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Thyroid: ये गड़बड़ आदतें आपको भी बना देंगी थायरॉइड का मरीज

Mon, 19 Jan 2026 08:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

थायराइड दरअसल एक छोटी-सी ग्रंथि है, जो हमारे गले में सामने की ओर स्थित होती है, लेकिन इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। यह ग्रंथि थायराइड हार्मोन का उत्पादन करती है, जो मेटाबॉलिज्म, वजन, दिल की धड़कन, तापमान और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करता है। 
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थायरॉइ़ड की समस्या और इसके कारण - फोटो : Adobe Stock
थायरॉइड की बीमारी मौजूदा समय में काफी आम हो गई है। लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी, नींद की बढ़ती दिक्कतों ने इस रोग के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। लिहाजा, महिला-पुरुष, बच्चे-बुजुर्ग सभी इसका शिकार होते जा रहे हैं।

थायरॉइड असल में एक छोटी-सी ग्रंथि होती है, जो हमारे गले में सामने की ओर स्थित होती है। ये भले ही छोटी सी ग्रंथि है लेकिन इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। यह ग्रंथि थायराइड हार्मोन (T3 और T4) का उत्पादन करती है, जो मेटाबॉलिज्म से लेकर शरीर के वजन, दिल की धड़कन, शरीर के तापमान और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करता है। जब यह ग्रंथि जरूरत से कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तो थायरॉइड की समस्या उत्पन्न होती है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दिनचर्या की कुछ गड़बड़ आदतें ऐसी हैं जो आपको भी इस बीमारी का शिकार बना सकती हैं जिसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहना चाहिए।
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थायरॉइ़ड की बढ़ती समस्या - फोटो : Adobe Stock
थायरॉइड की समस्या को जानिए
 
थायरॉइड की समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है, हाइपोथायराइडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म। 
  • हाइपोथायराइडिज्म में थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती। हाइपोथायराइडिज्म में अचानक वजन बढ़ने, लगातार थकान, ठंड ज्यादा लगने, कब्ज, त्वचा के रूखा होने और बालों के झड़ने की दिक्कत होती है।
  • वहीं हाइपरथायराइडिज्म में जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनने लगता है। इसके कारण तेजी से वजन घटने, दिल की धड़कनों में अनियमितता, ज्यादा पसीना आने, घबराहट, नींद न आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
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खान-पान में गड़बड़ी के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
गड़बड़ आदतें बन सकती हैं इस बीमारी का कारण

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारी कुछ गड़बड़ आदतें इस रोग के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

असंतुलित आहार से बढ़ता है खतरा

गलत खानपान थायरॉइड बीमारी का प्रमख कारण है। 
  • आयोडीन, सेलेनियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्व थायरॉइड हार्मोन के निर्माण और उसके संतुलन के लिए बेहद जरूरी होते हैं। 
  • इस बीमारी से बचने के लिए प्रोसेस्ड एंव जंक फूड, ज्यादा चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें कम खाने की सलाह दी जाती है।
  • आयोडीन की कमी से हाइपोथायराइडिज्म का खतरा बढ़ता है, इसलिए नियमित रूप से संतुलित आहार लेना बहुत जरूरी माना जाता है।

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ज्यादा तनाव लेना खतरनाक - फोटो : Freepik.com
ज्यादा तनाव तो नहीं लेते हैं आप

अक्सर तनाव में रहने वाले लोगों में थायरॉइड बीमारी होने का खतरा भी अधिक देखा जाता है। 
  • तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो थायरॉइड हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकता है। 
  • इसके अलावा तनाव के कारण नींद की कमी, अनियमित खानपान और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं भी होती हैं, जिससे भी आप इस रोग का शिकार हो सकते हैं। 
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नींद न पूरी होना खतरनाक - फोटो : Freepik.com
नींद पूरी न होना खतरनाक

अच्छी सेहत के लिए अच्छी नींद लेना भी जरूरी है। पर्याप्त नींद न लेना भी थायरॉइड की बीमारी का प्रमुख कारण है। नींद के दौरान  शरीर अपने हार्मोनल सिस्टम को रिसेट करता है। ऐसे में नींद पूरी न होने से हार्मोनल बैलेंस बिगड़ने लगता है। नींद की कमी से हार्मोन का स्तर प्रभावित हो सकता है, जिससे हाइपोथायराइडिज्म का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा नींद पूरी न होने से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, जो ऑटोइम्यून थायरॉइड रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।
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अक्सर बैठे रहने की आदत नुकसानदायक - फोटो : Freepik.com
अक्सर बैठे रहने की आदत ठीक नहीं

लगातार बैठे रहने वाली जीवनशैली भी आपको थायरॉइड का शिकार बना सकती है।
  • शारीरिक गतिविधि और व्यायाम आपके मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखती है, जो थायरॉइड हार्मोन का मुख्य काम है।
  • जब आप शरीरिक परिश्रम नहीं करते तो मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और हाइपोथायराइडिज्म के लक्षण बढ़ सकते हैं।
  • नियमित वॉक, योग और व्यायाम से थायरॉइड हार्मोन की संवेदनशीलता बेहतर होती है और नींद की गुणवत्ता सुधारती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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