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Typhoid in Monsoon: बरसात के दिनों में टाइफाइड का बढ़ जाता है खतरा, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

Sat, 12 Sep 2026 05:11 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव यशा माथुर, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बारिश के मौसम में दूषित पानी और संक्रमित भोजन से टाइफाइड का खतरा बढ़ सकता है। जानिए टाइफाइड के शुरुआती लक्षण, बचाव के आसान उपाय और कब चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।
 
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मानसून के दिनों में टाइफाइड का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
अगर आपको लगातार या लंबे समय तक रहने वाले तेज बुखार के साथ थकान, कमजोरी, सिर दर्द, भूख कम लगना, जी मिचलाना और पेट में दर्द हो रहा है, कब्ज या दस्त की शिकायत हो रही है या फिर त्वचा पर हल्के गुलाबी रंग के दाने दिखाई देने लगे हैं, तो आपको टायफाइड हो सकता है। असल में, टायफाइड साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है, जो आपको कमजोर कर देता है।

टायफाइड में घबराने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह, निर्धारित उपचार, पर्याप्त आराम, सुरक्षित तरल पदार्थ और संतुलित भोजन पर ध्यान देना चाहिए। टायफाइड होने पर शरीर कमजोर हो जाता है। ऐसे में आपको आराम की जरूरत होती है। इसलिए डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का सही समय पर सेवन करें।
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टाइफाइड बुखार की समस्या - फोटो : Adobe Stock
हर बुखार टायफाइड नहीं

टायफाइड के लक्षण कई अन्य संक्रमणों से मिलते-जुलते होते हैं, मगर केवल लक्षणों के आधार पर इसे टायफाइड मान लेना या अपने मन से दवा शुरू कर देना ठीक नहीं है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखकर इसका इलाज करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, टायफाइड की पुष्टि के लिए रक्त जांच सबसे महत्वपूर्ण है, इसके बाद ही टायफाइड की पुष्टि होती है।
 
  • इस बीमारी में शरीर को ऊर्जा और पोषण की जरूरत होती है। हालांकि तेज बुखार, मितली या पेट की परेशानी में भूख कम लग सकती है।
  • ऐसे में अधिक भोजन करने के बजाय अपनी सहनशीलता के अनुसार हल्का और पौष्टिक भोजन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेना बेहतर रहता है।
  • लगातार उल्टी हो, खाना-पानी न टिक रहा हो या कमजोरी बढ़ रही हो, तो डॉक्टर की सलाह से आहार लेना शुरू करें।

टायफाइड कितने दिन रहता है?

अगर तुरंत उपचार शुरू हो जाए तो यह आम तौर पर बुखार 10 दिनों तक रहता है, लेकिन उपचार में देरी होने पर 3-4 सप्ताह या उससे अधिक समय तक रह सकता है। इस दौरान टायफाइड के लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं और आपको अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

केवल बुखार का उतर जाना संक्रमण पूरी तरह खत्म होने का परिणाम नहीं होता है। इसलिए डॉक्टर ने जितने दिनों के लिए दवाएं लिखी हैं, उनका पूरा कोर्स करना जरूरी है। बीच में दवा छोड़ने से संक्रमण दोबारा होने और बुखार की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए दवाओं की डोज पूरी करें।
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टाइफाइड से बचाव के लिए वैक्सीन - फोटो : Freepik.com
विशेषज्ञ की राय : कब लगवाएं टायफाइड का टीका

डॉ. प्रभाकर भूषण मिश्रा (वरिष्ठ चिकित्सक) बताते हैं कि टायफाइड में हाइड्रेशन सबसे जरूरी है, इसलिए साफ उबला हुआ पानी, ओआरएस, नारियल पानी, दाल का पानी या पतली छाछ लेते रहें। टायफाइड में छोटी आंत के अंदर घाव-सा हो सकता है, इसलिए हल्का, जल्दी पचने वाला भोजन लें। सही इलाज से टायफाइड 7-14 दिन में ठीक हो जाता है। यदि मरीज ने दवाओं का कोर्स पूरा नहीं किया तो बीमारी लौट सकती है। आप ठीक होने के बाद टायफाइड का टीका लगवा सकते हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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