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Diabetes: डायबिटीज का सता रहा है डर? डॉक्टर ने बताया शुगर कंट्रोल करने का आसान तरीका वो भी एकदम फ्री

Tue, 03 Feb 2026 09:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डायबिटीज में सबसे बड़ी समस्या खाना खाने के बाद तेजी से शुगर बढ़ने की होती है। अगर आप भी डायबिटीज को नेचुरली कंट्रोल करना चाहते हैं, तो इसके लिए वरिष्ठ चिकित्सक ने एक आसान सा तरीका बताया है, जिससे आपको विशेष लाभ मिल सकता है।
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शुगर को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है? - फोटो : Freepik.com

हाई ब्लड शुगर यानी डायबिटीज की समस्या लोगों में काफी आम होती जा रही है। ये बीमारी तब होती है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन हार्मोन नहीं बना पाता या  बनी हुई इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता।  इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है, जो खून में मौजूद शुगर को कोशिकाओं तक पहुंचाकर एनर्जी में बदलता है। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ जाता है।

कुछ दशकों पहले तक माना जाता था कि ये बीमारी सिर्फ उम्रदराज लोगों को होती है, हालांकि समय के साथ कम उम्र के लोग यहां तक कि बच्चे भी इसका शिकार होते जा रहे हैं जिसको लेकर दुनियाभर के विशेषज्ञ चिंतित हैं।

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनियाभर में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और भारत को “डायबिटीज कैपिटल” तक कहा जाने लगा है। यह बीमारी अगर समय रहते कंट्रोल न की जाए, तो शरीर के कई अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

अब सवाल ये है कि इसे कंट्रोल कैसे किया जाए?

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शुगर को कैसे कंट्रोल रखा जाए? - फोटो : Freepik.com
शुगर कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर ने बताया तरीका

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो डाइट, लाइफस्टाइल में बदलाव और मुश्किल वर्कआउट जैसे तमाम उपाय करके थक चुके हैं पर शुगर कंट्रोल ही नहीं रह रहा?

अगर हां, तो एम्स, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में सेवा दे चुके वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने इसका बहुत ही कारगर तरीका बताया है। डॉ सेठी कहते हैं, लाइफस्टाइल में बदलाव की ये छोटी से आदत आपको बिना ज्यादा परेशान हुए ब्लड शुगर कम करने में मददगार हो सकती है। इस एक आदत से न सिर्फ आपका शुगर लेवल कंट्रोल में आने लगता है साथ ही आंतों और लिवर की सेहत भी तेजी से बेहतर होने लग जाती है।
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नियमित वॉक करने के क्या फायदे हैं? - फोटो : adobe stock images
भोजन के बाद 10 मिनट वॉक

डॉ सौरभ कहते हैं, ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने का सबसे अच्छा तरीका है, भोजन के बाद 10 मिनट वॉक करने की आदत बनाना। 

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज के साथ प्रीडायबिटीज, फैटी लिवर, इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ने, पेट की चर्बी जैसी समस्याओं को कम करने में भी इस आदत से आपको लाभ मिल सकता है। हमारे पैरों की मांसपेशियां स्पंज की तरह काम करती हैं। जब वे हिलती हैं, तो सीधे आपके खून से ग्लूकोज खींचती हैं। खून में ग्लूकोज कम होने का मतलब है कम इंसुलिन रिलीज होना।  डॉक्टर के अनुसार, इंसुलिन कम रिलीज होने से लिवर में फैट भी कम होता है जिससे फैटी लिवर की समस्या दूर होती है।

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वॉक करने से क्या लाभ होता है? - फोटो : AI Generated
खाने के बाद वॉक करने से कई तरह के लाभ

डॉ सेठी बताते हैं, खाना खाने के बाद 10 मिनट चलने की आदत बनाने से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव कम होता है क्योंकि मांसपेशियां शरीर को एनर्जी देने के लिए ग्लूकोज का इस्तेमाल करती हैं।
 
  • इंसुलिन का लेवल कम होने का मतलब है कि शरीर की कोशिकाएं इसके प्रति ज्यादा रिस्पॉन्सिव हो जाती हैं।
  • इस एक आदत से लिवर में फैट कम जमा होता है क्योंकि शारीरिक गतिविधि से पाचन को बढ़ावा मिलता है।
  • आपकी एनर्जी शरीर के मेटाबॉलिज्म में इस्तेमाल हो जाती है इसलिए पेट की चर्बी कम होती है। 
  • ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहने से पूरे दिन शुगर बढ़ने की दिक्कत कम होती है।
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शुगर को कैसे नियंत्रित रखें? - फोटो : Adobe Stock
शुगर कंट्रोल रखने के लिए ये बातें भी जान लीजिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है। लाइफस्टाइल में सुधार करके आप शुगर लेवल को बढ़ने से रोक सकते हैं। 
  • संतुलित आहार जिसमें फाइबर की भरपूर मात्रा हो, साबुत अनाज, हरी सब्जियां और प्रोटीन वाली चीजें डायबिटीज को बढ़ने से रोकने में मदद करती हैं।
  • इसके साथ ही वजन को कंट्रोल में रखना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव कम करना भी बेहद जरूरी है। 
  • समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच और डॉक्टर की सलाह से दवा लेना डायबिटीज से होने वाली जटिलताओं को रोकने में अहम भूमिका निभाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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