Habits can Damage Your Teeth: दांत हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक हैं। मजबूत और स्वस्थ दांत न केवल खाने-पीने में मदद करते हैं, बल्कि मुस्कान को भी खूबसूरत बनाते हैं। फर, क्या आप जानते हैं कि कई बार हमारी रोजमर्रा की आदतें दांतों की सड़न और कैविटी का कारण बन सकती हैं।
बहुत से लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर समय पर सावधानी नहीं बरती गई तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इस लेख में हम आपको चार ऐसी आम गलतियों के बारे में बताएंगे, जिनसे दांत धीरे-धीरे खराब होते हैं और जिन्हें बदलकर आप अपनी मुस्कान को स्वस्थ रख सकते हैं।
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इन 4 गलत आदतों से धीरे-धीरे सड़ रहे हैं आपके दांत
- फोटो : Freepik.com
मीठा ज्यादा खाना
शुगर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे केक, चॉकलेट, कैंडी और मीठे पेय दांतों में बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं।
ये बैक्टीरिया शुगर को एसिड में बदल देते हैं, जो दांत की एनेमल को धीरे-धीरे खोखला कर देता है।
आपकी ये गलती कैविटी का कारण बनती है।
यदि आप मिठाई खाने के बाद ब्रश या माउथवॉश का उपयोग नहीं करते हैं, तो यह समस्या बढ़ सकती है।
इसलिए मीठा खाने के बाद तो ब्रश या माउथवॉश का इस्तेमाल अवश्य करें।
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इन 4 गलत आदतों से धीरे-धीरे सड़ रहे हैं आपके दांत
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समय पर ब्रश न करना
रोजाना कम से कम दो बार ब्रश करना बेहद जरूरी है।
अगर सुबह और रात को ब्रश नहीं किया गया तो दांतों पर प्लाक और टार्टर जम जाता है।
प्लाक बैक्टीरिया का घर बन जाता है, जिससे मसूड़ों में सूजन, बदबू और कैविटी की संभावना बढ़ जाती है।
इसलिए दिन में दो बार ब्रश अवश्य करें।
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फ्लॉस न करना
भोजन के छोटे टुकड़े दांतों के बीच फंस जाते हैं, जहां ब्रश पहुंच नहीं पाता।
अगर इन्हें नियमित रूप से फ्लॉस न किया जाए तो बैक्टीरिया इन जगहों पर पनपते हैं और दांत सड़ने लगते हैं।
फ्लॉस करने से दांतों के बीच की जगह साफ रहती है और मसूड़ों की सूजन भी कम होती है।
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कोल्ड ड्रिंक और सोडा का अधिक सेवन
एसिडिक और शुगर युक्त पेय पदार्थ जैसे सोडा, कोल्ड ड्रिंक और एनर्जी ड्रिंक दांत की एनेमल को कमजोर कर देते हैं।
इससे दांत जल्दी टूटते हैं और संवेदनशील हो जाते हैं।
इसके अलावा ये मसूड़ों और मुंह में सूजन की समस्या भी बढ़ाते हैं।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।