Types of Monsoon Skin Infection: बारिश के मौसम में बढ़ी नमी, उमस, पसीना और गीले कपड़ों के कारण दाद और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आइए जानते हैं।
Types of Monsoon Skin Infection: बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं त्वचा से जुड़ी कई परेशानियां भी बढ़ा देता है। खासकर दाद, खाज और खुजली की शिकायत इस दौरान काफी परेशान कर सकती है। लेकिन क्या दाद, खाज और खुजली तीन अलग-अलग बीमारियां हैं?
दरअसल, इन शब्दों का इस्तेमाल आम बोलचाल में अक्सर एक-दूसरे के लिए कर दिया जाता है, जबकि इनके कारण और लक्षण अलग हो सकते हैं। बारिश में बढ़ी नमी, पसीना, गीले कपड़े और लंबे समय तक नम रहने वाली त्वचा फंगस को बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल देती है। ऐसे में दाद, खाज और खुजली के बीच अंतर समझना और समय रहते सही देखभाल करना जरूरी हो जाता है। आइए इस बारे में आपको डिटेल में जानकारी देते हैं।
विज्ञापन
2 of 6
बारिश में दाद और खुजली से कैसे बचें?
- फोटो : AI
दाद, खाज और खुजली में क्या फर्क है?
दाद क्या होता है?
दाद को आमतौर पर फंगल इंफेक्शन या रिंगवर्म के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें त्वचा पर गोल या चकत्तेनुमा लाल निशान दिखाई दे सकते हैं। कई बार चकत्ते के किनारे ज्यादा लाल या उभरे हुए होते हैं और इनमें तेज खुजली हो सकती है। यह शरीर के अलग-अलग हिस्सों में हो सकता है और संपर्क के जरिए फैल भी सकता है।
विज्ञापन
3 of 6
बारिश में दाद और खुजली से कैसे बचें?
- फोटो : AI
खाज क्या है?
खाज आम बोलचाल में खुजली या खुजली वाली त्वचा की समस्या के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है। अलग-अलग जगहों पर इसका मतलब अलग तरीके से लिया जाता है। इसलिए केवल खाज होने की बात से यह तय नहीं किया जा सकता कि समस्या फंगल इंफेक्शन की है। इसके पीछे एलर्जी, फंगल संक्रमण, त्वचा में जलन या दूसरी वजहें हो सकती हैं।
4 of 6
बारिश में दाद और खुजली से कैसे बचें?
- फोटो : AI
खुजली क्या है?
खुजली खुद कोई बीमारी नहीं बल्कि एक लक्षण है। एलर्जी, ड्राई स्किन, पसीना, फंगल इंफेक्शन, कीड़े के काटने और कई अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं के कारण खुजली हो सकती है। इसलिए हर तरह की खुजली को दाद समझना सही नहीं है।
विज्ञापन
5 of 6
बारिश में दाद और खुजली से कैसे बचें?
- फोटो : AI
बारिश के मौसम में दाद और खुजली क्यों बढ़ जाती है?
बारिश के मौसम में वातावरण में नमी और उमस बढ़ जाती है। इससे त्वचा लंबे समय तक नम रह सकती है। पसीना भी जल्दी नहीं सूखता और शरीर के उन हिस्सों में नमी जमा हो सकती है जहां त्वचा आपस में जुड़ी रहती है, जैसे बगल, कमर, जांघों के बीच और पैरों की उंगलियों के बीच।
गीले कपड़े, मोजे और जूते लंबे समय तक पहनने से भी त्वचा पर नमी बनी रहती है। गर्म और नम वातावरण फंगस के पनपने के लिए अनुकूल होता है। यही वजह है कि मानसून के दौरान फंगल स्किन इंफेक्शन की समस्या ज्यादा देखने को मिल सकती है।
बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदलें। शरीर को अच्छी तरह सुखाएं और खासकर कमर, बगल, जांघों के बीच और पैरों की उंगलियों के बीच नमी न रहने दें। रोज साफ और सूखे मोजे पहनें। गीले जूते लंबे समय तक न पहनें। बहुत ज्यादा टाइट कपड़े पहनने से बचें।
दूसरों के तौलिया, कपड़े, मोजे या व्यक्तिगत सामान का इस्तेमाल न करें। अगर त्वचा पर गोल चकत्ते लगातार बढ़ रहे हैं, खुजली बहुत ज्यादा है या समस्या बार-बार हो रही है तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी क्रीम का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए जिसमें स्टेरॉयड शामिल हो, क्योंकि गलत इस्तेमाल से फंगल इंफेक्शन बिगड़ सकता है या उसके लक्षण बदल सकते हैं।
--------------------------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।