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Health Tips: लंबे समय तक ईयरफोन लगाना बढ़ा सकता है बहरेपन का जोखिम, जानें दिनभर में कितनी देर लगाना सुरक्षित

Fri, 17 Oct 2025 06:49 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • आज के समय में बहुत से लोग ईयरफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम है कि देर तक इसका इस्तेमाल करना कानों के लिए नुकसानदायक है।
  • कुछ लोगों के दिमाग में ये भी सवाल होता है कि ईयरफोन और हेडफोन में से कौन-सा हमारे कानों के बेस्ट होता है? आइए इन्हीं सवालों का जवाब जानते हैं।
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देर तक हेडफोन सुनने से क्या होता है? - फोटो : Amar Ujala
Disadvantages of Wearing Earphones: आज की आधुनिक दुनिया में ईयरफोन या हेडफोन हमारी दिनचर्या का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। चाहे संगीत सुनना हो, पॉडकास्ट देखना हो, या घंटों तक ऑनलाइन मीटिंग करना हो, ईयरफोन का इस्तेमाल अब महज सुविधा नहीं, बल्कि एक जरूरत बन गया है। लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ईयरफोन का लंबे समय तक और तेज आवाज में इस्तेमाल आपकी सुनने की क्षमता के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। इस समस्या को नॉइस इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस (एनआईएचएल) कहा जाता है।

ईयरफोन सीधे कान के पर्दे के करीब ध्वनि तरंगें भेजते हैं, जिससे कान के अंदर की संवेदनशील कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। एक बार क्षतिग्रस्त होने पर, ये कोशिकाएं ठीक नहीं होतीं, और यही स्थायी बहरापन या टिनिटस (कान में लगातार घंटियों की आवाज) का कारण बन सकता है। यह जोखिम अब किसी एक उम्र समूह तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसलिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि आप अपने कानों को सुरक्षित रखने के लिए दिनभर में ईयरफोन का इस्तेमाल कितनी देर और किस वाल्यूम पर कर करें।
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इयरफोन - फोटो : Freepik.com
सुरक्षित सुनने की सीमा और 60/60 नियम
स्वास्थ्य विशेषज्ञ '60/60 नियम' का पालन करने की सलाह देते हैं। इसका अर्थ है कि आपको ईयरफोन का इस्तेमाल अपने डिवाइस की अधिकतम आवाज के 60% से ज्यादा नहीं करना चाहिए, और इसे लगातार 60 मिनट से ज्यादा नहीं लगाना चाहिए। 60 मिनट के बाद कानों को कम से कम 5-10 मिनट का ब्रेक देना जरूरी है। विषेशज्ञ सुझाव देते हैं कि दिनभर में 2 घंटे से ज्यादा ईयरफोन का उपयोग कानों से संबंधित बिमारियों के खतरे को बढ़ा देता है। लंबे समय तक 85 डेसिबल से ऊपर की आवाज सुनना कानों के लिए नुकसानदेह होता है।

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इयरफोन - फोटो : Freepik.com
कान कैसे होते हैं क्षतिग्रस्त?
हमारे अंदरूनी कान में कॉक्लिया नामक संरचना होती है, जिसमें बाल जैसी छोटी संवेदनशील कोशिकाएं होती हैं। ये कोशिकाएं ध्वनि तरंगों को तंत्रिका संकेतों में बदलकर दिमाग तक भेजती हैं। जब ईयरफोन से लगातार तेज आवाज आती है, तो ये कोशिकाएं अत्यधिक कंपन के कारण स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।

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इयरफोन - फोटो : Freepik.com
बहरेपन के शुरुआती लक्षण
ईयरफोन के कारण होने वाले बहरेपन के शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है। इनमें सबसे प्रमुख है टिनिटस यानी कानों में लगातार घंटी बजने या सनसनाहट की आवाज आना। अन्य लक्षणों में सामान्य बातचीत सुनने में कठिनाई, या लोगों को बार-बार अपनी बात दोहराने के लिए कहना शामिल है। इन संकेतों को तुरंत गंभीरता से लें।
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हेडफोन का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित - फोटो : Freepik.com
बचाव के लिए अपनाएं ये आदतें
सुरक्षित रहने के लिए, ईयरफोन के बजाय ओवर-द-ईयर हेडफोन का इस्तेमाल करें, जो कान के पर्दे से थोड़ी दूरी बनाए रखते हैं। ओवर-द-ईयर हेडफोन का अर्थ है कि हेडफोन कान के ऊपर रखे जाते हैं और एक बड़े, गोल पैड की मदद से आपके पूरे कान को चारों ओर से कवर कर लेते हैं। नॉइज कैंसिलिंग हेडफोन का उपयोग करें, ताकि बाहरी शोर को दबाने के लिए आपको आवाज को तेज न करना पड़े।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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