फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sunita Williams: धरती पर वापसी के बाद सुनीता विलियम्स को हो सकती हैं ये स्वास्थ्य समस्याएं, विस्तार से जानिए

Tue, 18 Mar 2025 07:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अंतरिक्ष यात्रा एक असाधारण अनुभव है, जिसके लिए यात्रियों को पहले से ट्रेनिंग दी जाती है। हालांकि माइक्रोग्रैविटी में एक लंबा समय बिताने के दौरान अंतरिक्ष यात्री महत्वपूर्ण शारीरिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों से गुजरते हैं। आइए जानते हैं कि धरती पर वापसी के बाद सुनीता विलियम्स को क्या दिक्कतें हो सकती हैं?
विज्ञापन
1 of 5
सुनीता विलियम्स और बैरी विलमोर। - फोटो : NASA
नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर अंतरिक्ष में लगभग नौ महीने रहने के बाद अब पृथ्वी पर लौटने के लिए तैयार हैं। नासा की ओर से दी गई जानकारियों के मुताबिक 18 मार्च को शाम करीब 5:57 मिनट पर उनके धरती पर उतरने की उम्मीद है। दोनों बीते साल 2024 में जून में बोइंग के स्टारलाइनर यान से अंतरिक्ष पहुंचे थे, लेकिन यान में तकनीकी खराबी के चलते वापस नहीं आ सके। 

अब स्पेसएक्स का ड्रैगन क्राफ्ट यान रविवार को चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पहुंचा है। पृथ्वी से अलग दुनिया में करीब 290 दिन बिताने के बाद दोनों वापस आ रहे हैं।

अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण बहुत कम होने तथा प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सेहत पर कई तरह से नकारात्मक असर होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को धरती पर वापस आने के बाद किस तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है? 
विज्ञापन

2 of 5
पृथ्वी पर वापस आ रही हैं सुनीता विलियम्स - फोटो : NASA
अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण कम होने के कारण सेहत पर क्या असर होता है?

अंतरिक्ष और पृथ्वी का जीवन बिल्कुल अलग होती है। 

अंतरिक्ष यात्रा एक असाधारण अनुभव है, जिसके लिए यात्रियों को पहले से ट्रेनिंग दी जाती है। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों, जैसा सुनीता के यान के साथ हुआ, इसमें अंतरिक्ष में लंबा समय बिताना सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाला हो सकता है। माइक्रोग्रैविटी (कम गुरुत्वाकर्षण) में एक लंबा समय बिताने के दौरान अंतरिक्ष यात्री महत्वपूर्ण शारीरिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों से गुजरते हैं।
 

अंतरिक्ष में समय बिताना जितना चैलेंजिंग है, पृथ्वी पर वापस लौटना भी उतना ही चुनौतीपूर्ण है। बिना गुरुत्वाकर्षण के अंतरिक्ष यात्रियों का शरीर भारहीनता (Weightlessness) का आदी हो जाता है। धरती पर वापसी के बाद शरीर को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में ढलने में महीनों भी लग सकते हैं। इस दौरान उन्हें कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।


(ये भी पढ़िए- शादीशुदा लोगों के मोटे होने का खतरा तीन गुना अधिक, पर क्या है इसकी वजह?)
विज्ञापन

3 of 5
सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को होने वाली समस्याएं - फोटो : ANI
धरती पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को क्या दिक्कतें होती हैं?

मेडिकल रिपोर्टस से पता चलता है माइक्रोग्रैविटी के बाद दोबारा से गुरुत्वाकर्षण में आने के बाद थकान, चलने में कठिनाई होने के साथ और शरीर का बैलेंस बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होता। इसके अलावा माइक्रोग्रैविटी में, मांसपेशियां उस तरह से भार सहन नहीं कर पातीं, जैसा कि वे पृथ्वी पर करती हैं। इसके परिणामस्वरूप, अगले कुछ महीनों तक सुनीता को मसल्स अटॉर्फी की दिक्कत भी हो सकती है। मसल्स अटॉर्फी में मांसपेशी के ऊतकों का क्षय हो जाता है और ये बहुत पतले हो जाते हैं।

वापस लौटने के बाद विलियम्स और विल्मोर को अपनी मांसपेशियां कमजोर लग सकती हैं, जिससे खड़े होना, चलना और संतुलन बनाना शुरू में काफी मुश्किल हो सकता है।

4 of 5
बेबी फीट की समस्या (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com
चलना और शरीर का संतुलन बनाए रखना होता है मुश्किल

नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री लेरॉय चियाओ ने एक रिपोर्ट में बताया कि धरती पर वापस लौटने के बाद लंबे समय तक चलने में परेशानी होती रहती है क्योंकि शरीर का संतुलन बनाना कठिन होता है। अंतरिक्ष यात्रियों को यात्रा के लंबे समय के बाद तक "बेबी फीट" जैसा अनुभव होता है। अंतरिक्ष में महीनों बिताने के बाद सख्त त्वचा उतर जाती है और पैर बहुत नरम और कोमल हो जाते हैं। जब तक पैरों में फिर से सख्त त्वचा नहीं बन जाती, तब तक चलना काफी कष्टदायक हो सकता है।


विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
सुनीता विलियम्स - फोटो : X/Nasa
स्वास्थ्य संबंधित इन समस्याओं का भी खतरा

धरती पर वापसी के बाद सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को कुछ महीनों तक और भी कई समस्याएं बनी रह सकती हैं।
  • अंतरिक्ष में ग्रैविटी कम होने के कारण हड्डियों का घनत्व और मांसपेशियों की समस्या हो सकती है। वापस लौटने के बाद लंबे समय तक इससे संबंधित दिक्कतें परेशान करने वाली हो सकती हैं।
  • अंतरिक्ष यात्रियों की हड्डियां कमजोर और भंगुर हो जाती हैं। अंतरिक्ष में 10 महीने रहने के बाद विलियम्स और विल्मोर को वापस लौटने पर फ्रैक्चर होने या इससे संबंधित कई दिक्कतें बनी रह सकती हैं।
  • अंतरिक्ष में रहने के कारण हृदय, मस्तिष्क और संचार प्रणाली भी प्रभावित होती है। अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के कारण मस्तिष्क में तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ने लगती है। इससे सुनने की क्षमता में कमी, दृष्टि की कमजोरी और सेरेब्रल एडिमा यानी मस्तिष्क में सूजन होने की दिक्कत भी हो सकती है।
  • अंतरिक्ष में स्पेस रेडिएशन के कारण अंतरिक्ष यात्रियों में दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कैंसर, डिजनरेटिव डिजीज और तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याओं का खतरा भी रहता है।


--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें