कैंसर के जोखिमों को लेकर अध्ययन
- फोटो : Adobe Stock Images
एपस्टीन-बार वायरस से ब्लड कैंसर
एपस्टीन-बार वायरस यानी ईबीवी बहुत आम वायरस है और दुनिया के ज्यादातर लोग जीवन में कभी न कभी इससे संक्रमित होते हैं। ज्यादातर लोगों में इससे कैंसर नहीं होता।
- हालांकि ईबीवी कुछ लोगों में लिम्फोमा और नाक-गले से जुड़े कुछ कैंसर के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है।
- इस वायरस से बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन या खाने की चीजें साझा करने से बचें और हाथ धोने का आदत बनाना जरूरी है।
दुर्लभ वायरस भी हो सकते हैं कैंसर का कारण
एचटीएलवी-1 या ह्यूमन टी-लिम्फोट्रोपिक वायरस टाइप-1, एक प्रकार का रेट्रोवायरस है जो मुख्य रूप से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण श्वेत रक्त कोशिकाओं (टी-कोशिकाओं) को संक्रमित करता है। कुछ लोगों में ये एडल्ट टी-सेल ल्यूकेमिया का कारण बन सकता है। वहीं एचएचवी-8 या कपोसी सारकोमा से जुड़ा हर्पीस वायरस कपोसी सारकोमा समेत कुछ दुर्लभ कैंसर से जुड़ा पाया गया है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।