कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए विशेषज्ञ वैक्सीनेशन को ही सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं। कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार भले ही धीमी हो रही है, लेकिन तीसरी लहर की आशंका अब भी लोगों को खासा परेशान कर रही है। कई रिपोर्टंस में दावा किया जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए ज्यादा समस्याएं पैदा कर सकती है। इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना की तीसरी में बच्चों को लेकर चिंता करने का मुख्य कारण है कि देश में फिलहाल बच्चों को कोरोना की वैक्सीन नहीं दी जा रही है। तीसरी लहर और कोरोना के अन्य वेरिएंट्स के आते-आते देश में 18 साल के ऊपर के ज्यादातर लोगों का टीकाकरण हो चुका होगा, ऐसे में जिन लोगों को वैक्सीन नहीं लगी होगी, उनमें संक्रमण का खतरा स्वाभाविक रूप से ज्यादा होगा।
इसी संभावित डर को दूर करने और बच्चों को भी कोरोना से सुरक्षित करने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने सोमवार (7 जून) से 12 से 18 साल के बच्चों में कोवैक्सीन का ट्रायल शुरू कर दिया है। एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया का कहना है कि संभवत: सितंबर तक बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी। आइए इस लेख में जानते हैं देश में फिलहाल किन लोगों को वैक्सीनेशन कराने की अनुमति नहीं मिली है?
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गर्भवती महिलाओं का वैक्सीनेशन (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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गर्भवती महिलाओं को वैक्सीनेशन नहीं करनी चाहिए
कोरोना वैक्सीनेशन के मौजूदा प्रोटोकॉल में गर्भवती महिलाओं को वैक्सीनेशन न कराने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि गर्भवती पर टीकों का परीक्षण नहीं किया गया है, ऐसे में फिलहाल इन महिलाओं को टीकाकरण नहीं कराना चाहिए। हालांकि स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता कांत कहती हैं कि कोविड की दूसरी लहर में संक्रमण के कारण हमने कई गर्भवती और गर्भ में पल रहे शिशुओं के मौत के मामले देखे हैं। महिलाओं में इस तरह के खतरे को कम करने के लिए उनका वैक्सीनेशन आवश्यक है। अब तक के अध्ययनों में वैक्सीन से किसी प्रकार के खतरे का जिक्र नहीं है। अगर एक वैक्सीन से दो की जान (गर्भवती और बच्चे) बचाई जा सकती है तो इससे बेहतर और क्या होगा?
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स्तनपान कराने वाली महिलाओं का टीकाकरण
- फोटो : Social media
स्तनपान कराने वाली महिलाओं का टीकाकरण
भारत सराकर ने हाल ही में स्तनपान कराने वाली महिलाओं को टीकाकरण कराने की अनुमति दे दी है। इस संबंध में नीति आयोग (स्वास्थ्य) के सदस्य वीके पॉल ने बताया कि स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी टीकाकरण करा सकती हैं, साथ ही टीकाकरण के बाद भी शिशु को स्तनपान कराती रहें। किसी भी स्थिति में स्तनपान को रोका नहीं जाना चाहिए। टीकाकरण के बाद स्तनपान कराने से शिशु को कोई दिक्कत नहीं होती है।
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कोविड से ठीक होने के बाद वैक्सीनेशन
- फोटो : Social media
कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद वैक्सीनेशन
सेंटर फोर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कोरोना संक्रमण से ठीक होकर लौट चुके लोगों को संक्रमण वाले दिन से तीन महीने के बाद ही टीकाकरण कराना चाहिए। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) में प्रतिरक्षा वैज्ञानिक डॉक्टर विनीता बल का कहती हैं कि संक्रमण के बाद शरीर में बनी इम्यूनिटी कुछ महीनों तक सक्रिय रहती है, ऐसे में ठीक होने के 6-8 सप्ताह के बाद ही ऐसे लोगों को वैक्सीनेशन कराना चाहिए।
क्या मासिक धर्म के दौरान वैक्सीनेशन नहीं कराना चाहिए?
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कोविड वैक्सीन को पीरियड्स के समय में भी बिना झिझक के लगवाया जा सकता है। मासिक धर्म और वैक्सीन के दुष्प्रभावों का काई संबंध नहीं है। स्मार्ट बनें और टीकाकरण जरूर कराएं।
------- नोट: यह लेख भारत सरकार और तमाम स्वास्थ्य संगठनों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है। देश में कोविड वैक्सीनेशन प्रोटोकॉल को इस खबर का आधार बनाया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।