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यदि आप में भी हैं ये 7 आदतें तो हो जाइए सतर्क, हमसफर को ताने मारने से भी हो सकता है कोरोना

Fri, 04 Dec 2020 02:50 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इन आदतों पर विदेशों में कई सारे शोध भी हो चुके हैं - फोटो : Pixabay

जब से कोरोना ने भारत में दस्तक दी है तब से हमने कितनी सारी नई आदतों को अपने जीवन में शामिल किया है। भारतीयों की खासियत है यह कि वह किसी भी नई बात, विचार या आदत को बहुत जल्दी स्वीकार लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी कई सारी पुरानी आदतें जो कि हमें सामान्य दिखाई देती हैं, हमारे लिए इस कोरोनाकाल में खतरनाक साबित हो रही है। इन आदतों पर विदेशों में तो कई सारे शोध भी हो चुके हैं। अगली स्लाइड्स के माध्यम से जानिए किस प्रकार सामान्य प्रतीत होने वाली हमारी ये आदतें अनजाने में दे रही हैं कोरोना को न्योता।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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ताने मारने वालों के शरीर में नकरात्मक ऊर्जा रहती है - फोटो : couple fight

हमसफर से करते हैं तानेबाजी
यदि आपको अपने हमसफर की कोई भी बात बुरी लगती है और वो सीधे-सीधे कहने की बजाय आप बार-बार तानेबाजी करते हैं तो आपके लिए कोरोना से बचना मुश्किल है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में हुए एक रोचक शोध के मुताबिक जो पति-पत्नी स्पष्ट रूप से अपने गिले- शिकवे जाहिर करते हैं उनकी रोध- प्रतिरोधक क्षमता उनके मुकाबले अच्छी होती है जो ताने मारते हैं। ताने मारने वालों के शरीर में नकरात्मक ऊर्जा रहती है जो कि टी-सेल की मात्रा को कम करती है। ऐसे लोगों की कोरोना होने पर ठीक होने में समय भी लगता है। 


 

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7 से 8 घंटे सोने वाले लोग कोरोना से बचने में ज्यादा समर्थ हैं - फोटो : Pixabay
देर तक जागना
यदि आप रात में देर तक जागते हैं तो यह किसी खतरे से खाली नहीं है। जो लोग रात को देर से सोते हैं और सुबह जल्दी उठ जाते हैं उन्हें कोरोना होनी की अधिक संभावना है। जिन लोगों की 7-8 घंटे की नींद पूरी नहीं होती है, उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है। शिकागो यूनिवर्सिटी के अध्ययन के मुताबिक 4 से 5 घंटे की नींद लेने वालों के मुकाबले 7 से 8 घंटे सोने वाले लोग कोरोना से बचने में ज्यादा समर्थ हैं।

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छुट्टी न लेने वालों के लिए है खतरा

काम से छुट्टी नहीं लेते
प्रतिस्पर्धा की इस दौड़ में यदि आप भाग रहे हैं और बीच-बीच में ठहरते नहीं हैं मतलब महीनों बिना किसी अवकाश के काम कर रहे हैं तो अभी भी सतर्क हो जाइए क्योंकि ऐसा करने से आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है। आप वायरस से लड़ने में असक्षम साबित हो सकते हैं।

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छोटे से छोटा सामान भी खुद का उपयोग करें

दूसरों से सामान लेने की आदत
यदि आपको भी दफ्तर में दूसरे से पेन, कैलकुलेटर आदि लेने की आदत है, तब तो वायरस को आप सामने से ही न्योता दे रहे हैं। हो सकता है जिस व्यक्ति से आपने सामान लिया वो अस्वस्थ हो। ऐसे में आपके लिए यह किसी जोखिम से कम नहीं है इसलिए छोटे से छोटा सामान भी खुद का उपयोग करें। 

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सकारात्मक लोगों के शरीर में टी-सेल की मात्रा अधिक होती है - फोटो : getty images

नकारात्मक रवैया
यदि आप बहुत अधिक नकारात्मक बातें सोचते हैं तब भी आपके लिए समस्या है। सकारात्मक लोगों के शरीर में टी-सेल की मात्रा अधिक होती है, साथ ही सफेद रक्त कोशिकाएं भी प्रभावशाली होती हैं। जिससे कि उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता विकसित रहती है, जब की नकारात्मक रवैया रखने वाले लोगों के मामले में ऐसा कुछ नहीं होता है।

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लगातार एंटी बायोटिक का सेवन करने से रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है - फोटो : Pixabay

एंटीबायोटिक पर  निर्भर
एंटीबायोटिक का सेवन तब ही करना चाहिए जब शरीर में किसी वायरस का गंभीर संक्रमण हुआ हो। यदि सामान्य बीमारियों में आप इनका सेवन करते हैं तो यह खतरे से खाली नहीं है। कई सारे शोधों में यह सामने आया है कि लगातार एंटी बायोटिक का सेवन करने से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर हो जाती है। वह किसी भी बीमारी से लड़ने के काबिल नहीं बचती है।

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जो लोग खुलकर हंसते हैं उनमें स्ट्रेस हार्मोन्स अधिक प्रभावशाली नहीं होते

गंभीर स्वभाव
यदि आपका स्वभाव गंभीर है और आप सामान्य स्थिति में भी हंसने से परहेज करते हैं तो कोरोना आपसे मित्रता करने आ सकता है। लोमा लीना विश्वविद्यालय में हुए शोध के मुताबिक जो लोग खुलकर हंसते हैं उनमें स्ट्रेस हार्मोन्स अधिक प्रभावशाली नहीं होते और रोग-प्रतिरोधक क्षमता एकदम बढ़िया होती है। जबकि गंभीर लोगों में यह विपरीत होता है।

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