फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इन तीन कारणों से महिलाएं नहीं बन पाती मां, विज्ञान की तरक्की ने दिलाया संतान सुख

Wed, 22 Apr 2020 09:38 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
- फोटो : Social Media
मां बनना हर महिला के लिए एक सुखद एहसास लेकर आता है। हांलाकि दुनिया में बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जो मातृत्व सुख से वंचित रह जाती हैं लेकिन अब विज्ञान की तरक्की से यह संभव है। वैसे तो एक स्वस्थ महिला के लिए मां बनना मुश्किल नहीं है लेकिन आजकल की गलत जीवनशैली या हार्मोन की गड़बड़ी की वजह से दिक्कतें आती हैं।


 
विज्ञापन

2 of 6
महिलाओं में गर्भधारण न करने का कारण फैलोपियन ट्यूब यानी गर्भनलियो का बंद होना, यूट्रस संबंधी समस्याएं जैसे छोटा गर्भाशय, गांठ, रसौली/कैंसर या टीबी, एग का नहीं बनना, पीसीओडी (पॉलिसिस्टिक ओवरी डीजीजेज), ल्यूकोरिया, डायबीटीज, अनीमिया, मोटापा आदि है।

 
विज्ञापन

3 of 6
- फोटो : Social Media
इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में बांझपन से जुड़ी सभी बीमारियों को मुख्य रूप से तीन वर्गों में बांटा जा सकता है। पहली- फैलोपियन ट्यूब्स मतलब गर्भनली, दूसरी- गर्भाशय से जुड़ी समस्या एण्डोमेट्रियम और तीसरी- अंडाशय से जुड़ी समस्या पॉलिसिस्टिक ओवरी डीजीजेज' या 'पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम '। इतनी गंभीर समस्याओं के बाद भी लेटेस्ट तकनीक आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) से महिलाओं को मां बनने का सुख प्राप्त हो सकता है।
हांलाकि इन समस्याओं के अलावा भी मां बनने में दिक्कतें आती हैं। जिनमें कुछ महिलाओं में ट्यूब न होने की समस्या होती है तो कुछ में ट्यूब में रुकावट या संक्रमण से जुड़ी समस्या होती हैं। 

 

4 of 6
क्या काम करती है गर्भनली/फैलोपियन ट्यूब

महिला के शरीर में दो ट्यूब होती हैं| हर महीने ओवरी से अंडा फैलोपियन ट्यूब में आता है इस दौरान सम्बन्ध बनने पर शुक्राणु अंडे में प्रवेश कर जाता है जिससे भ्रूण बनने की प्राथमिक प्रक्रिया पूरी हो जाती है इसके बाद भ्रूण गर्भाशय में चला जाता है और जन्म तक यही विकसित होता है।
फैलोपियन ट्यूब में अगर ब्लॉकेज हो तो इसे दवाओं के माध्यम से ठीक किया जाता है लेकिन कई मामलो में दवा बेअसर होती है ऐसे में कैन्यूलाइजेशन तकनीक के तहत एक पतले तार के जरिए ब्लॉकेज हटाया जाता है। अगर ट्यूब में ब्लॉकेज ज्यादा हो तो प्रभावित हिस्से को हटाकर बाकी हिस्से को टांकें लगाकर जोड़ा जाता है। ट्यूब खुलने के बाद भी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना कम ही रहती है ऐसे में इसे खुलवाये बिना आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) की मदद से गर्भधारण किया जा सकता है । इसमें महिला की ओवरी से एग बाहर निकालकर लैब में पुरुष के स्पर्म से फर्टिलाइज किया जाता है । 2-3 दिन बाद इसे महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। इस प्रकार ट्यूब में होने वाली प्रक्रिया को लैब में किया जाता है इसके बाद सारी प्रक्रिया सामान्य गर्भधारण जैसी ही है |



 
विज्ञापन

5 of 6
- फोटो : pexels.com
एंडोमेट्रियोसिस ओवरी में होने वाली समस्या है। 25-40 आयुवर्ग की महिलाओं में पेट दर्द और गर्भधारण न कर पाने की यह काफी बड़ी वजह है। इस समस्या के होने पर एंडोमेट्रियम को ढकने वाली टिश्यूज ओवरीज या गर्भाशय के आसपास की जगहों पर विकसित होने लगती हैं। पीरियड्स के दौरान खून की गांठे ओवरी में जमा होने लगती है। इस वजह से आंतें, ट्यूब्स और ओवरीज आपस में चिपक जाती हैं। यह खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे ट्यूब और ओवरीज को नुकसान पहुंचता है, जो बांझपन का कारण बन सकता है। समय पर इसका इलाज न हो तो पेल्विक यानी पेड़ू में सूजन आ जाती है। इस तकलीफ में माहवारी के दौरान महिला को असहनीय दर्द से जूझना पड़ता है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
PCOD/PCOS पीरियड से जुड़ी समस्या है। यह समस्या अगर कम उम्र में पता चल जाए तो इसका इलाज बेहतर हो सकता है। इसमें महिला के गर्भाशय में मेल हार्मोन Androgen का स्तर बढ़ जाता है परिणामस्वरूप ओवरी में सिस्ट बनने लगते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि यह समस्या महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, मोटापा या तनाव के कारण उत्पन्न होती हैं। कई मामलों में जैनेटिकली भी यह समस्या पाई जाती है। शरीर में अधिक चर्बी होने की वजह से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ने लगती है, जिससे ओवरी में सिस्ट बनता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें