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Thyroid: थायरॉइड की समस्या बिगाड़ सकती है आपकी प्रजनन क्षमता? जान लें इसके पीछे का विज्ञान

Tue, 17 Feb 2026 08:10 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

How Thyroid Affects Ovulation?: थायरॉइड एक ऐसी समस्या है जिससे हमारे देश की एक बड़ी आबादी परेशान है। आमतौर पर यह महिलाओं में अधिक देखने मिलता है मगर बहुत से पुरुष में इसके जद में आते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये बीमारी पुरुष और महिला दोनों के प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
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थायरॉइ़ड और फर्टिलिटी का संबंध - फोटो : Amar Ujala
Thyroid And Fertility Link: थायरॉइड ग्रंथि हमारे गले के निचले हिस्से में स्थित एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि है, लेकिन इसका प्रभाव पूरे शरीर के प्रजनन तंत्र पर बहुत गहरा होता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, थायरॉइड हार्मोन (T3 और T4) शरीर की हर कोशिका के मेटाबॉलिज्म और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करते हैं। जब यह ग्रंथि बहुत कम (हाइपोथायरायडिज्म) या बहुत अधिक (हाइपरथायरायडिज्म) हार्मोन बनाने लगती है, तो यह महिलाओं और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता को सीधे प्रभावित करती है। 

महिलाओं में थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन सीधे ओव्यूलेशन (अंडाशय से अंडे का निकलना) की प्रक्रिया में बाधा डालता है, जिससे प्रेगनेंसी में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अक्सर जो महिलाएं बार-बार गर्भपात या अनियमित पीरियड्स का सामना करती हैं, उनके पीछे थायरॉइड का अनियंत्रित लेवल एक बड़ा कारण हो सकता है। इस यह सिर्फ एक हार्मोनल समस्या नहीं है, बल्कि यह आपके फर्टिलिटी को भी प्रभावित करता है।
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महिलाओं में ओव्यूलेशन की समस्या - फोटो : Freepik.com
महिलाओं में ओव्यूलेशन और पीरियड्स पर प्रभाव
महिलाओं में थायरॉइड हार्मोन और प्रजनन हार्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) के बीच एक बारीक संतुलन होता है। जब थायरॉइड का लेवल बिगड़ता है, तो पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं या पूरी तरह रुक सकते हैं, जिसे एनोव्यूलेशन कहा जाता है। इसकी वजह से अंडे की गुणवत्ता कम हो सकती है और गर्भाशय की परत कमजोर हो जाती है, जिससे भ्रूण का आरोपण चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

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स्पर्म क्वालिटी में सुधार - फोटो : Freepik.com
पुरुषों की प्रजनन क्षमता और थायरॉइड
अक्सर माना जाता है कि थायरॉइड सिर्फ महिलाओं को प्रभावित करता है, लेकिन यह पुरुषों की फर्टिलिटी के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। थायरॉइड का असंतुलन शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गतिशीलता और बनावट को नुकसान पहुंचा सकता है। पुरुषों में थायरॉइड की समस्या टेस्टोस्टेरोन के लेवल को कम कर सकती है, जिससे कामेच्छा में कमी और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

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गर्भावस्था - फोटो : Freepik.com
गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का जोखिम
गर्भधारण के बाद भी थायरॉइड का लेवल स्थिर रहना जरूरी है। गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में भ्रूण पूरी तरह से मां के थायरॉइड हार्मोन पर निर्भर होता है। अगर मां में थायरॉइड की कमी हो, तो यह गर्भपात, समय से पहले प्रसव और बच्चे के मानसिक विकास में बाधा का कारण बन सकता है। इसलिए कंसीव करने से पहले और गर्भावस्था के दौरान नियमित थायरॉइड जांच जरूरी है।
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थायरॉइड - फोटो : Adobe Stock
सही जांच और उपचार है समाधान
थायरॉइड के कारण होने वाली फर्टिलिटी समस्याओं की सबसे अच्छी बात यह है कि इन्हें उपचार के जरिए पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। उचित दवा, संतुलित आहार (आयोडीन और सेलेनियम युक्त) और तनावमुक्त जीवनशैली से थायरॉइड को नियंत्रित कर प्रजनन क्षमता को ठीक किया जा सकता है। अगर आप भी गर्भधारण की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहले अपने टीएसएच स्तर की जांच कराकर डॉक्टर से परामर्श लें। 

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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