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Golden Milk: भारत के इस घरेलू उपचार की कैलिफोर्निया से पेरिस तक बढ़ी मांग, पेट की दिक्कतों में असरदार

Mon, 27 Jul 2026 03:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत का पारंपरिक हल्दी वाला दूध अब दुनिया भर में लोकप्रिय हो रहा है। कैलिफोर्निया और पेरिस जैसे शहरों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इसके पीछे वेलनेस ट्रेंड, प्लांट-बेस्ड ड्रिंक्स और पारंपरिक भारतीय पेय के प्रति बढ़ती रुचि प्रमुख कारण हैं। 
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हल्दी वाला दूध - फोटो : Adobe stock
हमारी किचन में कई औषधियों का रोजाना मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। आयुर्वेद के साथ-साथ मेडिकल साइंस ने भी इनके फायदों की पुष्टि की है। पारंपरिक उपचार पद्धति में कई दशकों से हल्दी वाले दूध का सेवन किया जाता रहा है। शरीर में दर्द को कम करना हो या फिर इंफ्लेमेशन से बचना और इम्युनिटी बढ़ाना, इन सभी के लिए हल्दी वाले दूध को फायदेमंद माना जाता रहा है।   

भारतीय रसोई का अहम हिस्सा और सदियों पुराना घरेलू नुस्खा (हल्दी) अब वैश्विक चिकित्सा विज्ञान की कसौटी पर भी खरा उतर रहा है। एक ओर अमेरिका की मेयो क्लीनिक के विशेषज्ञों ने इसे कुदरती विकल्प के रूप में आशाजनक माना है, वहीं कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता डॉ. महताब जाफरी ने इसके गुणों को पहचानने में भारत को सबसे अगुआ बताया। इन शोध रिपोर्टों के बाद अमेरिका से फ्रांस (पेरिस) तक हल्दी दूध का खुमार बढ़ चला है।
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हल्दी वाले दूध के कई फायदे - फोटो : Adobe Stock Images
अब यूरोपीय देशों समेत अमेरिका में भी हल्दी के दूध की सिफारिश वहां के डॉक्टर्स करने लगे हैं। इसलिए इसका चलन काफी बढ़ गया है।

मेयो क्लीनिक के डॉ. ब्रायन लेसी ने बताया कि यह फंक्शनल डिस्पेप्सिया में आशाजनक विकल्प है। पेट की बदहजमी, अपच और गैस के इलाज के लिए कोई एफडीए (अमेरिकी खाद्य-औषधि प्रशासन) स्वीकृत विशेष दवा नहीं है। इसके लिए आमतौर पर ओमेप्राजोल जैसी एंटासिड दवाएं दी जाती हैं, जो केवल 10 में से 1 मरीज पर ही प्रभावी होती हैं।

सूजन और जलन कम करने के गुणों की चर्चा

डॉ. जाफरी ने पुष्टि की कि हल्दी में सूजन, जलन कम करने वाले गुण मौजूद हैं।
 
  • पेट दर्द से जूझ रहे मरीजों को बिना उचित चिकित्सीय जांच के खुद से हल्दी के सप्लीमेंट्स/कैप्सूल का सेवन शुरू नहीं करना चाहिए।
  • डाइटरी सप्लीमेंट्स पर सख्त सरकारी नियमन नहीं होता, इसलिए बाजार में मिलने वाले करक्यूमिन कैप्सूल की गुणवत्ता में भारी अंतर होता है।
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हल्दी वाला दूध - फोटो : Adobe stock
हल्दी दूधमें एंटासिड दवाओं जैसे गुण 

थाईलैंड की चुलालोंगकॉर्न यूनिवर्सिटी में 206 मरीजों पर आठ हफ्तों तक हुए क्लीनिकल ट्रायल में पाया गया कि पेट दर्द, अफारा (ब्लोटिंग), खट्टी डकारें और जलन दूर करने में हल्दी के अर्क ने पारंपरिक एंटासिड दवाओं जैसी ही राहत दी। शोध में बताया गया कि बाजार में करक्यूमिन कैप्सूल या सप्लीमेंट्स में लेड (सीसा) या सॉल्वेंट्स भी हो सकते हैं। अतः घरेलू हल्दी उत्तम है। 

पश्चिमी देशों में स्वास्थ्य-फिटनेस के शौकीनों के बीच भारतीय परंपरा का हल्दी वाला दूध अब गोल्डन मिल्क के नाम से लोकप्रिय हो रहा है। यानी बचपन में कड़वा लगने वाला हल्दी का दूध न्यूयॉर्क और पेरिस के महंगे कैफे की मेन्यू कार्ड की शान बना हुआ है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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