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Health Alert: ब्रेन और हार्ट पर डबल अटैक, इस विटामिन की कमी गंभीर रोगों का बढ़ा सकती है खतरा

Mon, 22 Sep 2025 07:29 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • भारत में विटामिन बी12 की कमी बहुत आम है। विटामिन बी12 मुख्य रूप से नॉन-वेजिटेरियन भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा, डेयरी प्रोडक्ट्स में पाया जाता है। ऐसे में शाकाहारी लोगों में इसकी कमी का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। 
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विटामिन की कमी से होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe stock
Vitamin B12 Deficiency: हम अक्सर सोचते हैं कि शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए बस प्रोटीन, कैल्शियम या आयरन ही जरूरी है। लेकिन हकीकत ये है कि कुछ विटामिन्स ऐसे होते हैं जो चुपचाप अपना काम करते हैं पर जब उनकी कमी होती है तो शरीर धीरे-धीरे कई बीमारियों का घर बन जाता है। विटामिन बी12 ऐसा ही एक विटामिन है जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत आवश्यक है।

शोध बताते हैं कि भारत में आधे से ज्यादा लोग बी12 की कमी से जूझ रहे हैं। खानपान में गड़बड़ी को इसका प्रमख कारण माना जाता है। चूंकि विटामिन बी12 मुख्यरूप से मांस, मछली, अंडा और दूध से मिलने वाला विटामिन है, ऐसे में जो लोग शाकाहारी हैं उनमें इसकी कमी होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। 

अध्ययनों से पता चलता है कि इस विटामिन की कमी थकान, सुस्ती, भूलने की बीमारी और यहां तक कि हार्ट अटैक खतरे को भी कई गुना तक बढ़ाने वाली हो सकती है।
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विटामिन बी-12 की कमी - फोटो : Adobe Stock
विटामिन बी12 सेहत के लिए बहुत जरूरी

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, विटामिन बी12 कोई साधारण पोषक तत्व नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत आवश्यक है। अगर आप हमेशा थका-थका महसूस करते हैं, दिमाग कमजोर लगने लगा है या दिल की धड़कन को लेकर परेशान हैं, तो इसका एक बड़ा कारण विटामिन बी12 की कमी भी हो सकती है।

दिमाग और नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखने में इस विटामिन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये हमारे शरीर में खुद से नहीं बनता। इसे हमें बाहर से भोजन या सप्लीमेंट्स के जरिए लेना होता है। 

लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करना इस विटामिन का सबसे महत्वपूर्ण काम है जो शरीर में हर हिस्से तक सही तरीके से ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करती है। अगर आपमें इसकी कमी हो जाए  एनीमिया होने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
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विटामिन बी-12 सेहत के लिए जरूरी - फोटो : Freepik.com
भारतीय लोगों में विटामिन B12 की कमी

भारत में विटामिन बी12 की कमी बहुत आम है। विटामिन बी12 मुख्य रूप से नॉन-वेजिटेरियन भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा, डेयरी प्रोडक्ट्स में पाया जाता है। ऐसे में शाकाहारी लोगों में इसकी कमी का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। पेट से जुड़ी समस्याएं भी इस विटामिन की कमी का कारण बन सकती हैं। एसिडिटी, गैस्ट्राइटिस और आंतों की बीमारियों के शिकार लोगों में इस विटामिन का अवशोषण कम हो जाता है।

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हृदय रोग-हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : Adobe stock photos
विटामिन बी-12 की कमी से हृदय रोगों का खतरा

अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों में विटामिन बी-12 की कमी होती है, उनमें हृदय रोगों का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। 

आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट ब्लॉकेज की बात आते ही ज्यादातर लोग डाइट, तनाव, नींद और एक्सरसाइज की कमी को ही वजह मानते हैं। लेकिन विटामिन बी12 की कमी भी इसका एक कारण हो सकती है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एकेडमिक मेडिसिन एंड फार्मेसी की रिपोर्ट कहती है कि जब शरीर में बी12 का स्तर कम होता है तो इसके कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।

विटामिन बी12 शरीर में होमोसिस्टीन नामक अमीनो एसिड को तोड़ने का काम करता है। जब यह टूटता नहीं है तो खून गाढ़ा होने लगता है। नतीजतन खून के थक्के और ब्लॉकेज बनने लगते हैं। लगातार ऐसा होने पर एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में प्लाक जमने) का खतरा हो सकता है। 
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विटामिन-बी 12 की कमी से होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
विटामिन बी12 की कमी से होने वाली दिक्कतें 

शरीर में विटामिन बी12 कम होने पर और भी कई समस्याएं हो सकती है। 
  • इस विटामिन की कमी हाथ-पैर में झुनझुनी, सुन्नपन, मांसपेशियों में कमजोरी का कारण बनती है।  
  • विटामिन बी12 की कमी से बच्चों और गर्भवती महिलाओं में भी खतरा ज्यादा होता है। गर्भवती महिला में इसकी कमी होने पर बच्चे में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट जैसी जन्मजात बीमारियां हो सकती हैं। बच्चों में यह कमी होने पर उनका विकास रुक सकता है और पढ़ाई में ध्यान नहीं लग पाता।
  • विटामिन बी12 की कमी से इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है और बार-बार संक्रामक रोगों का खतरा हो सकता है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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