ी भूमिका हो सकती है। 

थायरॉयड की समस्या, एनीमिया, स्लीप एपनिया, और हार्मोनल गड़बड़ी दिनभर थकान का कारण हो सकती है। इससे भी नींद आती है।
विज्ञापन

3 of 4
बहुत ज्यादा नींद आने की समस्या - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

खाने के बाद नींद और थकान आने की एक बड़ी वजह नींद का पूरा न होना या नींद से जुड़े विकार भी हो सकते हैं। इसके अलावा जब आप खाना खाते हैं तो पाचन अंगों में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है और मस्तिष्क में कम हो जाता है, जिससे सुस्ती या नींद आ सकती है। 

इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार शैलात भोजन के बाद नींद आने की समस्या से बचाव के लिए संतुलित आहार का सेवन करें। एक साथ अधिक भोजन करने के बजाय थोड़ा-थोड़ा कर कई बार खाएं। योग या व्यायाम करें।
 
  • भोजन के पाचन तंत्र में पहुंचते ही भोजन एनर्जी यानी ग्लूकोज में बदल जाता है। इस प्रक्रिया में कई हार्मोन रिलीज होते हैं, जो मस्तिष्क को झपकी लेने या नींद का संकेत देने का काम करते हैं। 
  • हाई प्रोटीन और कार्ब्स से भरपूर खाना खाने से शरीर में नींद को रेग्युलेट करने वाला सेरोटोनिन हार्मोन बढ़ जाता है, जिससे नींद या आलस महसूस होता है। 
  • अगर आप शारीरिक गतिविधि पर कम ध्यान देते हैं। तो इसकी वजह से भी नींद भी प्रभावित हो सकती है और भोजन के बाद नींद या आलस महसूस हो सकता है।
विज्ञापन

4 of 4
खान-पान को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com
इस समस्या से बचने के लिए क्या करें?

इस समस्या से बचने के लिए सबसे पहले लंच हल्का रखें। एक बार में बहुत ज्यादा खाने के बजाय संतुलित मात्रा में खाएं और प्रोटीन, फाइबर व सलाद शामिल करें।
 
  • खाने के तुरंत बाद कुर्सी पर बैठने के बजाय 5-10 मिनट टहलें। 
  • हल्की वॉक शरीर को एक्टिव रखती है और नींद कम करती है। पोस्ट-मील एक्टिविटी थकान घटाने में मदद कर सकती है।
  •  पर्याप्त पानी पिएं क्योंकि डिहाइड्रेशन भी थकान बढ़ाता है।
  • रात की नींद पूरी करें। रोजाना कम से कम 7-8 घंटे सोना जरूरी है।


--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें