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सेहत की बात: घर का खाना खाते हैं फिर भी बढ़ा रहता है कोलेस्ट्रॉल? कहीं ये गलतियां तो नहीं कर रहे हैं आप

Tue, 25 Aug 2026 08:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

घर का खाना खाने के बावजूद कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। ज्यादा घी-मक्खन, तला भोजन, कम फाइबर, कम शारीरिक गतिविधि और आनुवंशिक कारण आपका खतरा बढ़ाने वाले हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ बाहर का खाना बंद करना पर्याप्त नहीं। पूरी डाइट, वजन, व्यायाम और नियमित लिपिड जांच पर ध्यान देना जरूरी है।
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कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : Adobe Stock
जब भी बात दिल की सेहत को ठीक रखने की आती है तो इसके लिए हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल को सबसे बड़ा जिम्मेदार माना जाता है। खराब डाइट इसका सबसे बड़ा कारण है। अध्ययनों से पता चलता है कि खाने में नमक-तेल, चीनी अधिक है या फिर आप अक्सर बाहर का खाना खाते हैं तो इससे बीपी-कोलेस्ट्रॉल दोनों की समस्या हो सकती है। हालांकि कई लोगों में घर का खाना खाने के बावजूद टेस्ट की रिपोर्ट में अक्सर हाई कोलेस्ट्रॉल आ सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोलेस्ट्रॉल का लेवल सिर्फ खाने से तय नहीं होता। शरीर खुद भी कोलेस्ट्रॉल बनाता है। जिन लोगों की शारीरिक गतिविधि कम है, वजन अधिक है, धूम्रपान करते हैं और कुछ लोगों में आनुवंशिक कारण भी बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

इसलिए अगर आपकी रिपोर्ट में बार-बार कोलेस्ट्रॉल बढ़ा आ रहा है तो सिर्फ यह सोचकर निश्चिंत न हो जाएं कि खाना तो घर का है? आइए उन कारणों को जान लेते हैं जिनसे साइलेंटली कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का जोखिम हो सकता है?
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कोलेस्ट्रॉल से दिल को खतरा - फोटो : freepik.com
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोलेस्ट्रॉल की समस्या के पीछे आनुवांशिकता बड़ा कारण हो सकती है। अगर आपके परिवार में पहले से हाई कोलेस्ट्रॉल की हिस्ट्री रही है तो इस नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है।
 
  • अगर परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक, स्ट्रोक या कोलेस्ट्रॉल का इतिहास है तो डॉक्टर से इसके बारे में बात करें है।
  • ऐसे मामलों में केवल डाइट से कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करना हमेशा संभव नहीं होता और कई लोगों को डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से दवा की जरूरत भी हो सकती है।
  • अगर खान-पान ठीक होने के बावजूद बैड कोलेस्ट्रॉल लगातार बहुत ज्यादा आ रहा है, तो सिर्फ अपनी डाइट को दोष देना सही नहीं। 
  • आपके आनुवंशिक कारक भी कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
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ज्यादा घी खाना भी ठीक नहीं - फोटो : Adobe Stock
घी-मक्खन को हेल्दी समझकर ज्यादा लेना बढ़ा सकता है खतरा
 
घी और मक्खन में सैचुरेटेड फैट होता है, जिसकी ज्यादा मात्रा बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकती है। दाल-रोटी, पराठे, सब्जी या नाश्ते में बार-बार घी-मक्खन का इस्तेमाल करने से कुल सैचुरेटेड फैट बढ़ सकता है। इसलिए तेल कम करके घी बढ़ाना भी सही विकल्प नहीं है।
 
  • घी सेहत के लिए अच्छा है पर इसकी मात्रा सीमित रखें।
  • डाइट में असंतृप्त वसा वाली चीजें जैसे नट्स, सीट्स और वनस्पति तेल शामिल करें। 

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डीप फ्राइड फूड्स के नुकसान - फोटो : Freepik.com
घर का तला-भुना खाना भी नुकसानदायक

पूरी-पकौड़े, कचौड़ी, फ्राइड स्नैक्स या बहुत तेल वाली घर की सब्जियां भी आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है। समस्या सिर्फ बाहर के फास्ट फूड की नहीं, बल्कि खाना बनाने के तरीके की भी है। बार-बार तला और ज्यादा तेल वाला भोजन कैलोरी और फैट बढ़ा सकता है, इससे भी दिल की सेहत को खतरा रहता है। अगर आप शारीरिक गतिविधि कम करते हैं तो आपमें जोखिम और भी अधिक हो सकता है।


आहार में फाइबर की कम

अगर खाने में साबुत अनाज, दालें, सब्जियां और फल कम हैं तो इससे भी कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत हो सकती है। 

अगर आप घर के खाने में भी मैदा, सफेद चावल और दूसरे रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें ज्यादा खाते हैं, तो डाइट का संतुलन बिगड़ सकता है। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल के लिए सिर्फ तेल कम करना पर्याप्त नहीं, भोजन में फाइबर बढ़ाना भी जरूरी है। साबुत अनाज, दालें, सब्जियां, फल और ओट्स जैसे चीजें आपके लिए फायदेमंद हो सकती हैं।
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सेडेंटरी लाइफस्टाइल के नुकसान - फोटो : Adobe Stock
व्यायाम नहीं करते हैं तो सावधान

घर का खाना खाने का मतलब यह नहीं कि शारीरिक गतिविधि की जरूरत नहीं है। लंबे समय तक बैठे रहना, वजन बढ़ना और नियमित एक्सरसाइज न करना हृदय स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए डाइट के साथ रोजाना चलना-फिरना और अपनी क्षमता के अनुसार नियमित व्यायाम भी जरूरी है। अगर आप सेंडेटरी लाइफस्टाइल का शिकार हैं तो ये स्थिति भी ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाली हो सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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