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सेहत की बात: बदल रहे इस मौसम में होने वाली कई बीमारियों से बचाएगी ये घरेलू औषधि, रोजाना सेवन की बनाएं आदत

Tue, 11 Oct 2022 04:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वायरल संक्रमण से बचाव के तरीके - फोटो : istock
उत्तरी भारत के ज्यादातर हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से जारी बारिश के कारण मौसम में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है। तापमान में तेजी से आई गिरावट के कारण ज्यादातर राज्यों में ठंड दस्तक दे चुकी है। एक हफ्ते से लगातार हो रही बारिश ने गर्मी से तो राहत दिला दी है पर इसके कारण कई प्रकार की बीमारियों का खतरा जरूर बढ़ गया है। डॉक्टर्स कहते हैं, मौसम में आया यह बदलाव आपमें सर्दी-जुकाम और बुखार जैसे वायरल संक्रमण का कारण बन सकता है, जिसको लेकर सभी उम्र के लोगों को अलर्ट रहने की आश्यकता है। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतते रहने की जरूरत है जिससे शरीर को स्वस्थ रखा जा सके। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मौसमी बीमारियों और संक्रमण से बचाव के लिए हम सभी के घरों में कई ऐसी कारगर औषधियां मौजूद होती हैं जिन्हें आयुर्वेद के साथ-साथ मेडिकल साइंस ने भी काफी प्रभावी पाया है। इस मौसम में सभी लोगों को तुलसी की पत्तियों का सेवन जरूर सुनिश्चित करना चाहिए। यह आपको मौसमी संक्रमण के कारण होने वाले दुष्प्रभावों से बचाने के साथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में भी काफी सहायक मानी जाती है।

तुलसी की पत्तियों को कई क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार के लिए भी प्रयोग में लाया जाता रहा है। आइए जानते हैं कि तुलसी शरीर के लिए कितनी प्रभावी हो सकती है और इसके क्या लाभ हैं?
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तुलसी से सेहत को होने वाले लाभ - फोटो : istock
मौसमी बीमारियों के खतरे से रहेंगे सुरक्षित

मौसम बदलने के साथ होने वाले इंफ्लूएंजा संक्रमण के जोखिम को कम करने में तुलसी की पत्तियों को काफी कारगर पाया गया है। तुलसी एंटीवायरल, एंटिफंगल, एंटी-इंफ्लामेटरी और एनाल्जेसिक (एक दर्द निवारक) के रूप में जानी जाती है जो शरीर को स्वस्थ और फिट बनाए रखने के साथ सर्दी-खांसी और शरीर में दर्द की समस्या से बचाने में काफी कारगर हो सकती है। चाय में तुलसी की पत्तियों को डालकर इसका सेवन करना शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर रखने के साथ संक्रमण के खतरे से आपको सुरक्षित रखने में मददगार हो सकती है।
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मधुमेह रोगियों के लिए तुलसी की पत्तियों के फायदे - फोटो : istock
डायबिटीज में तुलसी की पत्तियों के लाभ

अगर आपको प्री-डायबिटीज या टाइप-2 डायबिटीज है, तो तुलसी की पत्तियों का सेवन ब्लड शुगर को कम करने में मदद कर सकता है। पशुओं और इंसानों पर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि तुलसी की पत्तियां मधुमेह के लक्षणों को कम करने में भी सहायक हो सकती हैं।

अध्ययन में तुलसी का अर्क देकर चूहों में 30 दिनों के भीतर ब्लड शुगर के स्तर में 26.4 प्रतिशत की कमी देखी गई। तुलसी के पत्तों का चूर्ण भी डायबिटीज के प्रबंधन में मददगार पाया गया है।

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कोलेस्ट्रॉल को कैसे कम करें? - फोटो : Pixabay
कोलेस्ट्रॉल रहता है कंट्रोल

डायबिटीज के साथ कोलेस्ट्रॉल की समस्याओं के जोखिम को भी कम करने में तुलसी की पत्तियों का सेवन करना लाभकारी पाया गया है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि तुलसी, मेटाबॉलिज्म को ठीक रखने के साथ वजन घटाने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मददगार हो सकती है।

एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि तुलसी के ताजे पत्तों का सेवन बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल-कोलेस्ट्रॉल) को कम करने और गुड कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल-कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को बढ़ाने में सहायक है। तुलसी के पत्तों का चूर्ण खाने के बाद मधुमेह के साथ और चूहों में किडनी, लिवर और हृदय स्वास्थ्य में भी सुधार देखा गया।
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तुलसी के काढ़े का करें सेवन - फोटो : Pixabay
चिंता-तनाव के कम करने में लाभकारी 

तुलसी के पौधे के ज्यादातर हिस्सों को एडाप्टोजेन के रूप में प्रभावी पाया गया है। एडाप्टोजेन एक प्राकृतिक पदार्थ है जो तनाव-चिंता जैसी भावनाओं को कम करने के साथ मानसिक संतुलन को बढ़ावा देता है।

वैज्ञानिक शोध से पता चलता है कि तुलसी में पाए जाने वाले औषधीय गुण दिमाग को स्वस्थ रखने और मानसिक स्वास्थ्य विकारों के जोखिम को कम करने में आपके लिए सहायक हो सकते हैं। तुलसी की पत्तियों का सेवन शारीरिक-मानसिक दोनों प्रकार की सेहत में लाभकारी पाया गया है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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