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Alert: जेन-जी को सता रहा इन पांच बीमारियों का खतरा, हो जाएं अलर्ट वरना जीवन भर खानी पड़ सकती हैं दवाएं

Sat, 17 Jan 2026 08:13 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जेन-जी पीढ़ी खुद को पहले से ज्यादा स्मार्ट, टेक-सेवी और फास्ट लाइफ जीने वाली मानती है, लेकिन इसी तेज रफ्तार जिंदगी के बीच सेहत से जुड़ा एक बड़ा खतरा चुपचाप बढ़ता जा रहा है।
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युवाओं और बच्चों में होने वाली बीमारियां - फोटो : Freepik.com
लाइफस्टाइल और आहार की गड़बड़ी ने कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। लिहाजा हाई कोलेस्ट्रॉल हो या ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दिल की बीमारियां अब काफी आम होती जा रही हैं। आज की जेन-जी पीढ़ी खुद को पहले से ज्यादा स्मार्ट, टेक-फ्रेंडली और फास्ट लाइफ जीने वाली मानती है, लेकिन इसी तेज रफ्तार जिंदगी ने उनमें भी कई तरह की बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ा दिया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप के इस्तेमाल, घंटों बैठे रहकर पढ़ाई या काम करने, जंक फूड पर बढ़ती निर्भरता और नींद की कमी ने युवाओं की सेहत पर गहरा असर डाला है। अगर समय रहते इन आदतों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो कई ऐसी बीमारियां कम उम्र में ही आपक घेर सकती हैं, जिनके लिए जीवनभर दवाइयों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

बाहर से एनर्जेटिक और फिट दिखने वाली जेन-जी वालों में किन स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा अधिक है, उन्हें कितना सावधान रहने की जरूरत है? आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
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बच्चों में अधिक वजन की समस्या - फोटो : Adobe Stock
मेडिकल रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि कभी जो बीमारियां उम्र बढ़ने के साथ जुड़ी मानी जाती थीं, आज वही चुपचाप जेन-जी को भी अपनी चपेट में लेती जा रही हैं। इनमें से कुछ बीमारियां ऐसी भी हैं जिनपर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये गंभीर समस्याओं का कारण, यहां तक कि जानलेवा तक हो सकती हैं।

जेन-जी या जनरेशन जेड, उन युवाओं को कहते हैं जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है, यानी आज के समय में जो लोग 15 से 28 साल के हैं उन्हें जेन-जी कहा जाता है।

मोटापा बढ़ा रही है चिंता

जेन-जी में मोटापा तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित खानपान मोटापे के सबसे बड़े कारण हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  घंटों मोबाइल, लैपटॉप या टीवी के सामने बैठे रहना, जंक फूड्स खाना, मीठे ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा करता है, जो धीरे-धीरे मोटापे में बदल जाता है। मोटापा केवल वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है बल्कि यह डायबिटीज, हार्ट डिजीज और जोड़ों की समस्याओं का खतरा भी बढ़ाता है।
 
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बच्चों में डायबिटीज के मामले - फोटो : Adobe Stock
कम उम्र वालों में बढ़ रही है डायबिटीज की दिक्कत

मेडिकल रिपोर्ट्स बताती हैं कि जेन-जी में डायबिटीज की बीमारी भी तेजी से बढ़ती जा रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार, खराब लाइफस्टाइल और मोटापा युवाओं में डायबिटीज के मुख्य कारण हैं। ज्यादा शुगर, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और फास्ट फूड खाने की आदत शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो सकता है।

डायबिटीज की अगर समय पर पहचान या इलाज न हो पाए तो इससे आंखों, किडनी और दिल की बीमारियों का भी खतरा रहता है। इस बीमारी में पूरे जीवन दवाओं पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

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ब्लड प्रेशर और इसके खतरे - फोटो : Freepik.com
हाई ब्लड प्रेशर की समस्या 

हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर देर से सामने आते हैं और ये समस्या जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जेन-जी में बढ़ती स्ट्रेस की समस्या, नींद की कमी, ज्यादा कैफीन और स्क्रीन टाइम बढ़ने के कारण हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी बढ़ती जा रही हैं।

कम उम्र में हाई बीपी होने से हृदय रोग, मस्तिष्क की बीमारी सहित कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
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मेंटल हेल्थ का रखें ध्यान - फोटो : Freepik.com
जेन-जी में मेंटल हेल्थ की समस्या

जेन-जी में एंग्जायटी और डिप्रेशन के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया का प्रेशर, करियर की प्रतिस्पर्धा, तुलना की भावना और भविष्य को लेकर असुरक्षा ने कम उम्र में ही मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को बढ़ा दिया है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं युवाओं में कार्यक्षमता घटने का एक बड़ा कारण बन रही हैं।

इस तरह की दिक्कतों से बचे रहने के लिए विशेषज्ञ  सोशल मीडिया से ब्रेक लेने, नियमित व्यायाम और मेडिटेशन से मानसिक संतुलन बनाए रखने की सलाह देते हैं।
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लिवर की बीमारियों का जोखिम - फोटो : Freepik.com
फैटी लिवर रोग का खतरा

फैटी लिवर की समस्या अब केवल शराब पीने वालों तक सीमित नहीं रही। जेन-जी में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज भी तेजी से बढ़ रहा है। जंक फूड्स, मीठी चीजों का अधिक सेवन करने के साथ शारीरिक गतिविधियों में कमी को इसका कारण माना जाता है। तली-भुनी चीजों से परहेज करना और नियमित व्यायाम इस रोग से बचाव के लिए सबसे जरूरी माना जाता है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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