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शोध: किशोरावस्था में समय पर नहीं सोती हैं लड़कियां तो हो सकता है मोटापे का खतरा

Wed, 18 Sep 2019 02:39 PM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : pixa
शोध में बताया गया है कि 11 से 16 वर्ष की उम्र में लड़कियों के लिए समय पर सोना क्यों आवश्यक है। टीन एज लड़कियां जो रात में देर से सोने की आदी हो रही हैं, उनका वजन भी बढ़ने की आशंकाएं बन रही हैं। ऑकलैंड कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने 11 से 16 वर्ष की लड़कियों को लेकर यह रिपोर्ट बाल-रोग जर्नल जामा में प्रकाशित की है। उनका दावा है कि लड़कों के ऐसा करने पर उनके मोटे होने की संभावना कम है।
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- फोटो : pixa
इस अध्ययन के लिए किशोर उम्र के लड़के-लड़कियों की सोने की आदतों और वजन में वृद्धि का आंकड़ा दर्ज किया गया। उनकी कलाइयों पर एक्टीग्राफ लगाए गए जो उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखने के काम आए। अध्ययन के दौरान उनकी कमर के साइज और शरीर में फैट्स की मौजूदगी की भी निगरानी की गई।
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जिसके परिणामस्वरूप नींद की कमी से फैट्स को पचाने के तंत्र पर असर पड़ा। इस शोध से पता चला कि जो किशोरियां रात को देर से सो रही थीं, उनकी कमर के आकार में समय पर सो रही लड़कियों के मुकाबले औसतन 0.58 सेमी अधिक वृद्धि दर्ज हुई। वहीं हर एक घंटे की नींद कम मिलने पर यह अंतर 1.19 सेमी तक दर्ज हुआ। इसी तरह शरीर में फैट्स भी बढ़े। इसकी वजह फैट्स को पचाने के शरीर के सिस्टम पर होने वाले असर को माना गया। लड़कों में यह अंतर उल्लेखनीय नहीं था।
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- फोटो : pixa
लड़कियों में हो रहे इस परिवर्तन के लिए सिफारिश में कहा गया कि सोने के शेड्यूल में सुधार करते हुए बच्चों और किशोरों में मोटापे को नियंत्रित किया जा सकता है, विशेष तौर से लड़कियों में। वहीं खान-पान, शारीरिक गतिविधि और आदि में सुधार भी किए जाने चाहिए जिससे किशोरवय लड़कियों को मोटापे की समस्या से बचाया जा सके।
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