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Air Pollution: एयर प्यूरीफायर यूज करने वाले जरूर जान लें ये बातें, वरना बढ़ सकती है आपकी परेशानी

Sun, 21 Dec 2025 08:49 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pros and Cons Of Air Purifiers: जो लोग एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए कुछ अन्य चुनौतियां बढ़ जाती हैं। साथ ही एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां बरतनी बहुत जरूरी हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं कि एयर प्यूरीफायर के क्या साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
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एयर प्यूरीफायर के साइड इफेक्ट - फोटो : Amar Ujala
Side Effect Of Using Air Purifiers: सर्दियों के दस्तक देते ही शहरों में प्रदूषण का स्तर जानलेवा हो जाता है, जिससे बचने के लिए लोग अपने घरों और दफ्तरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये मशीनें घर के अंदर के को 400-500 से घटाकर 10-50 के सुरक्षित स्तर तक ले आती हैं। मगर हेल्थ एक्सपर्ट्स इसको लेकर एक नई और गंभीर चुनौती की ओर इशारा किया है। जब आप घंटों तक घर की शुद्ध हवा में रहते हैं, तो आपके फेफड़े और श्वसन तंत्र उस वातावरण के अभ्यस्त हो जाते हैं। 

असली समस्या तब शुरू होती है जब आप घर से बाहर कदम रखते हैं और अचानक 500-600 के खतरनाक AQI वाली हवा के संपर्क में आते हैं। हवा की गुणवत्ता में यह अचानक बदलाव शरीर के लिए एक बड़े झटके जैसा होता है। हमारा श्वसन तंत्र इस तीव्र बदलाव को झेलने के लिए तैयार नहीं होता, जिससे फेफड़ों में अचानक सूजन, सांस लेने में तकलीफ और हृदय पर दबाव बढ़ सकता है। 
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एयर प्यूरीफायर के साइड इफेक्ट - फोटो : Adobe Stock
'क्लीन एयर टॉलरेंस' और शरीर की प्रतिक्रिया
लगातार शुद्ध हवा में रहने से शरीर की प्रदूषकों के प्रति सहने की क्षमता कम होने लगती है। जब आप अचानक प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, तो वायुमार्ग संकुचित हो जाते हैं। यह स्थिति उन लोगों के लिए और भी घातक है जिन्हें अस्थमा या ब्रोंकाइटिस है, क्योंकि उनके शरीर का नेचुरल डिफेंस मैकेनिज्म इस भारी बदलाव को संभाल नहीं पाता और तुरंत अटैक या संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

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एयर प्यूरीफायर के साइड इफेक्ट - फोटो : Adobe Stock
प्यूरीफायर की मेंटेनेंस
प्यूरीफायर का उपयोग केवल उसे ऑन करने तक सीमित नहीं है। अगर आप समय-समय पर इसके HEPA और कार्बन फिल्टर को साफ नहीं करते, तो यह हवा को शुद्ध करने के बजाय जहरीली गैसें और जमा हुए बैक्टीरिया फेंकने लगता है। कई लोग खिड़की-दरवाजे खोलकर प्यूरीफायर चलाते हैं, जिससे मशीन पर दबाव बढ़ता है और वह बड़े कणों को तो रोक लेती है, लेकिन सूक्ष्म प्रदूषकों को साफ करने में विफल रहती है।

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थकान - फोटो : Freepik
मानसिक सतर्कता और एकाग्रता पर असर
अध्ययन बताते हैं कि प्रदूषित और शुद्ध हवा के बीच बार-बार आने-जाने से केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। अचानक प्रदूषित हवा में जाने से सिरदर्द, चक्कर आना और मानसिक धुंधलापन महसूस हो सकता है। यह 'शॉक' शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन को सक्रिय कर देता है, जिससे चिड़चिड़ापन और काम में फोकस की कमी होने लगती है।
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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
कैसे तालमेल बिठाएं?
एयर प्यूरीफायर का उपयोग बंद न करें, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बाहर निकलते समय N95 मास्क का अनिवार्य उपयोग करें ताकि बाहर की हवा का प्रभाव सीधे फेफड़ों पर न पड़े। साथ ही कोशिश करें कम से कम घर से बाहर जाने की जरूरत पड़े। घर के अंदर के वातावरण को 0 के बजाय 100-150 के 'मध्यम' स्तर पर रखने की कोशिश करें ताकि शरीर पूरी तरह से कृत्रिम हवा पर निर्भर न हो जाए। साथ ही डाइट में एंटीऑक्सीडेंट्स बढ़ाएं और पर्याप्त पानी पिएं ताकि शरीर अंदर से मजबूत रहे।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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