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TB In India: इस राज्य में टीबी से हुई मौतों ने तोड़ा पिछले 6 साल का रिकॉर्ड, आखिर कैसे भारत होगा 'टीबी मुक्त'?

Mon, 12 Jan 2026 07:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  •  2025 में मिजोरम में कुल 145 लोगों की तपेदिक (टीबी) से मौत हुई, जो छह वर्षों में सबसे ज्यादा मौतें हैं। 
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भारत में टीबी रोग के मामले - फोटो : Adobe Stock
नए शोध, मेडिकल क्षेत्र में नवाचार के साथ बेहतर प्रचार और जागरूकता अभियानों को बढ़ाकर भारत ने पिछले दो दशकों में कई बीमारियों पर जीत हासिल की है। हालांकि ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) अब भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण बनी हुई है। सरकार ने साल 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने की लक्ष्य निर्धारित किया था, हालांकि ये बीमारी है कि जाने का नाम ही नहीं ले रही है।

साल 2025 में कई राज्यों से प्राप्त हुई जानकारियों में देखा गया कि किस तरह से अब भी ये बीमारी सभी आयुवर्ग के लोगों को अपना शिकार बना रही है। हालिया रिपोर्ट मिजोरम से है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल यानी 2025 में मिजोरम में 145 लोगों की तपेदिक (टीबी) से मौत हुई। ये पिछले छह वर्षों में सबसे ज्यादा मौतें हैं।

नेशनल हेल्थ मिशन, मिजोरम के तहत नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम के अनुसार, इस साल कुल 2,275 लोगों में (911 महिलाएं) इस बीमारी का पता चला, जो 2024 के 2,291 मामलों के रिकॉर्ड से थोड़ी कम है। हालांकि टीबी से मौत के बढ़ते मामले स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं।
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टीबी रोग और इसका खतरा - फोटो : Adobe Stock
मिजोरम में बढ़ी टीबी से मौतें

मिजोरम से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक साल 2025 में राज्य में सामने आए 2,275 नए मामलों में से 1,900 सरकारी अस्पतालों में रिपोर्ट किए गए, जबकि बाकी 375 मामले प्राइवेट सेंटर्स में पाए गए। साल 2020 से राज्य में टीबी से होने वाली मौतें लगातार बढ़ी हैं।
  • 2020 में 31 लोगों की मौत हुई, जबकि 2021 में यह संख्या बढ़कर 46, 2022 में 87, 2023 में 119 और 2024 में 136 हो गई। 


ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी बढ़ा रही है चिंता

साल 2025 में रिपोर्ट किए गए 2,275 नए मामलों में से 146 लोगों में मल्टी-ड्रग-रेसिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस (एमडीआर-टीबी) का पता चला। इतना ही नहीं 267 लोग टीबी और एचआईवी/एड्स दोनों से पीड़ित पाए गए। नए मरीजों में से 141 की उम्र 14 साल से कम थी। 
  • कुल मिलाकर 84 प्रतिशत मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया। 
  • आइजोल जिले में सबसे ज्यादा 1,569 मामले दर्ज किए गए, इसके बाद लुंगलेई में 155 और कोलासिब में 138 मामले दर्ज किए गए। 

अधिकारियों ने बताया कि पीएम टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म 'निक्षय' के जरिए 100 से ज्यादा लोगों ने टीबी मरीजों को गोद लेने या उनकी मदद के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। यह भारत की टीबी खत्म करने की प्रतिबद्धता को पूरा करने में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने को प्रदर्शित करती है।
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टीबी ने बढ़ा दी है चिंता - फोटो : Adobe stock
दुनियाभर के लिए चिंता का कारण है ये बीमारी

ऐसा नहीं है कि टीबी से सिर्फ भारत ही परेशान है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक रिपोर्ट में बताया कि साल 2023 में दुनियाभर में 8 मिलियन (80 लाख) से अधिक लोगों में तपेदिक का पता चला है। यह संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा 1995 में ट्रैक रखना शुरू करने के बाद से दर्ज किए गए मामलों की सबसे अधिक संख्या है।

भारत में हर साल टीबी के लाखों नए मामले तो सामने आ ही रहे हैं इसके साथ भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के डेटा के मुताबिक देश में 40 प्रतिशत मरीज ऐसे भी हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं देखे जाते हैं। इन मरीजों से भी संक्रमण के प्रसार का खतरा हो सकता है जोकि टीबी के खात्मे की दिशा में बड़ा चैलेंज माना जाता रहा है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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