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High Blood Sugar: क्या आपको भी हो रही हैं ये दिक्कतें? हो सकता है डायबिटीज का शुरुआती अलर्ट

Thu, 28 May 2026 07:52 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डायबिटीज की समस्या में घावों का समय पर न भरना, बार-बार पेशाब जाने की दिक्कत होना, बहुत अधिक भूख या प्यास लगने की दिक्कत हो सकती है। इनपर हम सभी ध्यान देते रहते हैं, पर मधुमेह के  कुछ ऐसे भी लक्षण भी हैं जिनपर न तो ज्यादा चर्चा होती है न ही इसपर हम सभी ध्यान दे पाते हैं।
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डायबिटीज का जोखिम - फोटो : Amarujala.com/AI
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डायबिटीज के मरीज सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं। खानपान में गड़बड़ी, घंटों बैठकर काम करना, तनाव, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधि कम होना इसके बड़े कारण माने जाते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि डायबिटीज की शुरुआत में हमेशा स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई देते। कई लोगों में हाई ब्लड शुगर की समस्या लंबे समय तक बिना किसी गंभीर लक्षण के बढ़ती रहती है और शरीर धीरे-धीरे अंदर से प्रभावित होने लगता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि नियमित जांच, डाइट में सुधार और व्यायाम की आदत से डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है। इसके साथ शरीर के संकेतों पर भी गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी है। यदि परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज की समस्या रही है तो और भी सावधान हो जाना चाहिए।

डायबिटीज का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे दिमाग में घाव न भरने, थकान, बार-बार पेशाब आने की दिक्कत सामने आती है। पर कई ऐसे लक्षण हैं जो अक्सर लोग इग्नोर कर देते हैं। आइए डायबिटीज के ऐसे ही संकेतों को जान लेते हैं।
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दुनियाभर में डायबिटीज का खतरा - फोटो : Adobe Stock
डायबिटीज में होने वाली समस्याएं

विशेषज्ञों के अनुसार रात में कई बार पेशाब के लिए उठना, सामान्य से ज्यादा प्यास लगना हाई ब्लड शुगर का संकेत हो सकता है। कई लोग इसे गर्मी या ज्यादा पानी पीने की आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लडॉक्टर बताते हैं कि यदि इन लक्षणों के साथ धुंधला दिखना, कमजोरी या अचानक वजन कम होना भी दिखे तो तुरंत ब्लड शुगर टेस्ट करवाना चाहिए। शुरुआती जांच से प्रीडायबिटीज या डायबिटीज को समय रहते कंट्रोल किया जा सकता है।

आइए डायबिटीज में होने वाली अन्य समस्याओं को भी जान लेते हैं, जिसपर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता।
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डायबिटीज में थकान की समस्या - फोटो : Freepik.com
थकान और कमजोरी की समस्या

अगर पर्याप्त आराम और नींद के बाद भी शरीर में थकान बनी रहती है तो यह हाई ब्लड शुगर का संकेत हो सकता है। 
 
  • शरीर भोजन से मिलने वाले ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने के लिए इंसुलिन का इस्तेमाल करता है। डायबिटीज में यह प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है, जिससे कोशिकाओं तक पर्याप्त ऊर्जा नहीं पहुंचती और व्यक्ति लगातार थका हुआ महसूस करता है।
  • हाई ब्लड शुगर शरीर में सूजन और डिहाइड्रेशन भी बढ़ा सकती है, जिससे कमजोरी ज्यादा महसूस होती है। 
  • अनियंत्रित ब्लड शुगर मानसिक एकाग्रता और दिमागी क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है। इससे भी सुस्ती, चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी महसूस हो सकता है।

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आंखों में समस्या - फोटो : Adobe Stock
धुंधला दिखाई देना

धुंधला दिखने को आमतौर पर आंखों की बीमारियां मान लिया जाता है, पर ये मधुमेह का संकेत भी हो सकता है। डायबिटीज की बढ़ी हुई स्थिति आंखों की तंत्रिकाओं को क्षति पहुंचाने लगती है जिसके कारण धुंधला दिखाई देने की दिक्कत हो सकती है। इस स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी के रूप में जाना जाता है, जो रेटिना में रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने के कारण होती है।
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डायबिटीज का इलाज - फोटो : Freepik.com
मुंह और त्वचा का सूखना

डायबिटीज की समस्या में मुंह और त्वचा के सूखने की भी दिक्कत होने लगती है, अक्सर इस लक्षण को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उच्च रक्त शर्करा के स्तर के कारण निर्जलीकरण होना सामान्य है। हमारा शरीर, अतिरिक्त ग्लूकोज को मूत्र के माध्यम से निकालने की कोशिश करता है, जिससे निर्जलीकरण हो सकती है। सभी लोगों के लिए इस तरह के संकेतों पर गंभीरता से ध्यान देना और समय पर इसका निदान कराना आवश्यक है।

अगर आपको बताए गए लक्षणों और डायबिटीज के सामान्य लक्षणों में से कम से कम दो-तीन का अनुभव हो रहा है तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए।
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डायबिटीज में वेट लॉस - फोटो : Freepik.com
अचानक वजन कम होना

बिना डाइटिंग या एक्सरसाइज के अचानक वजन कम होना भी डायबिटीज का एक अहम संकेत माना जाता है। जब शरीर ग्लूकोज का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता तो वह ऊर्जा के लिए फैट और मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर देता है। इससे तेजी से वजन घट सकता है।
 
  • कई लोग वजन कम होने को अच्छी बात मानकर खुश हो जाते हैं और असली कारण को समझ नहीं पाते। 
  • अगर वजन घटने के साथ ज्यादा भूख, कमजोरी या बार-बार पेशाब की समस्या हो रही है तो तुरंत जांच करवानी चाहिए।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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