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Kidney Disease: किडनी की दुश्मन हैं ये चार चीजें, नजरअंदाज करना सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक

Fri, 22 Aug 2025 08:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी के चलते आज के समय में किडनी की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है।
  • सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि किडनी रोग अक्सर बिना किसी शुरुआती लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ते हैं और जब तक मरीज को पता चलता है, तब तक नुकसान काफी हद तक हो चुका होता है।
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किडनी की बीमारियों का खतरा - फोटो : Adobe stock
Kidney Disease: शरीर को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो किडनी की सेहत पर ध्यान देना बहुत आवश्यक हो जाता है। हमारे शरीर के लिए किडनी एक फिल्टर के रूप में काम करती है। हर दिन हमारी किडनी लगभग 50 गैलन खून साफ करती है, अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालती है और शरीर में पानी व खनिजों का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। अब अगर इसमें किसी प्रकार की दिक्कत हो जाए तो संपूर्ण स्वास्थ्य पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है।

लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी के चलते आज के समय में किडनी की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि किडनी रोग अक्सर बिना किसी शुरुआती लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ते हैं और जब तक मरीज को पता चलता है, तब तक नुकसान काफी हद तक हो चुका होता है। शुरुआती चरणों के दौरान, 10 में से नौ लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें यह बीमारी है। 

अगर किडनी की बीमारी का समय रहते पता चल जाए और उसका सही तरीके से इलाज हो जाए, तो गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। आइए जानते हैं कि वो कौन सी चार स्थितियां हैं जो किडनी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं, जिनपर ध्यान देकर किडनी को बीमारियों से बचाया जा सकता है।
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डायबिटीज के कारण किडनी की समस्या - फोटो : Freepik.com
ब्लड शुगर हाई रहना खतरनाक

डायबिटीज किडनी रोग का सबसे बड़ा कारण है। जब शरीर में शुगर का लेवल लंबे समय तक सामान्य से अधिक बना रहता है तो इससे किडनी की छोटी-छोटी रक्त नलिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है। इससे किडनी को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिल पाता और किडनी का सामान्य कार्य बाधित हो जाता है। 

नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, लगभग 40% किडनी फेल होने के मामले डायबिटीज से जुड़े हैं। डायबिटीज रोगियों में क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा सामान्य लोगों से 3 गुना ज्यादा है। अगर ब्लड शुगर को नियंत्रित न किया जाए तो इससे डायबिटिक नेफ्रोपैथी नामक स्थिति विकसित हो जाती है, जो जानलेवा भी हो सकती है।
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दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सावधानी जरूरी - फोटो : Freepik.com
अत्यधिक पेनकिलर का सेवन

लंबे समय तक पेनकिलर या कुछ एंटीबायोटिक्स का उपयोग भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक बिना डॉक्टरी सलाह के पेनकिलर लेने वाले लोगों में किडनी डैमेज का खतरा 5 गुना तक बढ़ जाता है। इन दवाओं से किडनी की रक्त आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे नेफ्रोटॉक्सिसिटी हो सकती है।

साल 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि लगभग 15-18% एक्यूट किडनी इंजरी के केस दवाओं के अधिक सेवन से जुड़े होते हैं।

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तंबाकू-धूम्रपान का किडनी पर असर - फोटो : Freepik.com
धूम्रपान की आदत खतरनाक

धूम्रपान का नकारात्मक असर संपूर्ण स्वास्थ्य पर हो सकता है, पर इस आदत के कारण किडनी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है। धूम्रपान आपके दिल और रक्त वाहिकाओं (कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम) को नुकसान पहुंचती है, जिससे किडनी में रक्त का प्रवाह बाधित हो सकता है। रक्त प्रवाह में होने वाली समस्याओं का जोखिम किडनी की सेहत के लिए भी बहुत हानिकारक माना जाता है।

किडनी सहित संपूर्ण सेहत को ठीक रखने के लिए धूम्रपान से दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती है।
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हाई ब्लड प्रेशर और किडनी की बीमारी - फोटो : Freepik.com
ब्लड प्रेशर बढ़ा रहना नुकसानदायक

कई अध्ययनों में इस बात को लेकर चिंता जताई जाती रही है कि युवा आबादी में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ती जा रही है। समय के साथ उच्च रक्तचाप आपके पूरे शरीर में रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है, इससे किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों में रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है।

उच्च रक्तचाप के कारण आपकी किडनी में मौजूद छोटी फिल्टरिंग इकाइयां भी क्षतिग्रस्त होने लग जाती हैं जिससे किडनी का सामान्य कार्य बाधित होने लगता है। रक्त से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालने में होने वाली समस्या संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। 


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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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