प्रेग्नेंट है या नहीं, महिलाओं के लिए यह उधेड़बुन बहुत आम है। ऐसे में गर्भ ठहरने के छह से आठ हफ्तों के बीच, जब शरीर में अधिक बदलाव नहीं दिखते हैं तब इन लक्षणों की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि प्रेग्नेंट है या नहीं।
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मासिक चक्र-
प्रेग्नेंसी के शुरुआती आठ हफ्तों के भीतर सिर्फ एक बार हल्की ब्लीडिंग प्रेग्नेंसी का लक्षण हो सकती है। आमतौर पर प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में पीरियड्स भी रुक जाते हैं। हालांकि सिर्फ इस आधार पर किसी महिला का गर्भवती होना नहीं माना जा सकता है क्योंकि पीरियड्स रुकने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
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बहुत अधिक थकान-
गर्भधारण करने के पहले हफ्ते से ही बहुत अधिक थकान होना, खासतौर पर सुबह के समय थकान, एक प्रमुख लक्षण है। इस अवस्था में शरीर में प्रोजेस्टोरोन हार्मोन बनता है जिससे शरीर बहुत जल्दी थक जाता है।
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ब्रेस्ट में बदलाव-
प्रेग्नेंसी के शुरुआती दौर में ब्रेस्ट में भी परिवर्तन होता है। दूसरे या तीसरे सप्ताह तक ब्रेस्ट में सूजन या कड़ापन महसूस होता है। शरीर में हार्मोनल बदलाव की वजह से यहां की त्वचा का रंग भी बदलता है।
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जी मचलना और उल्टियां-
99 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को पीरियड्स रुकने के आठ सप्ताह के भीतर उल्टियां या जी मचलने जैसी समस्या जरूर होती हैं। इसके आधार पर गर्भ के भीतर बच्चे या जुड़वां बच्चे का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।
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पाचन से संबंधी समस्याएं-
प्रेग्नेंसी के छठें हफ्ते में कई बार पाचन से संबंधी समस्याएं होती हैं जिसमें सीने में दर्द, गैस्ट्रिक, एसिडिटी आदि प्रमुख हैं। इसका कारण भी शरीर में होने वाला हार्मोनल बदलाव हो सकता है।
पसंद बदलना-
प्रेग्नेंसी के दौरान मूड, खाने की पसंद-नापसंद, महक आदि में बदलाव होते हैं। कई बार सिर्फ पसंद ही नहीं बदलती बल्कि पसंदीदा भोजन या महक से शरीर को भी एलर्जी हो सकती है।